द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी द्वारा रचित कविता ‘जलाते चलो’ कौन-कौन से जीवन मूल्यों का संदेश देती है? वर्तमान समय में इन मूल्यों की आवश्यकता क्यों है? अपने विचार लिखिए।
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए ( 2 Mark )
5 Q→02सही जोड़ मिलाए :
2 Q→03प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए (1 Mark)
8 Q→04पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर छाँटकर लिखिए :
4 Q→05MCQ
7 Q→06रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
6 Q→One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। | A. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा। |
| 2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। | B. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है? |
| 3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी । | C. विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा। |
| 4. बिना स्नेह विद्युत – दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा। | D. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए। |
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
| 1. अमावस | A. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है। |
| 2. पूर्णिमा | B. विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण। |
| 3. विद्युत – दिए | C. समय, काल, युग संख्या में चार माने गए हैं- सत्ययुग (सतयुग), त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग । |
| 4. युग | D. अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। |
Answer: A.
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