लसिका-लसिका रुधिर के समान एक तरह संयोजी ऊतक है। यह रंगहीन होता है। इसमें ग्लूकोज, विटामिन्स, अमीनो अम्ल, यूरिया, प्रोटीन आदि मिलते हैं। इसें प्रोटीन की मात्रा रुधिर की प्रोटीन मात्रा से 50% कम होती है। इसमें लाल रक्त कणिकाओं का पूर्ण अभाव होता है। परन्तु इसके प्लाज्मा द्रव में लसिका कणिकाएँ तथा ग्रेन्यूलोसाइट्स (Granulocytes) पाये जाते हैं। हृदय के दबाव एवं कोशिकाओं की पतली भित्ति के कारण रुधिर का प्लाज्मा रिस-रिस कर कोशिकाओं से बाहर निकलकर अन्तरकोशिकीय अवकाशों में भर जाता है। इसी द्रव को लसिका कहते हैं। लसिका (Lymph) के कार्य-लसिका के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं- (i) लसिका ऊतकों तक भोज्य पदार्थों का संवहन करती है। (ii) ऊतकों से उत्सर्जी पदार्थों को एकत्रित करती है। (iii) हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करके शरीर की रक्षा करती है। (iv) शरीर के घाव भरने में सहायक होती है। (v) पचे वसा का अवशोषण करके शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती है।