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अपठित गद्यांश question types

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अपठित गद्यांश questions

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साहित्य को समाज का प्रतिबिंब माना गया है अर्थात् समाज का पूर्णरूप साहित्य में प्रतिबंबित होता रहता है। अनादिकाल से साहित्य अपने इसी धर्म का पूर्ण निर्वाह करता चला आ रहा है। वह समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण कर एक ओर तो हमारे सामने समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है और दूसरी ओर अपनी प्रखर मेधा और स्वस्थ कल्पना द्वारा समाज के विभिन्न पहलुओं का विवेचन करता हुआ यह भी बताता है कि मानव समाज की सुख-समृद्धि, सुरक्षा ओर विकास के लिए कौन-सा मार्ग उपादेय है? एक आलोचक के शब्दों में- “कवि वास्तव में समाज की व्यवस्था, वातावरण, धर्म-कर्म, रीति-नीति तथा सामाजिक शिष्टाचार या लोक व्यवहार से ही अपने काव्य के उपकरण चुनता है और उनका प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है।’”

साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें वह जन्म लेता है। वह अपनी समस्याओं का सुलझाव, अपने आदर्श की स्थापना अपने समाज के आदर्शों के अनुरूप ही करता है। जिस सामाजिक वातावरण में उसका जन्म होता है, उसी में उसका शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक विकास भी होता है। अत: यह कहना सर्वथा असंभव और अविवेकपूर्ण है कि साहित्यकार समाज से पूर्णतः निरपेक्ष या ‘तटस्थ रह कर साहित्य सृजन करता है। वाल्मीकि, तुलसी, सूर, भारतेंदु, प्रेमचंद आदि का साहित्य इस बात का सर्वाधिक सशक्त प्रमाण है कि साहित्यकार समाज से घनिष्ठ रूप से संबंध रखता हुआ ही साहित्य सृजन करता है। समाज की अवहेलना करने वाला साहित्य क्षणजीवी होता है।

(1) वाल्मीकि, तुलसी, सूर के उदाहरण द्वारा लेखक चाहता है-
(क) भाव साम्यता
(ख) प्रत्यक्ष प्रमाण
(ग) सहानुभूति
(घ) शिष्टाचार

(2) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्न्प चुनकर लिखिए।

कथन (A) : कवि अपने काव्य के उपकरणों का प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है।
कारण (R) : कवि हृदय अत्यधिक संवेदनशील होता है एवं सदैव देशहित चाहता है।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
(ख) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

(3) साहित्यकार किसे प्रतिनिधित्व करता है?
(क) स्वयं को
(ख) उस समाज को, जिसमें वह जन्म लेता है
(ग) केवल अपने आदर्शों को
(घ) अपनी व्यक्तित्व को

(4) साहित्य को समाज का क्या माना गया है?

(5) साहित्यकार किसे प्रतिनिधित्व करता है और उसका क्या सम्बंध होता है?
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साहित्य को समाज का प्रतिबिंब माना गया है अर्थात् समाज का पूर्णरूप साहित्य में प्रतिबंबित होता रहता है। अनादिकाल से साहित्य अपने इसी धर्म का पूर्ण निर्वाह करता चला आ रहा है। वह समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण कर एक ओर तो हमारे सामने समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है और दूसरी ओर अपनी प्रखर मेधा और स्वस्थ कल्पना द्वारा समाज के विभिन्न पहलुओं का विवेचन करता हुआ यह भी बताता है कि मानव समाज की सुख-समृद्धि, सुरक्षा ओर विकास के लिए कौन-सा मार्ग उपादेय है? एक आलोचक के शब्दों में- “कवि वास्तव में समाज की व्यवस्था, वातावरण, धर्म-कर्म, रीति-नीति तथा सामाजिक शिष्टाचार या लोक व्यवहार से ही अपने काव्य के उपकरण चुनता है और उनका प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है।’”

साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें वह जन्म लेता है। वह अपनी समस्याओं का सुलझाव, अपने आदर्श की स्थापना अपने समाज के आदर्शों के अनुरूप ही करता है। जिस सामाजिक वातावरण में उसका जन्म होता है, उसी में उसका शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक विकास भी होता है। अत: यह कहना सर्वथा असंभव और अविवेकपूर्ण है कि साहित्यकार समाज से पूर्णतः निरपेक्ष या ‘तटस्थ रह कर साहित्य सृजन करता है। वाल्मीकि, तुलसी, सूर, भारतेंदु, प्रेमचंद आदि का साहित्य इस बात का सर्वाधिक सशक्त प्रमाण है कि साहित्यकार समाज से घनिष्ठ रूप से संबंध रखता हुआ ही साहित्य सृजन करता है। समाज की अवहेलना करने वाला साहित्य क्षणजीवी होता है।

(1) साहित्य समाज का प्रतिबिंब है क्योंकि यह –

(क) समाज की वास्तविकता का द्योतक है।
(ख) समाज में लोक व्यवहार का समर्थक है।
(ग) व्यक्ति की समस्याओं का निदान करता है।
(घ) साहित्य को दिशा प्रदान करता है।

(2) गद्यांश दर्शाता है-
(क) समाज एवं साहित्य का पारस्परिक संबंध
(ख) समाज एवं साहित्य की अवहेलना
(ग) साहित्यकार की सृजन शक्ति
(घ) सामाजिक शिष्टाचार एवं लोक व्यवहार

(3) साहित्य की क्षणभंगुरता का कारण होगा-
(क) सामाजिक अवज्ञा
(ख) सामाजिक समस्या
(ग) सामाजिक सद्भाव
(घ) सामाजिक समरसता

(4) साहित्य का क्या महत्व है, उसका सर्वोत्तम उद्देश्य क्या होता है?

(5) साहित्यकार कौन होता है और वह किस प्रकार समाज का प्रतिनिधित्व करता है?
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आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है और भाषा संस्कार से बनती है। जिसके जैसे संस्कार होंगे, वैसी उसकी भाषा होगी। जब कोई आदमी भाषा बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं। यही कारण है कि भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत गुरुतर और चुनौतीपूर्ण है। परंपरागत रूप में शिक्षक की भूमिका इन तीन कौशलों – बोलना, पढ़ना और लिखना तक सीमित कर दी गई है। केवल यांत्रिक कौशल किसी जीती-जागती भाषा का उदाहरण नहीं हो सकते हैं। सोचना और महसूस करना दो ऐसे कारक हैं, जिनमें भाषा सही आकार पाती है। इनके बिना भाषा, भाषा नहीं है, इनके बिना भाषा संस्कार नहीं बन सकती, इनके बिना भाषा युगों-युगों का लंबा सफ़र तय नहीं कर सकती, इनके बिना कोई भाषा किसी देश या समाज की धड़कन नहीं बन सकती। केवल संप्रेषण ही भाषा नहीं है। दर्द और मुस्कान के बिना कोई भाषा जीवंत नहीं हो सकती।

भाषा हमारे समाज के निर्माण, विकास, अस्मिता, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान का भी महत्त्वपूर्ण साधन है। भाषा के बिना मनुष्य पूर्ण नहीं है। भाषा में ही हमारे भाव राज्य, संस्कार, प्रांतीयता झलकती है। इस झलक का संबंध व्यक्ति की मानवीय संवेदना और मानसिकता से भी होता है। जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य और मानसिकता जिस स्तर की होगी, उसकी भाषा के शब्द और मुख्यार्थ भी उसी स्तर के होंगे। साहित्यकार ऐसी भाषा को आधार बनाते हैं, जो उनके पाठकों एवं श्रोताओं की संवेदना के साथ एकाकार करने में समर्थ हों।

(1) ‘दर्द और मुस्कान के बिना भाषा जीवंत नहीं हो सकती। ‘ लेखक द्वारा ऐसा कथन दर्शाता है-

(क) यथार्थ की समझ
(ख) सामाजिक समरसता
(ग) साहित्य-प्रेम
(घ) भाषा कौशल

(2) भाषा तब सही आकार पाती है, जब

(क) मनुष्य निरंतर उसका अभ्यास करता रहता है।
(ख) भाषा को सरकारी समर्थन भी प्राप्त होता है।
(ग) भाषा सामाजिक संस्थाओं से प्रोत्साहन प्राप्त करती है।
(घ) भाषाई कौशलों के साथ मनुष्य सोचता और महसूस भी करता है।

(3) भाषा के बिना मनुष्य कैसा होता है?
(क) पूर्ण
(ख) अधूरा
(ग) अज्ञात
(घ) साधारण

(4) भाषा के कौन-कौन से कारक होते हैं जो उसे व्यक्त करते हैं?

(5) भाषा का महत्त्व क्या है और इसका समाज में क्या योगदान है?

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आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है और भाषा संस्कार से बनती है। जिसके जैसे संस्कार होंगे, वैसी उसकी भाषा होगी। जब कोई आदमी भाषा बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं। यही कारण है कि भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत गुरुतर और चुनौतीपूर्ण है। परंपरागत रूप में शिक्षक की भूमिका इन तीन कौशलों – बोलना, पढ़ना और लिखना तक सीमित कर दी गई है। केवल यांत्रिक कौशल किसी जीती-जागती भाषा का उदाहरण नहीं हो सकते हैं। सोचना और महसूस करना दो ऐसे कारक हैं, जिनमें भाषा सही आकार पाती है। इनके बिना भाषा, भाषा नहीं है, इनके बिना भाषा संस्कार नहीं बन सकती, इनके बिना भाषा युगों-युगों का लंबा सफ़र तय नहीं कर सकती, इनके बिना कोई भाषा किसी देश या समाज की धड़कन नहीं बन सकती। केवल संप्रेषण ही भाषा नहीं है। दर्द और मुस्कान के बिना कोई भाषा जीवंत नहीं हो सकती।

भाषा हमारे समाज के निर्माण, विकास, अस्मिता, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान का भी महत्त्वपूर्ण साधन है। भाषा के बिना मनुष्य पूर्ण नहीं है। भाषा में ही हमारे भाव राज्य, संस्कार, प्रांतीयता झलकती है। इस झलक का संबंध व्यक्ति की मानवीय संवेदना और मानसिकता से भी होता है। जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य और मानसिकता जिस स्तर की होगी, उसकी भाषा के शब्द और मुख्यार्थ भी उसी स्तर के होंगे। साहित्यकार ऐसी भाषा को आधार बनाते हैं, जो उनके पाठकों एवं श्रोताओं की संवेदना के साथ एकाकार करने में समर्थ हों।

(1) आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है, क्योंकि –
(क) मनुष्य की पूर्णता भाषा द्वारा ही संभव है।
(ख) व्यक्ति के मनोभाव भाषा से ही व्यक्त होते हैं।
(ग) भाषा का प्रचार और विकास कोई रोक नहीं सकता।
(घ) दर्द और मुस्कान के बिना भाषा जीवित नहीं हो सकती।

(2) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्न्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : जब कोई आदमी बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं।
कारण (R) : भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उसे कौशलों का विकास करना होता है।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ख) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

(3) गद्यांश में साहित्यकार द्वारा किए गए कार्य का उल्लेख इनमें से कौन-से विकल्प से ज्ञात होता है-
(क) साहित्य समाज का दर्पण है।
(ख) साहित्यकार साहित्य सृजन में व्यस्त रहता है।
(ग) साहित्यकार सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान बनाता है।
(घ) साहित्यकार जन सामान्य की अस्मिता का परिचायक होता है।

(4) भाषा के महत्व क्या है और उसका समाज में क्या योगदान है?

(5) साहित्यकारों की भाषा का महत्व क्या है?
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विज्ञान शब्द की परिभाषा और क्षेत्र तथा इसकी प्रौद्योगिकी से भिन्नता के विषय में स्पष्ट ज्ञान होना आवश्यक है। कुछ शक्तिशाली शक्तियों में, जिनके पास मानव-जाति के भविष्य की चाबी है, शायद विज्ञान ही सिर्फ़ एक महत्वपूर्ण अनुपम स्थिति में बिना किसी आपत्ति के सबके द्वारा स्वीकार किया जाने वाला विषय है। यहाँ तक कि यदि कुछ थोड़े व्यक्ति, जो विज्ञान के विरोधी हैं, के साथ वार्तालाप किया जाए, तो हम इस तथ्य को पाएँगे कि वे वास्तव में विज्ञान का विरोध नहीं करते हैं, परंतु प्रौद्योगिकी का, जिसका संबंध मनुष्य की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विज्ञान के निष्कर्षों के अनुप्रयोगों से है।

आज विज्ञान से हमारा अर्थ हमारे विश्व और उसके परिवेश के मूल ज्ञान से तथा इसके सभी क्षेत्रों में इस ज्ञान की नियंत्रित और नियमित खोज से है। परंतु इस ज्ञान का प्रयोग जरूरी नहीं कि सर्वाधिक प्रयोजनों के लिए किया जाए। प्रौद्योगिकी में हम उन अनगिनत विधियों का उल्लेख करते हैं, जिनसे विज्ञान को मानव सेवा के लिए प्रयुक्त किया जा सके। मानव उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए वस्तुओं को बनाने या परिवर्तित करने का संकेद्रित अध्ययन, दोनों में स्पष्ट अंतर बताने के लिए आणविक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के वर्तमान सर्वाधिक लोकप्रिय क्षेत्रों में से उदाहरण दिए जा सकते हैं। यह 'विज्ञान' है, जिसमें भारी थात्विक तत्व यूरेनियम के नाभिक से अलग या विखंडित हुए अंशों की प्रकृति और संख्या का मापन होता है। यह प्रौद्योगिकी है,

जिसमें इस वैज्ञानिक ज्ञान' का प्रयोग बिजली बनाने के लिए परमाणु पॉवर घर की रूप-रेखा या उसे बनाने में किया जाता है। यह भी प्रौद्योगिकी है, जो नैतिक रंग ले लेती है और नैतिकता तथा अनैतिकता को अंकित करती है। विज्ञान तटस्थ या अनैतिक है और कभी भी नैतिक आचार या मानवीय कल्याण का विरोध नहीं कर सकता, यद्यपि एक वैज्ञानिक और तकनीशियन मानव होने के नाते इसका विरोध कर सकते हैं।

(1) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से एक सही विकल्प चुनकर लिखिए ।

कथन (A): विज्ञान तटस्थ एवं अनैतिक है।
कारण (B): विज्ञान नैतिक आचार या मानवीय कल्याण का विरोध नहीं कर सकता।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ख) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

(2) बिजली बनाने के लिए परमाणु पॉवर घर बनाना किसके अंतर्गत आता है?
(क) विज्ञान के
(ख) प्रौद्योगिकी के
(ग) पुरातत्व विभाग के
(घ) मापन के

(3) विज्ञान की परिभाषा में निम्नलिखित में से कौन-सा विधान सही है?

(क) विज्ञान केवल विश्व के मूल ज्ञान की खोज से सम्बंधित है।
(ख) विज्ञान से बनाई गई वस्तुओं को मानव सेवा के लिए प्रयोग किया जाता है।
(ग) विज्ञान और प्रौद्योगिकी में कोई अंतर नहीं होता।
(घ) विज्ञान से सिर्फ़ नैतिक आचार के नियमों को अंकित किया जाता है।

(4) विज्ञान और प्रौद्योगिकी में क्या अंतर है?

(5) विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग के बारे में एक उदाहरण दें।

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