पूछने पर उसने सिंह को बताया कि रास्ते में एक दूसरा शेर मिल गया। उसने मुझे रोक लिया था। मैं उससे प्राण बचाकर आपके पास आया हूँ। यह बात सुनकर सिंह क्रोधित हुआ और खरगोश को साथ लेकर चला । एक कुएं के पास जाकर खरगोश ने कहा कि वह शेर इसी में रहता है। सिंह ने कुएं में देखा, उसमें उसे अपनी परछाई दिखी। सिंह ने उसे दूसरा शेर समझा और गुस्से में
अपने लिए घर क्यों नहीं बना लेते? तब बन्दर ने गुस्से में कहा कि तुम्हें मेरी चिन्ता से क्या मतलब? चुप रहो! चटका ने फिर बन्दर को समझाने के लिए कुछ कहा, तो वह बन्दर गुस्से में आकर पेड़ पर चढ़ा और उसने चटका के जोड़े का घोंसला तोड़ दिया और उसे टुकड़े-टुकड़े कर नीचे फेंक दिया। इस तरह चटका ने बन्दर की भलाई की बात की थी, परन्तु मूर्ख बन्दर को उसकी बात अच्छी नहीं लगी और उनका अहित किया। शिक्षा-मूरों को उपदेश या सलाह देना व्यर्थ रहता है।