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काव्य – 4 मनुष्यता question types

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64
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काव्य – 4 मनुष्यता questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति,विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

प्रश्न 1: ‘विपत्ति, विघ्न’ में कौन सा अलंकार है –
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) उपमा अलंकार
(ग) रूपक अलंकार
(घ) उत्प्रेक्षा अलंकार

प्रश्न 2: कवि इस काव्यांश के माध्यम से क्या उजागर करना चाहते है –
(क) दया भावना
(ख) विश्वबंधुत्व की भावना
(ग) करुण भावना
(घ) परोपकारी तथा कल्याणकारी भावना

प्रश्न 3: पद्यांश में मनुष्य को किस बात का ध्यान रखने को कहा गया है –
(क) आपसी समझ न बिगड़े
(ख) सबका कल्याण करता चले
(ग) भेद भाव न बड़े
(घ) (क) और (ग)

प्रश्न 4: बिना किसी तर्क वितर्क के सभी को एक साथ ले कर आगे बढ़ना कैसे संभव होगा?
(क) जब मनुष्य दूसरों की उन्नति करे
(ख) जब मनुष्य दूसरों का कल्याण करे
(ग) जब मनुष्य दूसरों की उन्नति और कल्याण के साथ अपनी समृद्धि भी कायम करे
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 5: निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर पद्यांश से मेल खाते वाक्यों को चुनिए ?
(क) मनुष्यों को अपनी इच्छा से चुने हुए मार्ग में ख़ुशी ख़ुशी चलना चाहिए
(ख) मनुष्यों को यह ध्यान रखना चाहिए कि आपसी समझ न बिगड़े और भेद भाव न बड़े
(ग) बिना किसी तर्क वितर्क के सभी को एक साथ ले कर आगे बढ़ना चाहिए
(घ) उपरोक्त सभी
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‘मनुष्य मात्र बन्धु हैं’ यही बड़ा विवेक है,
पुराणपुरुष स्वयंभू पिता प्रसिद्ध एक है।
फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं,
परंतु अंतरैक्य में प्रमाणभूत वेद हैं।
अनर्थ है कि बन्धु ही न बन्धु की व्यथा हरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

प्रश्न 1: ‘मनुष्य मात्र’ , ‘पुराणपुरुष’ , ‘ पिता प्रसिद्ध’ में कौन सा अलंकार है –
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) उपमा अलंकार
(ग) रूपक अलंकार
(घ) उत्प्रेक्षा अलंकार

प्रश्न 2: प्रस्तुत काव्यांश में कौन सा रस है –
(क) वीर रस
(ख) करुण रस
(ग) शांत रस
(घ) रौद्र रस

प्रश्न 3: कवि ने इस पद्यांश के माध्यम से क्या सन्देश दिया है –
(क) मिल-जुलकर यात्रा करने का
(ख) मिल-जुलकर एक दूसरे का सझयोग करने का
(ग) मिल-जुलकर प्रभु को याद करने का
(घ) मिल-जुलकर सबका कल्याण करने का

प्रश्न 4: सबसे बड़ी विवेकशीलता किसे माना गया है ?
(क) स्वयंभू की प्रार्थना को
(ख) परोपकार को
(ग) दयाभावना को
(घ) बंधुत्व की भावना को

प्रश्न 5: निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर पद्यांश से मेल खाते वाक्यों को चुनिए ?

(क) प्रत्येक मनुष्य एक दूसरे के भाई – बन्धु हैं
(ख) पुराणों में जिसे स्वयं उत्पन्न पुरुष मना गया है, वह परमात्मा या ईश्वर हम सभी का पिता है
(ग) मनुष्य वही कहलाता है जो बुरे समय में दूसरे मनुष्यों के काम आता है
(घ) उपरोक्त सभी
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अनंत अंतरिक्ष में अनंत देव हैं खड़े,
समक्ष ही स्वबाहु जो बढ़ा रहे बड़े-बड़े।
परस्परावलंब से उठो तथा बढ़ो सभी,
अभी अमर्त्य-अंक में अपंक हो चढ़ो सभी।
रहो न यां कि एक से न काम और का सरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

प्रश्न 1: ‘अनंत अंतरिक्ष’ , ‘अमर्त्य-अंक’ में कौन सा अलंकार है –
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) उपमा अलंकार
(ग) रूपक अलंकार
(घ) उत्प्रेक्षा अलंकार

प्रश्न 2: ‘बड़े-बड़े’ में कौन सा अलंकार है –
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) उपमा अलंकार
(ग) रूपक अलंकार
(घ) पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार

प्रश्न 3: प्रस्तुत पद्यांश में कवि क्या प्रेरणा दे रहे है –
(क) देवताओं के समान
(ख) कलंक रहित जीवन जीने की
(ग) सभी के काम आते हुए जीने की
(घ) गर्व रहित और घमंड रहित जीवन जीने की

प्रश्न 4: आकाश में असंख्य देवता किसके स्वागत में भुजाएँ खोले खड़े है ?
(क) दूसरों का हित करने वालों के
(ख) गर्वरहित जीवन जीने वालों के
(ग) परोपकारी व दयालु मनुष्यों के
(घ) दया भाव रखने वालों के

प्रश्न 5: इस मरणशील संसार में किसे मनुष्य कहा गया है ?
(क) जो मनुष्यों का साथ दे
(ख) जो मनुष्यों का भला करे
(ग) जो मनुष्यों पर दयाभाव रखे
(घ) जो मनुष्यों का कल्याण करे व परोपकार करे
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रहो न भूल के कभी मदांघ तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
अनाथ कौन है यहाँ ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,
दयालु दीन बन्धु के बड़े विशाल हाथ हैं।
अतीव भाग्यहीन है अधीर भाव जो करे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

प्रश्न 1: ‘दयालु दीन बन्धु’ में कौन सा अलंकार है –
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) उपमा अलंकार
(ग) रूपक अलंकार
(घ) उत्प्रेक्षा अलंकार

प्रश्न 2: कवि ने किस पर घमंड न करने की बात कही है –
(क) त्रिलोकनाथ पर
(ख) अपनों के होने पर
(ग) मदांध पर
(घ) धन – दौलत पर

प्रश्न 3: कवि ने किसी को भी अनाथ नहीं माना है, ऐसा क्यों –
(क) क्योंकि सबके साथ उनके अपने हैं
(ख) क्योंकि ईश्वर का साथ सब के साथ है
(ग) सबके माता – पिता हैं
(घ) सभी भाग्यवान हैं

प्रश्न 4: पद्यांश में भाग्यहीन किसे कहा गया है ?
(क) जो धन-दौलत पर घमंड करता है
(ख) जो त्रिलोकनाथ को नहीं मानता
(ग) जिस मनुष्य के मन में अधीरता है
(घ) जो अपनों का साथ पाने पर गर्व करता है

प्रश्न 5: पद्यांश में सच्चा मनुष्य किसे कहा गया है ?
(क) जो गर्व न करे
(ख) जो घमंड न करे
(ग) जो उतावलापन न दिखाए
(घ) जो दूसरों के काम आए

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सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धभाव बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा ?
अहा ! वही उदार है परोपकार जो करे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

प्रश्न 1: दया-प्रवाह में कौन सा अलंकार है –
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) उपमा अलंकार
(ग) रूपक अलंकार
(घ) उत्प्रेक्षा अलंकार

प्रश्न 2: प्रस्तुत काव्यांश में कौन सा रस है –

(क) वीर रस
(ख) करुण रस
(ग) शांत रस
(घ) रौद्र रस

प्रश्न 3: किसके आगे सभी नतमस्तक हो जाते हैं –

(क) सुंदरता
(ख) दया-प्रवाह
(ग) उदारता , विनम्रता
(घ) परोपकार

प्रश्न 4: कवि ने महाविभूति किसे कहा है ?
(क) दूसरों के दुःख को अपनाने को
(ख) सहानुभूति और परोपकार की भावना को
(ग) हिंसा की भावना को
(घ) विरुद्धवाद को

प्रश्न 5: निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर पद्यांश से मेल खाते वाक्यों को चुनिए ?
(क) मनुष्यों के मन में दया व करुणा का भाव होना चाहिए ,यही सबसे बड़ा धन है
(ख) महान उस को कहा जाता है जो परोपकार करता है
(ग) वही मनुष्य ,मनुष्य कहलाता है जो मनुष्यों के लिए जीता है और मरता है
(घ) उपरोक्त सभी
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पर्वतीय प्रदेश में कुछ पेड़ पहाड़ पर उगे हैं तो कुछ शाल के पेड़ पहाड़ के पास। इन दोनों स्थान के पेड़ों के सौंदर्य में अंतर कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।
  • A
    पशु प्रवृत्ति को बनाए रखना ही सुमृत्यु है।
  • B
    सच्ची मनुष्यता ही सुमृत्यु के समान है।
  • C
    सुमृत्यु वही है जिसमें व्यक्ति को कष्ट न हो।
  • D
    सुमृत्यु वही है जिसे मरने के बाद भी लोग याद करें।
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कवि के अनुसार सच्चा मनुष्य कौन है?
  • A
    जो मनुष्य केवल अपने कल्याण के लिए मरता है और जीतता है
  • B
    जो मनुष्य केवल अपने लिए ही जीतता है
  • C
    जो मनुष्य अपने कल्याण के लिए कोई हित नहीं कर पाता
  • D
    जो मनुष्य केवल अपने लिए निंदा करता है
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पशुप्रवृत्ति है
  • A
    अपने परिवार का भरण पोषण
  • B
    अपने परिवार का भरण पोषण
  • C
    अपने झुंड में रहना (डी) अपने परिवार का
  • D
    पालन पोषण करना अपने परिवार का पालन पोषण करना
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