विपत्ति, विघ्न जो पड़े उन्हें ढकेलते हुए
घटे न हेल-मेल हाँ बढ़े न भिन्नता कभी
र्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे
(क) जीवन में निर्धारित लक्ष्य कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
i. संपर्क बढ़ाने से
ii. साधन जुटाने से
iii. सतत प्रयत्नशील रहने से
iv. लक्ष्य का ध्यान करने से
(ख) कवि को किस बात का डर है ?
i. दूरियाँ बढ़ने की
ii. प्रेम कम होने की
iii. सहयोग में कमी
iv. एकता की भावना का
(ग) निम्नलिखित कथन $(A)$ तथा कारण $\quad$ (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्प में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। अभिकथन
(A) - कवि मनुष्य के लिए मनुष्यता का होना अनिवार्य मानता है।
कारण (R) - मनुष्यता के लिए संतोष का होना आवश्यक नहीं है।
i. कथन (A) गलत है, किंतु कारण $(R)$ सही है।
ii. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं।
iii. कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
iv. कथन (A) सही है कितु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(घ) कवि समर्थ भाव किसे मानता है?
i. स्वार्थ भावना को सबल बनाना
ii. कार्य में सफलता प्राप्त करना
iii. कार्य के प्रति लगनशील रहना
iv. स्वयं के साथ दूसरे को भी आगे बढ़ाना
(ङ) क्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी’ - पंक्ति का भाव है -
i. तर्कहीनता
ii. भावुकता
iii. नकारात्मकता
iv. सकारात्मकता