पुस्तकें अनमोल होती हैं। वे हमारी सबसे अच्छी मित्र होती है, क्योंकि वे ज्ञान-
विज्ञान का भंडार होती हैं। व्यक्ति आते हैं और चले जाते हैं परंतु उनके श्रेष्ठ विचार,
ज्ञान, संस्कृति, सभ्यता, मानवीय मूल्य पुस्तकों के रूप में जीवित रहते हैं। पुस्तक प्रदर्शनी
और मेले हमारे लिए वरदान हैं। ये पाठकों और लेखकों का संगम होते हैं। प्रत्येक वर्ष
अगस्त में पुणे में कोरेगाँव पार्क में पुस्तक प्रदर्शनी और मेले का आयोजन किया जाता
है। अनेक पुस्तक विक्रेता और प्रकाशक वहाँ आते हैं। इस बार में भी उस प्रदर्शनी में
गया। स्टालों पर पुस्तकें बड़े आकर्षक ढंग से सजी हुई थीं। सभी स्तर और रुचि के लोगों
के लिए वहाँ यथेष्ट सामग्री थी इतिहास, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, धर्म, भाषा,
यात्रा, जीवन-वृत्त आदि सभी विषयों की पुस्तकें वहाँ थीं। अनेक स्कूलों के विद्यार्थी
वहाँ आए हुए थे। बच्चे-बड़े सभी पुस्तकें खरीदने में व्यस्त थे या उनको देख पढ़ रहे
थे। कुछ लोग समूह में खड़े पुस्तकों पर चर्चा कर रहे थे। मैंने अपने और छोटे भाई के
लिए मुंशी प्रेमचंद का कहानी संग्रह तथा हिंदी का एक शब्दकोश खरीदा।