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गोल question types

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45
Questions
7
Question groups
5
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Sample Questions

गोल questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

शब्द अर्थ या संदर्भ
1. लांस नायक  1. स्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था।
2. बर्लिन ओलंपिक  2. भारतीय सेना का एक पद (रैंक) है।
3. पंजाब रेजिमेंट 3. अंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल ।
4. सैंपर्स एंड माइनर्स टीम 4. वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रति-योगिता, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया था।
5. सूबेदार 5. स्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों की भारतीय सेना का एक दल ।
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जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई। सन् 1936 में बर्लिन ओलंपिक में मुझे कप्तान बनाया गया। उस समय मैं सेना में लांस नायक था। बर्लिन ओलंपिक में लोग मेरे हॉकी खेलने के ढंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मुझे ‘हॉकी का जादूगर’ कहना शुरू कर दिया। इसका यह मतलब नहीं कि सारे गोल मैं ही करता था। मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाएं। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। बर्लिन ओलंपिक में हमें स्वर्ण पदक मिला। खेलते समय मैं हमेशा इस बात का ध्यान रखता था कि हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।
प्रश्न-
(क) ध्यानचंद सर्वप्रथम किस टीम के कप्तान बने और कब ?
(ख) बर्लिन ओलंपिक के बाद ध्यानचंद को कौन-सी उपाधि मिली ?
(ग) खेलते समय ध्यानचंद किस बात का पूरा ध्यान रखते थे?
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मेरा जन्म सन् 1904 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ। बाद में हम झाँसी आकर बस गए। 16 साल की उम्र में मैं ‘फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट’ में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हो गया। मेरी रेजिमेंट का हॉकी खेल में काफी नाम था। पर खेल में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं थी। उस समय हमारी रेजिमेंट के सूबेदार मेजर तिवारी थे। वे बार-बार मुझे हॉकी खेलने के लिए कहते। हमारी छावनी में हॉकी खेलने का कोई निश्चित समय नहीं था । सैनिक जब चाहे मैदान में पहुँच जाते और अभ्यास शुरू कर देते। उस समय तक मैं एक नौसिखिया खिलाड़ी था ।

प्रश्न 1.मेजर ध्यानचंद का जन्म कब हुआ ?
(क) 1906
(ख) 1904
(ग) 1903
(घ) 1902

प्रश्न 2.सिपाही के रूप में वे सबसे पहले कहाँ भरती हुए ?
(क) फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट
(ख) बर्लिन ओलंपिक
(ग) पंजाब रेजीमेंट
(घ) सैंपर्स एंड माइनर्स टीम

प्रश्न 3.फर्स्ट ब्राह्मण रेजीमेंट के सूबेदार कौन थे ?
(क) मेजर बलवंत
(ख) मेजर ध्यानचंद
(ग) मेजर दानवीर
(घ) मेजर तिवारी

प्रश्न 4.सैनिक मैदान में जाकर क्या करते थे?
(क) दौड़ लगाते थे।
(ख) गप्पें हाँकते थे।
(ग) हॉकी का अभ्यास करते थे।
(घ) मैदान की सफाई करते थे।

प्रश्न 5.ध्यानचंद कैसे खिलाड़ी थे?
(क) कुशल
(ख) नौसिखिए
(ग) श्रेष्ठ
(घ) इनमें से कोई नहीं
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आज मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे व बूढ़े मुझे घेर लेते हैं और मुझसे मेरी सफलता का राज जानना चाहते हैं। मेरे पास सफलता का कोई गुरु मंत्र तो है नहीं। हर किसी से यही कहता कि लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।
प्रश्न-
(क) ध्यानचंद को हर जगह कौन घेर लेते है?
(ख) लोग उनसे क्या जानना चाहते हैं?
(ग) ध्यानचंद की नज़र में बड़े मूलमंत्र क्या हैं?
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मैं पट्टी बाँधकर फिर मैदान में आ पहुँचा। आते ही मैंने उस खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रखकर कहा, “तुम चिंता मत करो, इसका बदला मैं जरूर लूँगा।” मेरे इतना कहते ही वह खिलाड़ी घबरा गया। अब हर समय मुझे ही देखता रहता कि मैं कब उसके सिर पर हॉकी स्टिक मारने वाला हूँ। मैंने एक के बाद एक झटपट छह गोल कर दिए। खेल खत्म होने के बाद मैंने फिर उस खिलाड़ी की पीठ थपथपाई और कहा, “दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता । ” वह खिलाड़ी सचमुच बड़ा शर्मिंदा हुआ। तो देखा आपने मेरा बदला लेने का ढंग ? सच मानो, बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।
प्रश्न 1.ध्यानचंद पट्टी बाँधकर क्यों आए ?
(क) उनके सिर में दर्द था।
(ख) उन्हें दूसरी टीम के खिलाड़ी ने स्टिक मारी थी।
(ग) वे गिर गए थे।
(घ) यह उनका शौक था।
प्रश्न 2.दूसरी टीम का खिलाड़ी घबरा क्यों गया था ?
(क) ध्यानचंद ने उसे कहा था कि वे उससे बदला लेंगे।
(ख) वह खेल में हारने वाला था ।
(ग) उसे टीम से निकाला जा रहा था।
(घ) ध्यानचंद ने उसकी शिकायत खेलं विभाग में कर दी थी।
प्रश्न 3.ध्यानचंद ने झटपट कितने गोल किए?
(क) दो
(ख) चार
(ग) छह
(घ) नौ
प्रश्न 4.खिलाड़ी शर्मिंदा क्यों हुआ?
(क) ध्यानचंद ने उसे बड़े प्यार से माफ कर दिया।
(ख) ध्यानचंद ने उसके किए कार्य हेतु उसकी पीठ थपथपाई।
(ग) क्योंकि ध्यानचंद ने उसे बुरी तरह से हराकर अपना बदला लिया था ।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
प्रश्न 5.बुरा करने वाले के मन में सदा क्या विचार आता है?
(क) उसके साथ भी बुरा होगा।
(ख) जिसके साथ मैंने बुरा किया है उससे क्षमा माँग लेनी चाहिए।
(ग) उसे मन ही मन पछतावा होता है।
(घ) वह सबसे छिपकर रहना चाहता है।
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खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं। खेल में तो यह सब चलता ही है। जिन दिनों हम खेला करते थे, उन दिनों भी यह सब चलता था।
सन् 1933 की बात है। उन दिनों में, मैं पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था। एक दिन ‘पंजाब रेजिमेंट’ और ‘सैंपर्स एंड माइनर्स टीम’ के बीच मुकाबला हो रहा था। ‘माइनर्स टीम’ के खिलाड़ी ‘मुझसे गेंद छीनने की कोशिश करते, लेकिन उनकी हर कोशिश बेकार जाती। इतने में एक खिलाड़ी ने गुस्से में आकर हॉकी स्टिक मेरे सिर पर दे मारी।
प्रश्न-
(क) यह वक्तव्य कहाँ से लिया गया है? इसमें ‘मैं’ कौन है?
(ख) कौन-सी दो टीमें खेल रही थीं?
(ग) ‘माइनर्स टीम’ के खिलाड़ी ने किसके सिर पर और क्यों स्टिक मारी?
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जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई। सन् 1936 में बर्लिन ओलंपिक में मुझे कप्तान बनाया गया। उस समय मैं सेना में लांस नायक था। बर्लिन ओलंपिक में लोग मेरे हॉकी खेलने के ढंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मुझे ‘हॉकी का जादूगर’ कहना शुरू कर दिया। इसका यह मतलब नहीं कि सारे गोल मैं ही करता था। मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। बर्लिन ओलंपिक में हमें स्वर्ण पदक मिला। खेलते समय मैं हमेशा इस बात का ध्यान रखता था कि हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।
QUESTION:
Q.1. लेखक को ‘हॉकी का जादूगर’ कब कहा जाने लगा ?
(A) बर्लिन ओलंपिक के दौरान (B) भारत में खेलते समय (C) स्पेन ओलंपिक के दौरान (D) रूस के खेलों में
Q.2.बर्लिन ओलंपिक में कौन-सा पदक मिला ?
(A) रजत पदक (B) स्वर्ण पदक (C) कांस्य पदक (D) कोई नहीं
Q.3. बर्लिन ओलंपिक में क्या सम्मान मिला ?
Q.4. खेलते समय किस बात का ध्यान रखते थे ?
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जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई। सन् 1936 में बर्लिन ओलंपिक में मुझे कप्तान बनाया गया। उस समय मैं सेना में लांस नायक था। बर्लिन ओलंपिक में लोग मेरे हॉकी खेलने के ढंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मुझे ‘हॉकी का जादूगर’ कहना शुरू कर दिया। इसका यह मतलब नहीं कि सारे गोल मैं ही करता था। मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। बर्लिन ओलंपिक में हमें स्वर्ण पदक मिला। खेलते समय मैं हमेशा इस बात का ध्यान रखता था कि हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।
QUESTION:
Q.1. खेलने के दौरान लेखक को क्या लाभ मिला ?
(A) उनका खेल निखरता चला गया। (B) उन्हें तरक्की भी मिलती चली गई। (C) (क)-(ख) दोनों (D) कुछ नहीं
Q.2. बर्लिन ओलंपिक कब हुए ?
(A) 1935 में (B) 1936 में (C) 1938 में (D) 1940 में
Q.3. बर्लिन ओलंपिक में लेखक को क्या बनाया गया ?
Q.4. लेखक की खेल के दौरान क्या कोशिश रहती थी ?
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उनकी रेजिमेंट के सूबेदार मेजर कौन थे ?मेरा जन्म सन् 1904 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ। बाद में हम झाँसी आकर बस गए। 16 साल की उम्र में मैं ‘फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट’ में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हो गया। मेरी रेजिमेंट का हॉकी खेल में काफी नाम था। पर खेल में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं थी। उस समय हमारी रेजिमेंट के सूबेदार मेजर ‘तिवारी थे। वे बार-बार मुझे हॉकी खेलने के लिए कहते। हमारी छावनी में हॉकी खेलने का कोई निश्चित समय नहीं था। सैनिक जब चाहे मैदान में पहुँच जाते और अभ्यास शुरू कर देते। उस समय तक मैं एक नौसिखिया खिलाड़ी था।
QUESTION:
Q.1. उनकी रेजिमेंट के सूबेदार मेजर कौन थे ?
(A) मेजर तिवारी (B) मेजर मिश्रा (C) मेजर रवींद्रनाथ (D) मेजर गुप्ता
Q.2. प्रारंभ में लेखक कैसा खिलाड़ी था ?
(A) नौसिखिया (B) कुशल (C) योग्य (D) चतुर
Q.3. लेखक कब, किस रेजिमेंट में, किस रूप में भर्ती हुआ ?
Q.4. उन दिनों रेजिमेंट में किस खेल का नाम था ?
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मेरा जन्म सन् 1904 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ। बाद में हम झाँसी आकर बस गए। 16 साल की उम्र में मैं ‘फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट’ में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हो गया। मेरी रेजिमेंट का हॉकी खेल में काफी नाम था। पर खेल में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं थी। उस समय हमारी रेजिमेंट के सूबेदार मेजर ‘तिवारी थे। वे बार-बार मुझे हॉकी खेलने के लिए कहते। हमारी छावनी में हॉकी खेलने का कोई निश्चित समय नहीं था। सैनिक जब चाहे मैदान में पहुँच जाते और अभ्यास शुरू कर देते। उस समय तक मैं एक नौसिखिया खिलाड़ी था।
QUESTION:
Q.1. लेखक का जन्म कब हुआ था ?
(A) 1902 में (B) 1903 में (C) 1904 में (D) 1905 में
Q.2. लेखक कितने साल की उम्र में ‘फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट’ में सिपाही के रूप में भर्ती हुआ ?
(A) 15 साल की (B) 16 साल की (C) 17 साल की (D) 18 साल की
Q.3. लेखक का जन्म कब और कैसे परिवार में हुआ था ?
Q.4. बाद में लेखक का परिवार कहाँ आकर बस गया ?
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थोड़ी देर बाद मैं प्ट्टी बाँधकर फिर मैदान में आ पहुँचा। आते ही मैंने उस खिलाड़ी की पीठ परं हाथ रखकर कहा, “तुम चिंता मत करो, इसका बदला मैं जरूर लूँगा।” मेरे इतना कहते ही वह खिलाड़ी घबरा गया। अब हर समय मुझे ही देखता रहता कि मैं कब उसके सिर पर हॉकी स्टिक मारने वाला हूँ। मैंने एक के बाद एक झटपट छह गोल कर दिए। खेल खत्म होने के बाद मैंने फिर उस खिलाड़ी की पीठ थपथपाई और कहा, “दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।” वह खिलाड़ी सचमुच बड़ा शर्मिदा हुआ। तो देखा आपने मेरा बदला लेने का ठंग? सच मानो, वुए काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी!
QUESTON:
Q.1. लेखक ने अपना बदला कैसे लिया ?
(A) झटपट छह गोल करके (B) उसको स्टिक मारकर (C) उसे गाली देकर (D) गुस्सा करके
Q.2. बुरा करने वाला आदमी ________.
(A) (क) डरा रहता है। (B) बुराई करता रहता है। (C) चुप रहता है। (D) कुछ नहीं करता।
Q.3. छह गोल करने के बाद लेखक ने उस खिलाड़ी से क्या कहा ?
Q.4. लेखक की बात सुनकर उस खिलाड़ी की क्या दशा हुई ?
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Q 25MCQ1 Mark
लोगों ने मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहना क्यों शुरू कर दिया?
  • उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
  • B
    उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण
  • C
    हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण
  • D
    उनकी खेल भावना के कारण

Answer: A.

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Q 26MCQ1 Mark
“दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।” मेजर ध्यानचंद की इस बात से उनके बारे में क्या पता चलता है?
  • A
    वे अत्यंत क्रोधी थे।
  • B
    वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।
  • C
    उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।
  • वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।

Answer: D.

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Q 27MCQ1 Mark
किस टीम में खिलाड़ी ने उनसे गेंद छीनने की कोशिश की?
  • A
    हरियाणा रेजिमेंट
  • B
    आगरा रेजिमेंट
  • C
    पंजाब रेजिमेंट
  • माइनर्स टीम

Answer: D.

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Q 28MCQ1 Mark
उस समय ध्यानचंद जी किस टीम की ओर से खेलते थे ?
  • A
    हरियाणा रेजिमेंट
  • B
    सैंपर्स एंड माइनर्स टीम
  • पंजाब रेजिमेंट
  • D
    आगरा रेजिमेंट

Answer: C.

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Q 29MCQ1 Mark
लेखक का जन्म किस सन् में हुआ ?
  • 1904
  • B
    1905
  • C
    1906
  • D
    1907

Answer: A.

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