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व्याकरण question types

325 questions across 8 question groups — pick any mix to generate a Hindi - A paper with step-by-step answer keys.

325
Questions
8
Question groups
5
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Sample Questions

व्याकरण questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

भारतीय संस्कृति, जीवनशैली और खान-पान में मोटे अनाजों (मिलेट्स) का विशेष स्थान रहा है। ये विशिष्ट अनाज हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी अच्छे होते हैं क्योंकि कम पानी और संसाधन के बीच ये विकसित हो जाते हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है कि भारत सरकार के सुझाव पर संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में घोषित किया। जिसका उद्देश्य मोटे अनाजों को लेकर जागरूकता फैलाना और इनके उत्पादन व सेवन को बढ़ावा देना है।
आमजन के बीच मोटे अनाजों का सेवन पिछली कई शताब्दियों से प्रचलित है, परन्तु इसके पोषकीय और औषधीय गुणों की जानकारी हाल ही में हुए जैव रासायनिक अनुसंधानों और चिकित्सा संबंधी अध्ययनों से सामने आई है। आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न होने वाले रोगों के संदर्भ में मोटे अनाजों के अनेक स्वास्थ्य लाभों को दुनिया ने जाना-पहचाना और सराहा है। मोटे अनाजों में गेहूँ और धान की अपेक्षा प्रोटीन और संतुलित अमीनो अम्ल अधिक पाया जाता है । इस तरह से ये मोटे अनाज बाकी अनाजों से पोषण के मामले में श्रेष्ठ होते हैं। इसके अलावा, मोटे अनाज आहार संबंधी रेशों, गुणवत्तापूर्ण वसा और महत्त्वपूर्ण खनिज जैसे- कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन, ज़िंक तथा बी-कॉम्प्लेक्स विटामिनों के समृद्ध स्रोत हैं। मोटे अनाजों में पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े इतने फ़ायदों के बावजूद वर्तमान समय में मानव आबादी इनका सेवन नहीं करती या बहुत कम लोग इसे अपने खाने की थाली में जगह देते हैं। यह एक विडंबना है। मोटे अनाजों के सेवन में इस गिरावट से भारत में पोषण स्थिति में भारी कमी आई है। भारत में कुपोषण की समस्या खेदजनक है।

स्रोत - विज्ञान प्रगति (मासिक पत्रिका)

(क) उपर्युक्त गद्यांश किस विषयवस्तु पर आधारित है?
(i) कुपोषण की समस्या पर
(ii) मोटे अनाज के महत्त्व पर
(iii) संतुलित आहार के महत्त्व पर
(iv) स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर
(ख) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : मोटे अनाज बाकी अनाजों से पोषण के मामले में श्रेष्ठ होते हैं।
कारण : मोटे अनाजों में अनेक पोषकीय और औषधीय खूबियाँ होती हैं।
विकल्प -
(i) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है।
(ii) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
(iii) कथन सही है और कारण कथन की सही व्याख्या है।
(iv) कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष का उद्देश्य है -
उचित विकल्प का चयन करें-
(I) मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देना ।
(II) मोटे अनाज के प्रति जागरूकता फैलाना ।
(III) मोटे अनाज को मुख्य फ़सल घोषित करना ।
(IV) मोटे अनाज की प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाना ।
विकल्प -
(i) कथन (I) और (II) सही हैं।
(ii) केवल कथन (III) सही है।
(iii) कथन (I) और (IV) सही हैं।
(iv) कथन (I), (II) और (IV) सही हैं।
(घ) आज मोटे अनाज अपने किन गुणों के कारण लोकप्रिय हो रहे हैं ?
(ङ) कुपोषण की समस्या के समाधान में मोटे अनाजों की क्या भूमिका हो सकती है ?

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संविधान लागू होने के पंद्रह वर्षों में हिन्दी को अंग्रेज़ी का स्थान ग्रहुण करना था, पर ऐसा प्रतीत होता है कि राष्ट्रभाषा के विकास के लिए सरकार और जनता द्वारा जो प्रयन्न किए गए हैं वे किसी प्रकार से भी संतोषजनक नहीं हैं। कुछ नए विभागों के हिन्दी में नाम रख देने से या विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं में हिन्दी में उत्तर देने की सुविधा से राष्ट्रभाषा हिन्दी का विकास नहीं हो सकता। आज भी हिन्दी में पत्र लिखते हुए जब हम पता लिखने बेठते हैं तो ज़रा सोच में पड़ जाते हैं कि पत्र भटकता तो नहीं रहेगा। अनेक सरकारी अथवा सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रभाषा का अशुद्ध प्रयोग देखते हैं। हिन्दी का खालिस प्रयोग तो अत्यन्त दुर्लभ है। हिन्दी अध्यापकों के भी छात्रों को पढ़ाते हुए अनावश्यक स्थानों पर अंग्रेजी का प्रयोग करते देखा गया है।

1. राष्ट्रभाषा का अशुद्ध प्रयोग कहाँ-कहाँ देखने को मिलता है?
(क) पत्र लिखते हुए
(ख) सार्वजनिक स्थानों पर
(ग) निजी संस्थानों में
(घ) छात्रों को पढ़ाते हुए

2. हिंदी को कब तक अंग्रेजी का स्थान ग्रहण करना था?
(क) पंद्रह वर्षों में
(ख) दस वर्षो में
(ग) सत्तर वर्षों में
(घ) पाँच वर्षों में

3. भारत का संविधान कब लागू हुआ था?
(क) 30 जनवरी 1950
(ख) 15 जनवरी 1950
(ग) 25 जनवरी 1950
(घ) 26 जनवरी 1950

4. राष्ट्रभाषा के विकास की प्रक्रिया में हम किसे संतोषजनक नहीं मान सकते?

5. हिन्दी में पत्र पर पता लिखते समय हम किस सोच में पड़ जाते हैं?
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प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व शय्या त्यागकर खुली हवा में भ्रमण करने से शरीर का अंग-अंग खुलता है। इस समय उपवन, वन, खेत या नदी तट की सेर मन को अपार आनंद प्रदान कराती है। शीतल ताज़ी हवा के शरीर में प्रवेश करने वाली ऑक्सीजन साँसों को ताज़गी देती हे। प्रातःकाल सूर्य की सुनहरी किरणें मानो स्वर्गीय संदेश लेकर धरती पर आती हें। उनसे समस्त सृष्टि में नई चेतना का संचार होता है। इस समय वन-उपवन में पुष्प विकसित होते हैं, तड़ागों में कमल मुसकाते हैं, पेड़ों पर पक्षी चहचहाते हैं। धीमी.धीमी, शीतल, सुगंधमय पवन के झोंके हृदय में हिलोर उठाते हैं। ऐसी मोहक प्रकृति से दूर सोए रहने वाले अभागे हैं। उनका भाग्य भी उन्हीं की तरह सोया रहता हे, ऐसे व्यक्ति के स्वास्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

1. 'अभागा' किसे कहा गया है?
(क) सुबह सेर करने वालों को
(ख) मोहक प्रकृति से दूर सोए रहने वालों को
(ग) ठीक से सो न पाने वालों को
(घ) बीमार लोगों को

2. शय्या शब्द का क्या अर्थ हे?
(क) चारपाई
(ख) रज़ाई
(ग) कंबल
(घ) ऐनक

3. सूर्योदय का संधि विच्छेद कीजिए।
(क) सूर + उदय
(ख) सूर्यो + दय
(ग) सूर्य + दय
(घ) सूर्य + उदय

4. प्रातःकाल के समय किन स्थानों की सेर मन को अपार आनंद प्रदान कराती है?

5. मोहक प्रकृति से आप क्या अभिप्राय निकालते हैं?
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शिक्षा ओर गुरु के माध्यम से ही अपने आंतरिक गुणों को हम प्रकाश में लाते हैं। यदि धर्म के मार्ग पर चलकर मानव विज्ञ बनता है। तो वह अपने जीवन के मार्ग के विकास के लिए अनवरत लगकर जीवन को सफल बनाता है और सम्यक ज्ञान, गुण, धर्म से अपने जीवन को ब्रह्म से जोड़कर करोड़ों जन्मों के कर्मों से मुक्ति प्राप्त करता है, किन्तु यह शिक्षा के द्वारा ही संभव है। शिक्षा भी दो माध्यमों से मिलती है। एक जीविकोपार्जन का माध्यम बनती है तथा दूसरी से जीवन-साधना संभव होती है। दोनों में परिपूर्णता गुरु के माध्यम से ही होती है। जीविकोपार्जन की शिक्षा पाकर यह संसार बड़ा सुखमय प्रतीत होता है ओर जलते हुए दीपक के प्रकाश जेसा वह बाहरी जीवन में प्रकाश पाता है। दूसरी शिक्षा पाने के लिए सद् सुकी तलाश होती है। वह सद् सुकहीं भी कोई भी हो सकता है, जेसे तुलसीदास की सच्ची गुरु उनकी पन्नी थी, जिनकी प्रेरणा से उनके अंतर्मन में प्रकाश भर गया ओर सारे विकार धुल गए। मन स्वच्छ हो गया। अपने दुर्लभ जीवन को सफल बनाकर हमेशा-हमेशा के लिए सुखद जीवन जिए। ऐसे ही ब्रह्म-ज्ञान व आत्मनिरूपण की सच्ची शिक्षा के बिना सार्थक जीवन नहीं मिलता। सच्चा ज्ञान मुक्ति का मार्ग है।

1. व्यक्ति करोड़ों जन्मों के कर्मों से केसे मुक्ति पाता है?
(क) धर्म के मार्ग पर चलकर
(ख) कर्मों से मुक्ति प्राप्त कर
(ग) अपने जीवन को ब्रहम से जोड़कर
(घ) जीवन को सफल बनाकर

2. हम अपने आन्तरिक गुणों को केसे प्रकाश में लाते हें?
(क) शिक्षा और गुरु के माध्यम से।
(ख) धर्म और ज्ञान के मार्ग पर चलकर
(ग) जीविकोपार्जन की शिक्षा पाकर
(घ) दुर्लभ जीवन को सफल बनाकर

3. तुलसीदास की गुरु कोन थीं?
(क) तुलसीदास की बहन
(ख) तुलसीदास की दादी
(ग) तुलसीदास की माता
(घ) तुलसीदास की पन्नी

4. शिक्षा किन-किन माध्यमों से मिलती है?

5. जीविकोपार्जन की शिक्षा से मनुष्य को क्या प्राप्त होता हे?
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अनुशासन के अभाव में समाज में अराजकता और अशांति का साम्राज्य होता है। वन्य पशुओं में अनुशासन का कोई महत्व नहीं है, इसी कारण उनका जीवन असुरक्षित, आतंकित एवं अव्यवस्थित रहता हे। सभ्यता और संस्कृति के विकास के साथ-साध जीवन में अनुशासन का महत्त्व भी बढ़ता गया। आज के वेज्ञानिक युग में तो अनुशासन के बिना मनुष्य का कार्य भी नहीं चल सकता। कुछ व्यक्ति सोचते हैं कि अब मानव, सभ्य ओर शिक्षित हो गया है, उस पर किसी भी प्रकार के नियमों का बंधन नहीं होना चाहिए। वह स्वतंत्र रूप से जो भी करे, उसे करने देना चाहिए, लेकिन यदि व्यक्ति को यह अधिकार दे दिया जाए तो वन्य जीवन जेसी अव्यवस्था आ जाएगी। मानव, मानव ही हे, देवता नहीं। उसमें सुप्रवृत्तियाँ ओर कुप्रवृत्तियाँ दोनों ही होती हैं। मानव सभ्य तभी तक रहता हे जब तक वह अपनी सुप्रवृत्तियों की आझा के अनुसार कार्य करे। इसलिए मानव के पूर्ण विकास के लिए कुछ बंधनों ओर नियमों का होना आवश्यक है।

1. मानव कब सभ्य कहा जा सकता है?
(क) जब वह अपनी सुप्रवृत्तियों के अनुसार कार्य करे
(ख) जब वह अपनी मर्ज़ी के अनुसार कार्य करे
(ग) जब वह अपने लिए कार्य करे
(घ) जब वह अपनी सुविधा के अनुसार कार्य करे

2. अनुशासन के अभाव में समाज की क्या स्थिति होगी?
(क) समाज में शांति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी
(ख) समाज में जागरूकता उत्पन्न हो जाएगी
(ग) समाज में अराजकता और अशांति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी
(घ) समाज तेज़ी से उन्नति करेगा

3. मानव में निहित प्रवृत्तियाँ कौन-कौन सी हैं?
(क) लालच और बुराई
(ख) अधर्म और धर्म
(ग) आदर और अनादर
(घ) सुप्रवृत्तियाँ और कुप्रवृत्तियाँ

4. अनुशासन के अभाव में पशुओं का जीवन केसा होता है?

5. कुछ लोग अनुशासन को उचित क्यों नहीं मानते?
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गुलाब का फूल है
हमारा पढ़ा-लिखा
मैंने उसे काफी
उलट-पुलट कर देखा है
मुझे तो वह ऐसा ही दिखा

सबसे बड़ा सबूत
उसके गुलाब होने का यह है
कि वह गाँव में जाकर
बसने के लिए
तैयार नहीं है

गाँव में उसकी
प्रदर्शनी कौन कराएगा
वहाँ वह अपनी शोभा की
प्रशंसा किससे कराएगा

वह फूलने के बाद
किसी फसल में थोड़े ही
बदल जाता है

मूरख किसान को फूलने के बाद
फसल देने वाला ही तो भाता है

गाँव में इसलिए ठीक है
अलसी और सरसों और
तिली के फूल
जा नहीं सकते वहाँ कदापि
गुलाब और लिली के फूल

बुरा नहीं मानना चाहिए
इस गुलाब - वृत्ति का
गाँव वालों को
क्योंकि वहाँ रहना चाहिए सिर्फ ऐसे हाथ-पाँव वालों को

जो बो सकते हैं
और काट सकते हैं
कुएँ खोद सकते हैं
खाई पाट सकते हैं
और फिर भी चुपचाप
समाजवाद पर भाषण सुनकर
वोट दे सकते हैं
गुलाब के फूल को

- भवानी प्रसाद मिश्र

(क) प्रस्तुत कविता में किस भाव की प्रधानता है ?
(i) हास्य (ii) प्राकृतिक सौंदर्य (iii) व्यंग्य (iv) आक्रोश
(ख) 'गुलाब' किसका प्रतीक है ?
(i) शहर के पढ़े-लिखे नौजवानों का ।
(ii) शहर के वातावरण का ।
(iii) शहर की ज़िंदगी का ।
(iv) शहर की सुविधाओं का ।
(ग) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : बुरा नहीं मानना चाहिए, इस गुलाब-वृत्ति का ।
कारण : वह बचपन से शहर में ही पला-बड़ा है।
विकल्प :
(i) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है।
(ii) कथन और कारण दोनों ही ग़लत हैं।
(iii) कथन सही है और कारण कथन की सही व्याख्या है।
(iv) कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
(घ) गुलाब गाँव में जाकर बसने के लिए क्यों तैयार नहीं है ?
(ङ) कविता के आधार पर लिखिए कि किसान को किस तरह के फूल भाते हैं और क्यों ?

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राम ओर रावण दोनों की राशि थी एक,
रावण जहाँ दुष्ट था वहाँ राम थे नेक।
रावण के पास थी अकूत संपत्ति,
जब कि राम के पास केवल सन्मति।
रावण ने हरण जानकी का किया था,
ओर परिचय कायरता का दिया था।
दशानन का छोटा भाई था विभीषण,
वहीं राम के प्रिय थे अनुज लक्ष्मण।
रावण ने विभीषण का किया तिरस्कार,
इसीलिए रावण का हुआ बंटाढार।
विभीषण जानता था रावण के भेद,
इसीलिए राम रावण को जीत पाए।
राम लोटे लंका से जीत का डंका बजाए,
तभी कहते हैं घर का भेदी लंका ढहाए।

i. रावण के बंटाधार का मुख्य कारण क्या था?
(क) राम का शक्तिशाली होना
(ख) रावण का दुष्ट होना
(ग) अपने छोटे भाई विभीषण का तिरस्कार करना
(घ) जानकी का हरण करना

ii. राम ओर रावण में क्या असमानता थी?
(क) रावण जहाँ दुष्ट था वहाँ राम नेक थे
(ख) रावण के पास अकूत संपत्ति थी, जबकि राम के पास केवल सन्मति थी
(ग) रावण ने अपने भाई का तिरस्कार किया पर राम अपने भाई से प्रेम करते थे
(घ) उपरोक्त सभी

iii. राम ओर रावण में क्या समानता थी?
(क) दोनों बहुत शक्तिशाली और दयावान थे।
(ख) दोनों की समान राशि थी और दोनों परिवार में सबसे बड़े थे।
(ग) दोनों की समान राशि थी और दोनों क्षत्रिय थे।
(घ) दोनों सीता से प्रेम करते थे।

iv. राम की रावण पर विजय का रहस्य क्या था?

v. इस कविता में क्या संदेश दिया गया है?
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पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो।
पुरुष क्या, पुरुषार्थ हुआ न जो,
हृदय की सब दुर्बलता तजो।
प्रबल जो तुम में पुरुषार्थ हो,
सुलभ कोन तुम्हें न पदार्थ हो?
प्रगति के पथ में विचरों उठो।
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो।।
न पुरुषार्थ बिना कुछ स्वार्थ है,
न पुरुषार्थ बिना परमार्थ है।
समझ लो यह बात यथार्थ है।
कि पुरुषार्थ ही पुरुषार्थ है।
भुवन में सुख -शांति भरो, उठो।
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो।।
न पुरुषार्थ बिना स्वर्ग है,
न पुरुषार्थ बिना अपसर्ग है।
न पुरुषार्थ बिना क्रियत कहीं,
न पुरुषार्थ बिना प्रियता कहीं।
सफलता वर-वुल्य वरो, उठो।
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो।।
न जिसमें कुछ पोरुष हो यहाँ-
सफलता वह पा सकता कहाँ?
अपुरुषार्थ भयंकर पाप है,
न उसमें यश है, न प्रताप है।
न कृमि-कीट समान मरो, उठो।
पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो।।

i. काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(क) अपुरुषार्थ
(ख) परमार्थ
(ग) सफलता
(घ) पुरुषार्थ का महत्त्व

ii. मनुष्य पुरुषार्थ से क्या-क्या कर सकता है?
(क) पुरुषार्थ से मनुष्य अपना व समाज का भला कर सकता है।
(ख) वह किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।
(ग) वह विश्व में सुख-शांति की स्थापना कर सकता है।
(घ) उपरोक्त सभी

iii. काव्यांश के प्रथम भाग के माध्यम से कवि ने मनुष्य को क्या प्रेरणा दी है?
(क) वह अपनी समस्त शक्तियाँ इकट्ठी करके परिश्रम करे तथा उन्नति की दिशा में कदम बढ़ाए।
(ख) वह सफलता से जीवन का आनंद प्राप्त करे।
(ग) वह यश और प्रताप हासिल करे और दूसरों पर राज करे।
(घ) वह युद्ध करे।

iv. 'सफलता वर-तुल्य वरो, उठो' पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

v. 'अपुरुषार्थ भयंकर पाप है'-कैसे?
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माना आज मशीनी युग में, समय बहुत महँगा है लेकिन
तुम थोड़ा अवकाश निकालो, तुमसे दो बातें करनी हैं।
उम्र बहुत बाकी है लेकिन, उम्र बहुत छोटी भी तो है
एक स्वप्र मोती का है तो, एक स्वप्र रोटी भी तो है
घुटनों में माथा रखने से पोखर पार नहीं होता है
सोया है विश्वास जगा लो, हम सब को नदिया तरनी है।
तुम थोड़ा अवकाश निकालो, तुमसे दो बाते करनी हैं।
मन छोटा करने से मोटा काम नहीं छोटा होता है,
नेह-कोष को खुलकर बाँटो, कभी नहीं टोटा होता है,
आँसू वाला अर्थ न समझे, तो सब ज्ञान व्यर्थ जाएँगे
मत सच का आभास दबा लो, शाश्रत आग नहीं मरनी है।
तुम थोड़ा अवकाश निकालो, तुमसे दो बातें करनी हैं।

i. सच का आभास क्यों नहीं दबाना चाहिए?
(क) क्योंकि इससे पोखर पार नहीं होता है।
(ख) क्योंकि इससे वास्तविक समस्याएँ समाप्त नहीं हो जातीं।
(ग) क्योंकि इससे समस्या ओर बड़ी हो जाती है।
(घ) क्योंकि आग लग सकती है।

ii. मशीनी युग में समय महँगा होने का क्या तात्पर्य है?
(क) हर चीज महँगी हे।
(ख) समय भी क़ीमती है।
(ग) बहुत महंगाई हे।
(घ) समय को ख़रीदा जा सकता है।

iii. 'घुटनों में माथा रखने से पोखर पार नहीं होता है -पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
(क) समय बहुत महँगा है
(ख) हम सब को नदिया तरनी है
(ग) सब ज्ञान व्यर्थ हैं।
(घ) मानव निक्क्रिय होकर आगे नहीं बढ़ सकता।

iv. मोती का स्वप्र और रोटी का स्वप्र से क्या तात्पर्य है? दोनों किसके प्रतीक हैं?

v. 'मन’ और ‘स्रेह’' के बारे में कवि क्या परामर्श दे रहा है और क्यों?
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मधुर याद बचपन तेरी
गया, ले गया, तू जीवन की,
सबसे मस्त खुशी मेरी।
चिंता रहित खेलना खाना,
फिर वह फिरना निर्भय स्वछंद,
केसे भूला जा सकता है,
बचपन का अतुलित आनंद।
ना और मचत जाना भी,
क्या आनंद दिखलाते थे,
बड़े-बड़े मोती-से आँसू,
जयमाला पहनाते थे।
में रोई, माँ काम छोड़कर,
आई, मुझको उठा लिया,
झाड़-पोंछकर चूम-घूमकर,
गीले गालों को सुखा दिया।
आ जा बचपन ! एक बार फिर
दे दे अपनी निर्मल शांति,
व्याकुल व्यथा मिटाने वाली,
वह अपनी प्राकृत विश्रांति।
वह भोली-सी मधुर सरलता।
वह प्यारा जीवन निष्षाप,
क्या फिर आकर मिटा सकेगा,
तू मेरे मन का संताप?

i. जयमाला कौन पहनाते है?
(क) भोली-सी मधुर सरलता
(ख) सहेलियाँ
(ग) बड़े-बड़े मोती के समान आँसू
(घ) माँ

ii. कवयित्री क्या नहीं भूल पा रही है?
(क) अपने बचपन के दिनों को
(ख) अपनी माँ के प्यार को
(ग) अपनी सहेलियों को
(घ) जयमाला को

iii. कवयित्री क्या कामना कर रही है?
(क) कोई उसे जयमाला पहना दे
(ख) भोली-सी मधुर सरलता मिल जाये
(ग) माँ उसे गोद में उठा ले
(घ) उसका बचपन एक बार पुनः लौट कर आ जाए

iv. बचपन की क्या - क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?

v. रोती हुई कवयित्री को माँ केसे शांत कराती है?
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लोकतंत्र के मूलभूत तत्व को समझा नहीं गया है और इसलिए लोग समझते हैं कि सब कुछ सरकार कर देगी, हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। लोगों में अपनी पहल से ज़िम्मेदारी उठाने और निभाने का संस्कार विकसित नहीं हो पाया है। फलस्वरूप देश की विशाल मानव-शक्ति अभी खर्राटे लेती पड़ी है और देश की पूँजी उपयोगी बनाने के बदले आज बोझरूप बन बैठी है। लेकिन उसे नींद से झकझोर कर जाग्रत करना है। किसी भी देश को महान् बनाते हैं उसमें रहने वाले लोग। लेकिन अभी हमारे देश के नागरिक अपनी ज़िम्मेदारी से बचते रहे हैं। चाहे सड़क पर चलने की बात हो अथवा साफ़-सफ़ाई की बात हो, जहाँ-तहाँ हम लोगों को गंदगी फैलाते और बेतरतीब ढंग से वाहन चलाते देख सकते हैं। फिर चाहते हैं कि सब कुछ सरकार ठीक कर दे।
सरकार ने बहुत सारे कार्य किए हैं, इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। वैज्ञानिक प्रयोगशालाएँ खोली हैं, विशाल बाँध बनवाए हैं, फ़ौलाद के कारखाने खोले हैं आदि-आदि बहुत सारे काम सरकार के द्वारा हुए हैं। पर अभी करोड़ों लोगों को कार्य में प्रेरित नहीं किया जा सका है।
वास्तव में होना तो यह चाहिए कि लोग अपनी सूझ-बूझ के साथ अपनी आंतरिक शक्ति के बल पर खड़े हों और अपने पास जो कुछ साधन-सामग्री हो उसे लेकर कुछ करना शुरू कर दें। और फिर सरकार उसमें आवश्यक मदद करे। उदाहरण के लिए, गाँव वाले बड़ी-बड़ी पंचवर्षीय योजनाएँ नहीं समझ सकेंगे, पर वे लोग यह बात ज़रूर समझ सकेंगे कि अपने गाँव में कहाँ कुआँ चाहिए, कहाँ सिंचाई की ज़रूरत है, कहाँ पुल की आवश्यकता है। बाहर के लोग इन सब बातों से अनभिज्ञ होते हैं।
(क) लोकतंत्र का मूलभूत तत्व है:
  1. कर्तव्यपालन।
  2. लोगों का राज्य।
  3. चुनाव।
  4. जनमत।
(ख) किसी देश की महानता निर्भर करती है:
  1. वहाँ की सरकार पर।
  2. वहाँ के निवासियों पर।
  3. वहाँ के इतिहास पर।
  4. वहाँ की पूँजी पर।
(ग) सरकार के कामों के बारे में कौन-सा कथन सही नहीं है:
  1. वैज्ञानिक प्रयोगशालाएँ बनवाई हैं।
  2. विशाल बाँध बनवाए है।
  3. वाहन-चालकों को सुधारा है।
  4. फौलाद के कारखाने खोले हैं।
(घ) सरकारी व्यवस्था में किस कमी की ओर लेखक ने संकेत किया है:
  1. गाँव से जुड़ी समस्याओं के निदान में ग्रामीणों की भूमिका को नकारना।
  2. योजनाएँ ठीक से न बनाना।
  3. आधुनिक जानकारी का अभाव।
  4. जमीन से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान न देना।
(ङ) ‘‘झकझोर कर जागृत करना‘‘ का भाव गद्यांश के अनुसार होगा:
  1. नींद से जगाना।
  2. सोने न देना।
  3. जिम्मेदारी निभाना।
  4. जिम्मेदारियों के प्रति सचेत करना।
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हरियाणा के पुरातत्व-विभाग द्वारा किए गए अब तक के शोध और खुदाई के अनुसार लगभग 5500 हेक्टेयर में फैली यह राजधानी ईसा से लगभग 3300 वर्ष पूर्व मौजूद थी। इन प्रमाणों के आधार पर यह तो तय हो ही गया है कि राखीगढ़ी की स्थापना उससे भी सैकड़ों वर्ष पूर्व हो चुकी थी।
अब तक यही माना जाता रहा है कि इस समय पाकिस्तान में स्थित हड़प्पा और मोहनजोदड़ो ही सिंधुकालीन सभ्यता के मुख्य नगर थे। राखीगढ़ी गाँव में खुदाई और शोध का काम रुक-रुक कर चल रहा है। हिसार का यह गाँव दिल्ली से मात्र एक सौ पचास किलोमीटर की दूरी पर है। पहली बार यहाँ 1968 में खुदाई हुई थी और तब इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा नगर माना गया। उस समय के शोधार्थियों ने सप्रमाण घोषणाएँ की थीं कि यहाँ दबे नगर, कभी मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से भी बड़ा रहा होगा।
अब सभी शोध विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि राखीगढ़ी, भारत-पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान का आकार और आबादी की दृष्टि से सबसे बड़ा शहर था। प्राप्त विवरणों के अनुसार समुचित रूप से नियोजित इस शहर की सभी सड़कें 1.92 मीटर चौड़ी थीं। यह चौड़ाई कालीबंगा की सड़कों से भी ज़्यादा है। एक ऐसा बर्तन भी मिला है, जो सोने और चाँदी की परतों से ढका है। इसी स्थल पर एक 'फाउंड़ी' के भी चिह्न मिले हैं, जहाँ संभवत: सोना ढाला जाता होगा। इसके अलावा टैराकोटा से बनी असंख्य प्रतिमाएँ ताँबे के बर्तन और कुछ प्रतिमाएँ और एक 'फ़र्नेस' के अवशेष भी मिले हैं।
मई 2012 में 'ग्लोबल हैरिटेज फंड' ने इसे एशिया के दस ऐसे विरासत-स्थलों' की सूची में शामिल किया है, जिनके नष्ट हो जाने का खतरा है।
राखीगढ़ी का पुरातात्विक महत्व विशिष्ट है। इस समय यह क्षेत्र पूरे विश्व के पुरातत्व विशेषज्ञों की दिलचस्पी और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। यहाँ बहुत से काम बकाया हैं; जो अवशेष मिले हैं, उनका समुचित अध्ययन अभी शेष है। उत्खनन का काम अब भी अधूरा है।
(क) अब सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा नगर किसे मानने की संभावनाएँ हैं?
  1. मोहनजोदड़ो।
  2. राखीगढ़ी।
  3. हड़प्पा।
  4. कालीबंगा।
(ख) चौड़ी सड़कों से स्पष्ट होता है कि:
  1. यातायात के साधन थे।
  2. अधिक आबादी थी।
  3. शहर नियोजित था।
  4. बड़ा शहर था।
(ग) इसे एशिया के 'विरासत-स्थलों' में स्थान मिला क्योंकि:
  1. नष्ट हो जाने का खतरा है।
  2. सबसे विकसित सभ्यता है।
  3. इतिहास में इसका नाम सर्वोपरि है।
  4. यहाँ विकास की तीन परतें मिली हैं।
(घ) पुरातत्व-विशेषज्ञ राखीगढ़ी में विशेष रुचि ले रहे हैं क्योंकि:
  1. काफ़ी प्राचीन और बड़ी सभ्यता हो सकती है।
  2. इसका समुचित अध्ययन शेष है।
  3. उत्खनन का कार्य अभी अधूरा है।
  4. इसके बारे में अभी-अभी पता लगा है।
(ङ) उपयुक्त शीर्षक होगा:
  1. राखीगढ़ी: एक सभ्यता की संभावना।
  2. सिंधु-घाटी सभ्यता।
  3. विलुप्त सरस्वती की तलाश।
  4. एक विस्तृत शहर राखीगढी।
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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:किसी भी जीव के शरीर और मानस के सबसे ऊपर मस्तिष्क है। इस मस्तिष्क का स्वभाव कैसे तय होता है? बुद्धि में होने वाले विचार से। इसका मतलब यह है कि किसी भी व्यक्ति के वंशानुगत स्वभाव को उसकी बुद्धि, उसका विवेक बदल सकता है। इसका मतलब यह है कि हमारे बर्ताव, हमारे कर्म पर हमारा वश है, चाहे दुनिया भर पर न भी हो। हम अपने स्वभाव को बदल सकते हैं, अपनी बुद्धि में बारीक बदलाव लाकर। इसके लिए हमें मस्तिष्क की रूप-रेखा पर एक नजर दौड़ानी होगी।
हमारे मस्तिष्क के दो विभिन्न अंश है: चेतन और अवचेतन। दोनों ही अलग-अलग प्रयोजनों के लिए जिम्मेदार हैं और दोनों के सीखने के तरीके भी अलग-अलग हैं। मस्तिष्क का चेतन भाग हमें विशिष्ट बनाता है, वही हमारी विशिष्टता है। इसकी वजह से एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से अलग होता है। हमारा कुछ अलग-सा स्वभाव, हमारी कुछ अनोखी सृजनात्मक शक्ति - ये सब मस्तिष्क के इसी हिस्से से संचलित होती हैं, तय होती हैं। हर व्यक्ति की चेतन रचनात्मकता ही उसकी मनोकामना, उसकी इच्छा और महत्वाकांक्षा तय करती है।
इसके विपरीत मस्तिष्क का अवचेतन हिस्सा एक ताकतवर प्रतिश्रुति यंत्र जैसा ही है। यह अब तक के रिकार्ड किए हुए अनुभव दोहराता रहता है। इसमें रचनात्मकता नहीं होती। यह उन स्वचलित क्रियाओं और उस सहज स्वभाव को नियंत्रित करता है, जो दुहरा-दुहरा कर, हमारी आदत का एक हिस्सा बन चुका है। यह जरूरी नहीं है कि अवचेतन दिमाग की आदतें और प्रतिक्रियाएँ हमारी मनोकामनाओं या हमारी पहचान पर आधारित हों। दिमाग का यह हिस्सा अपने जन्म के थोड़े पहले, माँ के पेट में ही सीखना शुरू कर देता है जैसे जीवन के ‘चक्रव्यूह’ में उतरने से पहले ही ‘अभिमन्यु’ पाठ सीखने लगा हो! यहाँ से लेकर सात साल की उमर तक वे सारे कर्म और आचरण हमारे दिमाग का यह अवचेतन हिस्सा सीख लेता है जो भावी जीवन के लिए मूल आधार हैं।
(क) कौन-सा कथन सही है?
  1. वंशानुगत स्वभाव को अपने विवेक और बुद्धि से बदल सकते हैं
  2. वंशानुगत स्वभाव को अपने विवेक और बुद्धि से नहीं बदल सकते हैं
  3. व्यवहार और कर्म पर किसी का वश नहीं है
  4. नियति ही सर्वोच्च है और होनी होकर रहती है
(ख) हम अपने स्वभाव को कैसे परिवर्तित कर सकते हैं?
  1. चेतन मस्तिष्क को समझकर
  2. अवचेतन मस्तिष्क को समझकर
  3. बुद्धि में सूक्ष्म परिवर्तन लाकर
  4. मस्तिष्क की रूप-रेखा पर नजर दौड़ाकर
(ग) किसी व्यक्ति को दूसरे से भिन्न और विशिष्ट स्वभाव का बनाता है:
  1. चेतन मस्तिष्क
  2. अवचेतन मस्तिष्क
  3. हमारे कर्मों का फल
  4. हँसमुख व्यवहार
(घ) अभिमन्यु की चर्चा से लेखक प्रतिपादित करना चाहता है कि -
  1. चेतन मस्तिष्क जन्म से पहले ही काम करना शुरू कर देता है
  2. अवचेतन मस्तिष्क जन्म से पहले ही काम करना शुरू कर देता है
  3. अवचेतन मस्तिष्क चक्रव्यूह जैसा होता है
  4. हमारा आचरण हमारे भविष्य का निर्माता है
(ङ) सृजनात्मक और रचनात्मक कार्यों की जिम्मेदारी है -
  1. मानव स्वभाव की
  2. चेतन मस्तिष्क की
  3. अवचेतन मन की
  4. वंशानुगत स्वभाव की
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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:सवेरे हम अपनी मंजिल काठमांडू की ओर बढ़े। पहाड़ी खेतों में मक्के और अरहर की फसलें लहरा रही थीं। छोटे-छोटे गाँव और परकोटे वाले घर बहुत सुंदर लग रहे थे। शाम होते-होते हम काठमांडू पहुँच गए। आज काठमांडू पर लिखते हुए अंगुलियाँ काँप रहीं हैं। वैसे ही जैसे पच्चीस अप्रैल को काठमांडू की धरती काँप उठी थी। न्यूज चैनल जब धरहरा स्तंभ को भरभराकर गिरते दिखा रहे थे, मेरा मन बैठा जा रहा था। क्या हुआ होगा धरहरा के इर्दगिर्द फेरी लगाकर सामान बेचने वालों का? और उस बाँसुरी वादक का जिसके सुरों ने मन मोह लिया था। और वे पर्यटक जो धरहरा के सौंदर्य में बिंधे उसका सौंदर्य निहारते। सब कुछ जानते हुए भी मन यही कह रहा है कि सब ठीक हो।
रात को हम बाजार गए। बाजार इलेक्ट्राॅनिक सामानों से अटा पड़ा था और दुकानों की मालकिनें मुस्तैदी से सामान बेच रही थीं। हमारे हिमालयी क्षेत्रों की तरह यहाँ भी अर्थव्यवस्था का आधार औरतें हैं। क्योंकि पहाड़ों पर पर्याप्त जमीन नहीं होती और रोजगार के साधन भी बहुत नहीं होते, सो घर के पुरूष नीचे मैदानी इलाकों में कमाने जाते हैं और घर परिवार की सारी जिम्मेदारी महिलाएँ उठाती हैं। यहाँ गाँव की महिलाएँ खेती और शहर की महिलाएँ व्यवसाय सँभालती हैं। मैंने देखा वे बड़ी कुशलता से व्यावसायिक दाँव-पेंच अपना रही थीं।
हम पोखरा होते हुए लौट रहे थे। रास्ते भर हिमाच्छादित चोटियाँ आँख मिचौली खेलती रहीं। राह में अनेक छोटे-बड़े नगर-गाँव और कस्बे आते रहे। नेपाली औरतें घरों में काम करती नजर आ रही थीं। मक्का कटकर घर आ चुकी थी। उसके गुच्छे घर के बाहर खूँटियों के सहारे लटके नजर आ रहे थे। अब हम काली नदी के साथ-साथ चल रहे थे।
(क) काठमांडू पर लिखने के लिए लेखक की अंगुलियाँ क्यों काँप रही थीं?
  1. नेपाल में आया भूकंप याद हो आया
  2. आतकंवादी हमले की आशंका थी
  3. लेखक के हाथ में चोट थी
  4. धरहरा स्तंभ अब कभी नहीं देख पाएगा
(ख) लेखक दुखी और हताश क्यों था?
  1. धरहरा स्तंभ भूकंप में तहस-नहस हो गया था
  2. न्यूज चैनल जब धरहरा स्तंभ दिखा रहे थे
  3. लग रहा था जीवन क्षणभंगुर है
  4. प्राकृतिक आपदा कहीं भी आ सकती है
(ग) फेरीवाले और बाँसुरी वादक के लिए लेखक क्यों दुखी है?
  1. भूकंप में वे नहीं बचे होंगे
  2. उनका काम-धंधा ठप्प हो गया होगा
  3. उनकी मुलाकात को कुछ समय ही हुआ था
  4. उनसे अच्छी दोस्ती हो गई थी
(घ) नेपाल में अर्थव्यवस्था का आधार औरतें क्यों हैं?
  1. पुरूष रोजगार के लिए बाहर जाकर काम करते हैं
  2. महिलाएँ ज्यादा जिम्मेदार होती हैं
  3. महिलाएँ पुरूषों पर कम विश्वास करती है
  4. महिलाएँ मोल-भाव अच्छी तरह करती हैं
(ङ) गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक होगा-
  1. काठमांडू की यात्रा
  2. पर्यटन और नेपाल
  3. बाजार सँभालती नेपाली औरतें
  4. भूकंप के बाद का शहर
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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:चंपारण सत्याग्रह के बीच जो लोग गांधीजी के संपर्क में आए वे आगे चलकर देश के निर्माताओं में गिने गए। चंपारण में गांधीजी न सिर्फ सत्य और अहिंसा का सार्वजनिक हितों में प्रयोग कर रहे थे बल्कि हलुवा बनाने से लेकर सिल पर मसाला पीसने और चक्की चलाकर गेहूँ का आटा बनाने की कला भी उन बड़े वकीलों को सिखा रहे थे, जिन्हे गरीबों की अगुवाई की जिम्मेदारी सौंपी जानी थी। अपने इन आध्यात्मिक प्रयोगों के माध्यम से वे देश की गरीब जनता की सेवा करने और उनकी तकदीर बदलने के साथ देश को आजाद कराने के लिए समर्पित व्यक्तियों की एक ऐसी जमात तैयार करना चाह रहे थे जो सत्याग्रह की भट्टी में उसी तरह तपकर निखरे, जिस तरह भट्टी में सोना तपकर निखरता और कीमती बनता है।
गांधीजी की मान्यता थी कि एक प्रतिष्ठित वकील और हजामत बनाने वाले हज्जाम में पेशे के लिहाज से कोई फर्क नही, दोनों की हैसियत एक ही है। उन्होंने पसीने की कमाई को सबसे अच्छी कमाई माना और शारीरिक श्रम को अहमियत देते हुए उसे उचित प्रतिष्ठा व सम्मान दिया था। कोई काम बड़ा नहीं, कोई काम छोटा नहीं, इस मान्यता को उन्होंने स्थापित करना चाहा। मर्यादाओं और मानव-मूल्यों को उन्होंने प्राथमिकता दी ताकि साधन शुद्धता की बुनियाद पर एक ठीक समाज खड़ा हो सके। आजाद हिन्दुस्तान आत्मनिर्भर, स्वावलंबी और आत्म-सम्मानित देश के रूप मे विश्व-बिरादरी के बीच अपनी एक खास पहचान बनाए और फिर उसे बरकरार भी रखे।
  1. गांधीजी बड़े वकीलों को हलुवा बनाना और सिल पर मसाला पीसना क्यों सिखाना चाहते थे?
(क) वे गरीब जनता की सेेवा करने में हिचकिचाएँगे नहीं
(ख) आत्मनिर्भर बनने के लिए जरूरी था
(ग) सार्वजनिक हित के लिए अति-आवश्यक था
(घ) सत्याग्रह का अनोखा तरीका था
  1. गांधीजी आध्यात्मिक प्रयोग क्यों कर रहे थे?
(क) आजादी के प्रति समर्पित लोगों का समूह तैयार करने के लिए
(ख) सोने को कुंदन बनाने के लिए
(ग) स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए
(घ) अंग्रेजी शासन को अपनी ताकत दिखाने के लिए
  1. व्यवसाय को लेकर गांधीजी के क्या विचार थे?
(क) उन्होंने पसीने की कमाई को सबसे अच्छी कमाई माना
(ख) कोई भी काम छोटा या बड़ा नही, सभी पेशे एक-समान हैं
(ग) शारीरिक श्रम से ही आजादी मिलेगी
(घ) सब अपना-अपना काम ठीक से करें
  1. गांधीजी ने अच्छे समाज के निर्माण के लिए महत्व दिया
(क) आत्मनिर्भरता को
(ख) मर्यादाओं और मानव-मूल्यों को
(ग) अहिंसा को
(घ) बुनियादी शिक्षा को
  1. आजाद हिन्दुस्तान आत्मनिर्भर, स्वावलंबी और आत्म-सम्मानित बने - यह विचार प्रमाण था गांधीजी की
(क) देशभक्ति का
(ख) आध्यात्मिकता का
(ग) बहादुरी का
(घ) समझदारी का
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:
ओ देशवासियो, बैठ न जाओ पत्थर से,
ओ देशवासियो, रोओ मत तुम यों निर्झर से,
दरख्वास्त करें, आओ, कुछ अपने ईश्वर से
वह सुनता है
ग़मज़दो और
रंजीदों की।
जब सार सरकता-सा लगता जग-जीवन से
अभिषिक्त करें, आओ, अपने को इस प्रण से -
हम कभी न मिटने देंगे भारत के मन से
दुनिया ऊँचे
आदर्शो की,
उम्मीदों की
साधना एक युग-युग अंतर में ठनी रहे
यह भूमि बुद्ध-बापू से सुत की जनी रहे;
प्रार्थना एक युग-युग पृथ्वी पर बनी रहे
यह जाति
योगियों, संतों
और शहीदों की।
(क) कवि देशवासियों को क्या कहना चाहता है?
  1. निराशा और जड़ता छोड़ो
  2. जागो, आगे बढ़ो
  3. पढ़ो, लिखो, कुछ करो
  4. डरो मत, ऊँचे चढ़ो
(ख) कवि किसकी और किससे प्रार्थना की बात कर रहा है?
  1. भगवान और जनता
  2. दुखी लोग और ईश्वर
  3. देशवासी और सरकार
  4. युवा वर्ग और ब्रिटिश सत्ता
(ग) कवि भारतीयों को कौन-सा संकल्प लेने को कहता है?
  1. हम भारत को कभी न मिटने देंगे
  2. जीवन में सार-तत्व को बनाए रखेंगे
  3. उच्च आदर्श और आशा के महत्व को बनाए रखेंगे
  4. जग-जीवन को समरसता से अभिषिक्त करेंगे
(घ) 'यह भूमि बुद्ध-बापू से सुत की जनी रहे'- का भाव है:
  1. इस भूमि पर बुद्ध और बापू ने जन्म लिया
  2. इस भूमि पर बुद्ध और बापू जैसे लोग जन्म लेते रहें
  3. यह धरती बुद्ध और बापू जैसी है
  4. यह धरती बुद्ध और बापू को हमेशा याद रखेगी
(ड़) कवि क्या प्रार्थना करता है?
  1. योगी, संत और शहीदों का हम सब सम्मान करें
  2. युगों-युगों तक यह धरती बनी रहे
  3. धरती माँ का वंदन करते रहें
  4. भारतीयों में योगी, संत और शहीद अवतार लेते रहें
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही उत्तरवाले विकल्प चुनकर लिखिए:एक बच्ची उधर
कत्थक में थिरक रही है, और
ढेर सारी बच्चियाँ
गोबर लीद ढूँढ़ते रहने के बाद
अँधेरे में दुबक रही हैं
लड़कियाँ नदी तालाब कुआँ
घासलेट माचिस फंदा
ढूँढ़ रही हैं।
और इसी वक्त
एक लड़की चेहरे की कोमलता के बारे में
रेडियोे से नुस्खा बता रही है
और असंख्य बच्चे
अँधेरे की तरफ
दौड़ते जा रहे हैं।
उनकी समृतियों में फिलवक्त
चीख और रूदन
और गिड़गिड़ाहट है
उनकी आखों में
कल की छीना-झपटी और भागमभाग का
पैबंद इतिहास है
उनके भीतर शब्द रहित भय
और सिर्फ जख्मी आज है
पर वे शायद अभी जानते नहीं
वे पृथ्वी के बाशिंदे हैं करोड़ों
और उनके पास आवाजों का महासागर है
जो छोटे से गुब्बारे की तरह
फोड़ सकता है किसी भी वक्त
अंधेरे के सबसे बड़े समूह को!
(क) काव्यांश में उभरकर आया है:
  1. गाँव और शहर का अंतर
  2. लड़के-लड़कियों में भेदभाव
  3. गरीब और अमीर बच्चों का जीवन
  4. अँधेरे और उजाले का प्रभाव
(ख) ‘असंख्य बच्चे अँधेरे की तरफ दौड़ते जा रहे हैं’- यहाँ ‘अँधेरा’ से तात्पर्य है:
  1. विषमता और भेदभाव
  2. गरीबी और अज्ञान
  3. चीख और रूदन
  4. छीना-झपटी और भागमभाग
(ग) आपके विचार से कविता में कौन-सी बच्ची देश का प्रतिनिधित्व कर रही है?
  1. कत्थक पर थिरकती
  2. अँधेरे में दुबकती
  3. रेडियो से नुस्खा बताती
  4. चेहरे की कोमलता सँभालती
(घ) करोड़ो वंचित देशवासी नहीं जानते कि:
  1. उनका इतिहास महान है
  2. चीख और रूदन सदा नहीं रहेंगे
  3. वे शोषण के गुब्बारे को फोड़ सकते हैं
  4. वे व्यवस्था का विरोध कर सकते हैं
(ङ) “उनके भीतर शब्द-रहित भय
और सिर्फ जख्मी आज है”- का आशय है:
  1. वे अपने शोषण के बारे में बताते हुए डरते हैं
  2. वे आज घायल हैं
  3. वे जख्मों से डर जाते हैं
  4. चुपचाप भीतर बैठे रहना उन्हें डराता है
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर सही उत्तरवाले विकल्प चुनकर लिखिए:क्या कुटिल व्यंग्य! छीनता वेदना से अधीर, आशा से जिनका नाम रात-दिन जपती है,
दिल्ली के वे देवता रोज कहते जाते, ‘कुछ और धरो धीरज, किस्मत अब छपती है।’
किस्मतें रोज छप रहीं, मगर जलधार कहाँ? प्यासी हरियाली सूख रही है खेतों में,
निर्धन का धन पी रहे लोभ के प्रेत छिपे, पानी विलीन होता जाता है रेतों में।
हिल रहा देश कुत्सा के जिन आद्यातों से, वे नाद तुम्हें ही नहीं सुनाई पड़ते हैं?
निर्माणों के प्रहरियो! तुम्हें ही चोरों के काले चेहरे क्या नहीं दिखाई पड़ते हैं?
तो होश करो, दिल्ली के देवो, होश करो, सब दिन तो यह मोहिनी न चलनेवाली है,
होती जाती है गर्म दिशाओं की साँसें, फिर कोई आग उगलनेवाली है।
(क) गरीबों के प्रति कुटिल व्यंग्य क्या है?
  1. धीरज रखने का अनुरोध
  2. भाग्य पलटने का आश्वासन
  3. कुछ और काम करने का आग्रह
  4. वेदना और अधीरता
(ख) “दिल्ली के वे देवता”- कौन हैं?
  1. सरकारी कर्मचारी
  2. शक्तिशाली शासक
  3. बड़े व्यापारी
  4. प्रभावशाली लोग
(ग) कौन-सी पंक्ति परिवर्तन होने की चेतावनी दे रही है?
  1. और धरो धीरज, किस्मत अब छपती है
  2. पानी विलीन होता जाता है रेतों में
  3. तो होश करो दिल्ली के देवो
  4. मिट्टी फिर कोई आग उगलने वाली है
(घ) “पानी विलीन होता जाता है रेतों में”- कथन का आशय है:
  1. सिंचाई नहीं हो पाती
  2. वर्षा पर्याप्त नहीं होती
  3. गरीबों तक सुविधाएँ नहीं पहुँचती
  4. रेत में खेती नहीं हो सकती
(ङ) निर्माण के प्रहरी अनदेखी करते हैं-
  1. वैभवशाली लोगों की
  2. दिल्ली के देवों की
  3. हरे-भरे खेतों की
  4. चोरों और भ्रष्टाचारियों की
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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:ओ महमूदा मेरी दिल जिगरी
तेरे साथ मैं भी छत पर खड़ी हूँ
तुम्हारी रसोई तुम्हारी बैठक और गाय-घर में
पानी घुस आया
उसमें तैर रहा है घर का सामान
तेरे बाहर के बाग का सेब का दरख्त
टूट कर पानी के साथ बह रहा है
अगले साल इसमें पहली बार सेब लगने थे
तेरी बल खाकर जाती कश्मीरी कढ़ाई वाली चप्पल
हुसैन की पेशावरी जूती
बह रहे हैं गंदले पानी के साथ
तेरी ढलवाँ छत पर बैठा है
घर के पिंजरे का तोता
वह फिर पिंजरे में आना चाहता है
महमूदा मेरी बहन
इसी पानी में बह रही है तेरी लाडली गऊ
इसका बछड़ा पता नहीं कहाँ है
तेरी गऊ के दूध भरे थन
अकड़ कर लोहा हो गए हैं
जम गया है दूध
सब तरफ पानी ही पानी
पूरा शहर डल झील हो गया है
महमूदा, मेरी महमूदा
मै तेरे साथ खड़ी हूँ
मुझे यकीन है छत पर जरूर
कोई पानी की बोतल गिरेगी
कोई खाने का सामान या दूध की थैली
मैं कुरबान उन बच्चों की माँओं पर
जो बाढ़ में से निकलकर
बच्चों की तरफ पीड़ितों को
सुरक्षित स्थान पर पहुँचा रही हैं
महमूदा हम दोनों फिर खड़े होंगे
मैं तुम्हारी कमलिनी अपनी धरती पर.....
उसे चूम लेंगे अपने सूखे होठों से
पानी की इस तबाही से फिर निकल आएगा
मेरा चाँद जैसा जम्मू
मेरा फूल जैसा कश्मीर।
  1. घर में पानी घुसने का कारण है
(क) नल और नाली की खराबी
(ख) बाँध का टूटना
(ग) प्राकृतिक आपदा
(घ) नदी में रूकावट
  1. महमूदा की बहन को विश्वास नहीं है
(क) छत पर पानी की बोतल गिरेगी
(ख) कुछ खाने-पीने की सहायता पहुँचेगी
(ग) कोई हैलिकाॅप्टर उन्हें बचाने छत पर आएगा
(घ) इस मुसीबत से निकल जाएँगे
  1.  
‘मेरा चाँद जैसा जम्मू
मेरा फूल जैसा कश्मीर’ का भावार्थ है
(क) जम्मू और कश्मीर में फिर से चाँद दिखने लगेगा
(ख) जम्मू और कश्मीर का सौंदर्य वापिस लौटेगा
(ग) जम्मू और कश्मीर स्वर्ग है
(घ) जम्मू और कश्मीर चाँद और फूल जैसा सुंदर है
  1. कवयित्री माताओं पर क्यों न्यौछावर होना चाहती है ?
(क) दूसरों को बचाने के कार्य में जुटी हैं
(ख) बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचा रही हैं
(ग) स्वयं भूखी रहकर बच्चों की देखभाल करती हैं
(घ) रसद पहुँचाने का कार्य कर रही हैं
  1. पूरा शहर डल झील जैसा लग रहा है क्योंकि
(क) डल झील का फैलाव बढ़ गया है
(ख) पूरे शहर में पानी भर गया है
(ग) पूरे शहर में शिकारे चलने लगे हैं
(घ) झील में नगर का प्रतिबिंब झलक रहा है
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिएःजगपति कहाँ? अरे, सदियों से वह तो हुआ राख की ढेरी;
वरना समता-संस्थापन में लग जाती क्या इतनी देरी?
छोड़ आसरा अलख शक्ति का; रे नर, स्वयं जगतपति तू है,
तू यदि जूठे पत्ते चाटे, तो मुझ पर लानत है, थू है!
कैसा बना रूप यह तेरा, घृणित, पतित, वीभत्स, भयंकर!
नही याद क्या तुझको, तू है चिर सुंदर, नवीन प्रलयंकर?
भिक्षा-पात्र फेंक हाथों से, तेरे स्नायु बड़े बलशाली,
अभी उठेगा प्रलय नींद से, तनिक बजा तू अपनी ताली।
ओ भिखमंगे, अरे पराजित, ओ मजलूम, अरे चिरदोहित,
तू अखंड भंडार शक्ति का; जाग, अरे निद्रा-सम्मोहित,
प्राणों को तड़पाने वाली हुंकारों से जल-थल भर दे,
अनाचार के अंबारों में अपना ज्वलित पलीता धर दे।
भूखा देख तुझे गर उमड़े आँसू नयनों में जग-जन के
तो तू कह दे: नही चाहिए हमको रोने वाले जनखे;
तेरी भूख, असंस्कृति तेरी, यदि न उभाड़ सकें क्रोधानल -
तो फिर समझूँगा कि हो गई सारी दुनिया कायर निर्बल।
  1. कवि पहली दो पंक्तियों में किस समस्या की ओर संकेत करता है?
(क) अशिक्षा की
(ख) ऊँच-नीच और असमानता की
(ग) जनसंख्या की
(घ) सांप्रदायिक भेदभाव की
  1. ‘छोड़ आसरा अलख शक्ति का; रे नर, स्वयं जगतपति तू है’- इस पंक्ति में कवि मानव को क्या प्रेरणा देता है?
(क) भाग्य पर नहीं कर्म पर विश्वास करना चाहिए
(ख) आत्मनिर्भर बनना जरूरी है
(ग) जूठे पत्ते नहीं चाटने चाहिए
(घ) दूसरों का आश्रय छोड़ देना चाहिए
  1. ‘मनुष्य को अपने असीमित बल को पहचानना चाहिए’- यह किस पंक्ति का भाव है?
(क) अभी उठेगा प्रलय नींद से, तनिक बजा तू अपनी ताली
(ख) प्राणों को तड़पाने वाली हुंकारों से जल-थल भर दे
(ग) तू अखंड भंडार शक्ति का; जाग, अरे निद्रा-सम्मोहित
(घ) तेरी भूख, असंस्कृति तेरी, यदि न उभाड़ सकें क्रोधानल
  1. ‘अनाचार के अंबारों में अपना ज्वलित पलीता धर दे’ - पंक्ति का भाव है
(क) हमें अपनी शक्ति को पहचानना चाहिए
(ख) भिक्षा-पात्र फेंक अपने सामथ्र्य को पहचानना चाहिए
(ग) किसी के आगेे गिड़गिड़ाना नहीं चाहिए
(घ) दुव्र्यवहार के प्रति आवाज उठानी चाहिए
  1. कवि दुनिया को कब ‘कायर’ और ‘निर्बल’ समझता है?
(क) जब गरीबी, भूख और लाचारी पर क्रोध नही आता
(ख) जब भूखे को देख दुनिया की आँखें नहीं भरती
(ग) जब जूठे पत्ते चाटते हुए भिखारी को देखकर भी दुनिया अनदेखा करती है
(घ) जब हाथ पसारे बच्चों को देखकर दुनिया का मन नहीं पसीजता
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