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गद्य रामवृक्ष बेनीपुरी - बालगोबिन भगत question types

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गद्य रामवृक्ष बेनीपुरी - बालगोबिन भगत questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

वही पुराना स्वर, वही पुरानी तल्लीनता। घर में पतोहू रो रही है जिसे गाँव की स्त्रियाँ चुप कराने की कोशिश कर रही हैं। किंतु, बालगोबिन भगत गाए जा रहे हैं ! हाँ, गाते-गाते कभी-कभी पतोहू के नज़दीक भी जाते और रोने के बदले उत्सव मनाने को कहते। आत्मा परमात्मा के पास चली गई, विरहिनी अपने प्रेमी से जा मिली, भला इससे बढ़कर आनंद की कौन बात ? मैं कभी-कभी सोचता, यह पागल तो नहीं हो गए, किंतु नहीं, वह जो कुछ कह रहे थे उसमें उनका विश्वास बोल रहा था-वह चरम विश्वास, जो हमेशा ही मृत्यु पर विजयी होता आया है । बेटे के क्रिया-कर्म में तूल नहीं किया; पतोहू से ही आग दिलाई उसकी। किंतु ज्यों ही श्राद्ध की अवधि पूरी हो गई, पतोहू के भाई को बुलाकर उसके साथ कर दिया, यह आदेश देते हुए कि इसकी दूसरी शादी कर देना।
(क) बालगोबिन भगत जी द्वारा किया गया कौन-सा कार्य सामाजिक परंपरा के विरुद्ध था ?
(I) पतोहू से बेटे की चिता को आग दिलाना ।
(II) पतोहू को उसके भाई के साथ मायके भेजना ।
(III) बेटे का श्राद्ध विधि-विधान से करना ।
(IV) बेटे की मृत्यु का उत्सव मनाना ।
विकल्प -
(i) कथन (I) और (II) सही हैं।
(ii) केवल कथन (III) सही है।
(iii) कथन (I) और (IV) सही हैं।
(iv) कथन (II) और (III) सही हैं।
(ख) 'विरहनी अपने प्रेमी से जा मिली' इस कथन में बालगोबिन भगत के अनुसार विरहनी कौन है ?
(i) परमात्मा
(ii) आत्मा
(iii) काया
(iv) मृत्यु
(ग) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : बालगोबिन भगत ने अपने पुत्र को मुखाग्नि देने का कार्य अपनी पुत्रवधु से करवाया ।
कारण : बालगोबिन भगत रूढ़िविरोधी और नारी सम्मान के पक्षधर थे ।
विकल्प :
(i) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है।
(ii) कथन और कारण दोनों ही ग़लत हैं।
(iii) कथन सही है और कारण कथन की सही व्याख्या है।
(iv) कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
(घ) लेखक को यह संदेह है कि बालगोबिन भगत कहीं पागल तो नहीं हो गए क्योंकि
(I) वे पतोहू को उसके भाई के साथ मायके भेज रहे थे ।
(II) वे रोने के बदले उत्सव मनाने को कह रहे थे।
(III) वे पुत्र की मृत्यु के बाद गाए जा रहे थे।
(IV) वे पतोहू को चुप कराने की कोशिश कर रहे थे।
विकल्प -
(i) कथन
(I) और (II) सही हैं।
(ii) केवल कथन (III) सही है।
(iii) कथन (I) और (IV) सही हैं।
(iv) कथन (II) और (III) सही हैं।
(ङ) बेटे की मृत्यु के बाद बालगोबिन भगत अपनी बहू से क्या अपेक्षा रखते थे ?
(i) वह उनकी आजीवन सेवा करे ।
(ii) वह विधवा का जीवन व्यतीत करे ।
(iii) वह कबीर के गीत गाया करे ।
(iv) वह पुनर्विवाह कर ले ।
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आसमान बादल से घिरा; धूप का नाम नहीं। ठंडी पुरवाई चल रही। ऐसे ही समय आपके कानों में एक स्वर-तरंग झंकार-सी कर उठी। यह क्या है- यह कौन है! यह पूछना न पड़ेगा। बालगोबिन भगत समूचा शरीर कीचड़ में लिथड़े, अपने खेत में रोपनी कर रहे हैं। उनकी अँगुली एक-एक धान के पोधे को, पंक्तिबद्ध, खेत में बिठा रही है। उनका कंठ एक-एक शब्द को संगीत के जीने पर चढ़ाकर कुछ को ऊपर, स्वर्ग की ओर भेज रहा है ओर कुछ को इस पृथ्वी की मिट्टी पर खड़े लोगों के कानों की ओर! बच्चे खेलते हुए झुम उठते हैं; मेड़ पर खड़ी ओरतों के होंठ काँप उठते हैं, वे गुनगुनाने लगती हैं; हलवाहों के पैर ताल से उठने लगते हैं; रोपनी करनेवालों की अँगुलियाँ एक अजीब क्रम से चलने लगती हैं। बालगोबिन भगत का यह संगीत है या जादू!।

(i) बालगोबिन भगत रोपनी करते समय क्या करते थे?
i. रोते थे
ii. भगवान का नाम लेते थे
iii. गाते थे
iv. सोते थे
(क) विकल्प (iii)
(ख) विकल्प (i)
(ग) विकल्प (ii)
(घ) विकल्प (iv)

(ii) बालगोबिन भगत का संगीत था-
(क) सभी विकल्प सही हैं
(ख) मंत्र मुग्ध करने वाला
(ग) जादू
(घ) कर्णप्रिय

(iii) बालगोविन भगत अपने खेत में किस चीज की खेती करते थे?
(क) गेहूँ
(ख) धान
(ग) जो
(घ) ज्वार

(iv) गद्यांश में किस ऋतु का वर्णन है?
i. ग्रीष्म (ज्येष्ठ)
ii. आषाढ़
iii. श्रावण
iv. कार्तिक
(क) विकल्प (iii)
(ख) विकल्प (ii)
(ग) विकल्प (i)
(घ) विकल्प (iv)

(v) काव्यांश में जादू कहा गया हे-
(क) मठ की महानता को
(ख) खेत की हरियाली को
(ग) बालगोबिन के व्यवहार को
(घ) बालगोबिन के संगीत को
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कार्तिक आया नहीं कि बालगोबिन भगत की प्रभातियाँ शुरू हुईं, जो फागुन तक चला करतीं। इन दिनों वह सबेरे ही उठते। न जाने किस वक्त जगकर वह नदी-स्नान को जाते, गाँव से दो मील दूर। वहाँ से नहा-धोकर लौटते और गाँव के बाहर ही, पोखरे के ऊँचे भिंडे पर अपनी खैजड़ी लेकर जा बैठते और अपने गाने टेरने लगते। खेत, बगीचा, घर-सब पर कुहासा छा रहा था। सारा वातावरण अजीब रहस्य से आवृत मालूम पड़ता था। उस रहस्यमय वातावरण में एक कुश की चटाई पर पूरब मुह, काली कमली ओढ़, बालगोबिन भगत अपनी खैजड़ी लिए बैठे थे। उनके मुह से शब्दों का ताँता लगा था, उनकी अँगुलियाँ खैजड़ी पर लगातार चल रही थीं। मैं जाड़े से कँपकँपा रहा था, किंतु तारों की छाँव में भी उनके मस्तक के श्रमबिंदु, जब-तब चमक ही पड़ते।

(i) प्रभातियाँ किसे कहते हैं?
i) तड़के नहाना
ii) भोर का गीत
iii) सुबह टहलना
iv) बातचीत करना
(क) कथन i सही है।
(ख) कथन ii सही है।
(ग) कथन i, ii, iii व iv सही है।
(घ) कथन ii व iii सही है।

(ii) बालगोबिन भगत की कार्तिक महीने में शुरू होने वाली गतिविधियों में शामिल है-
(क) खंजड़ी बजाना
(ख) सभी विकल्प सही हैं
(ग) जल्दी उठना
(घ) नदी स्रान

(iii) वातावरण को रहस्यमयी क्यों कहा गया हे?
(क)ठंड के कारण
(ख) कुहासे के कारण
(ग) सुहाने मौसम के कारण
(घ) निर्जन स्थान होने के कारण

(iv) लेखक बालगोबिन भगत को देखकर आक्षर्य चकित क्यों हो जाता हे?
(क)ठंड और कुहासे को देखकर
(ख) उनके पागलपन को देखकर
(ग) दिनचर्या और कारनामे को
(घ) उनका गाना सुनकर देखकर

(v) कथन (A): तारों की छाँव में भी उनके मस्तक के श्रमबिंदु, जब-तब चमक ही पड़ते।
कारण (R): कबीर के गानों को पूरी तन्मयता, और नाच-नाच के गाने के ठंड में भी श्रमबिंदु झलकते हैं।
(क) कथन (A) गलत है, किन्तु कारण (R) सही है।
(ख) कथन ( A ) और कारण ( R ) दोनों ही गलत है।
(ग) कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
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बालगोबिन भगत की संगीत-साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया, जिस दिन उनका बेटा मरा। इकलोता बेटा था वहा कुछ सुस्त ओर बोदा-सा था, किन्तु इसी कारण बालगोबिन भगत उसे ओर भी मानते। उनकी समझ में ऐसे आदमियों पर ही ज्यादा नजर रखनी चाहिए या प्यार करना चाहिए, क्योंकि ये निगरानी ओर मुहब्बत के ज्यादा हकदार होते हैं। बड़ी साध से उसकी शादी कराई थी, पतोहू बड़ी ही सुभग ओर सुशील मिली थी। घर की पूरी प्रबन्धिका बनकर भगत को बहुत कुछ दुनियादारी से निवृत्त कर दिया था उसने। उनका बेटा बीमार है, इसकी खबर रखने की लोगों को कहाँ फुरसत! किन्तु मोत तो अपनी ओर सबका ध्यान खींचकर ही रहती है।

(i) प्रस्तुत गद्यांश के लेखक का नाम लिखिए।
(क) विष्णु प्रभाकर
(ख) प्रेमचंद
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी
(घ) इनमें से कोई नहीं

(ii) भगत की पुत्रवधू में क्या गुण था?
(क) वह घर के प्रबन्ध में कुशल थी
(ख) वह सुन्दर व सुशील थी
(ग) घर की जिम्मेदारी को सँभालने
(घ) सभी विकल्प सही हैं वाली थी

(iii) निवृत्त शब्द में से उपसर्ग व मूल शब्द अलग कीजिए-
(क) निवृ + त्त
(ख) निर् + वत्त
(ग) न + इवृत्त
(घ) नि + वृत्त

(iv) बालगोबिन भगत का पुत्र कैसा था?
i) सुस्त और बोदा
ii) सुस्त और क्रोधी
iii) फुर्तीला और बलवान
iv) लम्बा-चोड़ा और हैंसमुख
(क) विकल्प (iv)
(ख) विकल्प (iii)
(ग) विकल्प (ii)
(घ) विकल्प (i)

(v) बालगोबिन भगत के कितने बेटे थे?
(क)तीन
(ख) दो
(ग) चार
(घ) एक
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खेती बारी करते, परिवार रखते भी, बालगोबिन भगत साधु थे-साधु की सब परिभाषाओं में खरे उतरने वाले। कबीर को साहब' मानते थे, उन्हीं के गीतों को गाते, उन्हीं के आदेशों पर चलते। कभी झूठ नहीं बोलते, खरा व्यवहार रखते। किसी से भी दो टूक बात करने में संकोच नहीं करते, न किसी से खामखा झगड़ा मोले लेते। किसी की चीज नहीं छूते, न बिना पूछे व्यवहार में लाते। इस नियम को कभी-कभी इतनी बारीकी तक ले जाते कि लोगों को कुतुहल होता! कभी वह दूसरे के खेत में शोच के लिए भी नहीं बेठते। वह गृहस्थ थे; लेकिन उनकी सब चीज साहब की थी। जो कुछ खेत में पेदा होता, सिर पर लादकर पहले उसे साहब के दरबार में ले जाते-जो उनके घर से चार कोस दूरी पर था-एक कबीरपंथी मठ से मतलबा वह दरबार में भेंट रूप रख लिया जाकर प्रसाद रूप में जो उन्हें मिलता, उसे घर लाते और उसी से गुज़र चलाते !

(i) लेखक के अनुसार बालगोबिन भगत साधु क्यों थे?
(क) वे किसी से लड़ते नहीं थे
(ख) वे साधु की तरह दिखते थे
(ग) वे मोह-माया से दूर थे
(घ) वे सच्चे साधुओं की तरह उत्तम आचार-विचार रखते थे

(ii) बालगोबिन भगत का कोन-सा कार्य-व्यवहार लोगों के आर्ष्वर्य का विषय था?
(क) गीत गाते रहना
(ख) किसी से झगड़ा न करना
(ग) जीवन के सिद्धांतों और आदर्शों का गहराई से अपने आचरण में पालन करना
(घ) अपना काम स्वयं करना

(iii) बालगोबिन भगत कबीर के ही आदर्शों पर चलते थे, क्योंकि
(क) कबीर उनके गाँव के मुखिया थे
(ख) वे कबीर की विचारधारा से प्रभावित थे
(ग) कबीर उनके मित्र थे
(घ) कबीर भगवान का रूप थे

(iv) बालगोबिन भगत के खेत में जो कुछ पेदा होता, उसे वे सर्वप्रथम किसे भेंट कर देते?
(क) कबीरपंधी मठ में
(ख) घर में
(ग) गरीबों में
(घ) मंदिर में

(v) वह गृहस्थ थे; लेकिन उनकी सब चीज साहब की थी। यहाँ साहब से क्या आशय हे?
(क) गुरु से
(ख) भगवान से
(ग) मुखिया से
(घ) कबीर से
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