अभिप्रेरणा का महत्त्व
अभिप्रेरणा संस्था में लोगों की आवश्यकताओं को पहचानने तथा उन्हें संतुष्ट करने में सहायता करती है जिससे उन्हें अपने कार्य निष्पादन को सुधारने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि सभी प्रमुख संगठन विभिन्न प्रकार के अभिप्रेरणात्मक कार्यक्रमों का विकास करते हैं। क्योंकि मानव संसाधन अन्य संसाधनों की तुलना में अधिकतम महत्त्वपूर्ण है तथा अभिप्रेरणा सांगठनिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए, मानवीय योग्यताओं के प्रभावी प्रयोग में सहायक सिद्ध हुई है। इसीलिए अभिप्रेरणा को संस्था में एक महत्त्वपूर्ण क्रिया के रूप में माना जाता है।
संक्षेप में, अभिप्रेरणा के महत्त्व को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है-
1. अभिप्रेरणा संगठन के सफल निष्पादन में सहायक-अभिप्रेरणा कर्मचारियों के निष्पादन स्तर में सुधार के साथ-साथ संगठनों के सफल निष्पादन में सहायक है क्योंकि उपयुक्त अभिप्रेरणा कर्मचारियों की आवश्यकताओं को संतुष्ट करती है, वे अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा अपने कार्य निष्पादन पर केन्द्रित करते हैं। संगठन में प्रभावी अभिप्रेरणा उच्च स्तरीय निष्पादन को प्राप्त करने में सहायक होती है क्योंकि अभिप्रेरित कर्मचारी सांगठनिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपने प्रयासों का. अधिकतम योगदान देते हैं।
2. अभिप्रेरणा कर्मचारियों में सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न करती है-अभिप्रेरणा कर्मचारियों के नकारात्मक अथवा उनके निष्क्रिय या तटस्थ दृष्टिकोण को संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उनके सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न करने में सहायक होती है क्योंकि यदि कर्मचारियों को उपयुक्त प्रतिफल दिया जाये तथा पर्यवेक्षक सकारात्मक प्रोत्साहन दें तथा उनके अच्छे कार्य के लिए उनकी प्रशंसा करें तो कर्मचारी धीरे-धीरे अपने कार्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपना सकता है।
3. संस्था की आवर्तन दर को कम करनाअभिप्रेरणा का महत्त्व इस रूप में भी है कि यह कर्मचारियों की संस्था को छोड़कर जाने की दर को कम करती है तथा इससे नई नियुक्ति तथा प्रशिक्षण लागत में बचत होती है।
4. कर्मचारियों की अनुपस्थिति की दर को कम करना-अभिप्रेरणा संस्था में कर्मचारियों की अनपस्थिति की दर को कम करने में सहायक होती है। क्योंकि प्रभावी अभिप्रेरणात्मक व्यवस्था के द्वारा बुरी कार्य स्थितियाँ, अपर्याप्त पारिश्रमिक/प्रतिफल, पहचान/ प्रतिष्ठा का अभाव, पर्यवेक्षकों व सहकर्मियों के साथ बुरे सम्बन्ध जैसी कमियों को दूर किया जा सकता है।
5. अभिप्रेरणा संस्था में प्रबन्धकों को नये परिवर्तनों को लागू करवाने में सहायता करती हैअभिप्रेरणा प्रबन्धकों को नये परिवर्तनों को प्रारंभ करने में बिना लोगों के विरोध के सहायता देती है। यदि प्रबन्धक कर्मचारियों को यह आश्वस्त कर दे कि प्रस्तावित परिवर्तन कर्मचारियों के लिए भी अतिरिक्त प्रतिफल लायेगा, तो वे इस परिवर्तन को सहर्ष स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
6. मधुर मानवीय सम्बन्ध-संस्था में कर्मचारियों को अभिप्रेरित करने के लिए वित्तीय तथा अवित्तीय प्रोत्साहनों की अधिक अच्छी व्यवस्था होने से प्रबन्धकों एवं कर्मचारियों के मध्य मधुर मानवीय सम्बन्ध स्थापित होते हैं।
7. संगठन के उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायकअभिप्रेरणा के द्वारा कर्मचारियों को उन कार्यों को करने के लिए अभिप्रेरित किया जा सकता है जिनसे संस्था के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार अभिप्रेरणा संगठन के उद्देश्य की प्राप्ति में सहायक होती है।
8. कर्मचारियों की आवश्यकताओं की संतुष्टिअभिप्रेरणा की आवश्यकता कर्मचारियों की सामाजिक, शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सहायक है। अभिप्रेरणा कर्मचारियों की इन आवश्यकताओं की संतुष्टि करती है।
9. मनोबल का निर्माण-जब अभिप्रेरणा की सहायता से कर्मचारियों की सभी प्रकार की आवश्यकताएँ पूरी हो जाती हैं तब उन्हें मानसिक संतुष्टि प्राप्त होती है, इससे कर्मचारियों में कार्य करने की इच्छा उत्पन्न होती है। इस प्रकार अभिप्रेरणा मनोबल के निर्माण करने में सहायक होती है।
10. अनुकूल कार्य वातावरण का निर्माणअभिप्रेरणा के द्वारा कर्मचारियों की इच्छाओं, आवश्यकताओं एवं भावनाओं को संतुष्ट किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप संस्था में अच्छे कार्य का वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।
11. मानसिक शान्ति-अभिप्रेरणा देने से संस्था में अच्छे मानवीय सम्बन्धों, औद्योगिक शांति तथा अनुकूल कार्य वातावरण की स्थापना होती है। इन सबके परिणामस्वरूप, कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि प्रबन्धकों को भी मानसिक शान्ति मिलती है।