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साधुप्रदेश (पध) question types

35 questions across 7 question groups — pick any mix to generate a Hindi paper with step-by-step answer keys.

35
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7
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Sample Questions

साधुप्रदेश (पध) questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

आजकल के साधु के सामने कोई तर्क करने आये तो वे क्या करेंगे?
  • A
     अपने को ही ज्ञानी सिद्ध करेंगे।
  • B
     डर के मारे वाद$-$विवाद ही नहीं करेंगे।
  • C
     अपनी झोंपड़ी में प्रवेश ही नहीं करने देंगे।
  •  अपनी पोल खुल न जाए इसलिए मौन रहेंगे।

Answer: D.

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कवि भक्तगण को कौन$-$से गुण ग्रहण करने की बात करते हुए व्यंग्य करते हैं?
  • A
     पोथी पढ़कर ज्ञानी बनना
  •  हाथ में गोमुखी लेकर ईश्वर स्मरण करना
  • C
     मुख में राम बगल में छुरी चलाना
  • D
     उपदेश सुनना

Answer: B.

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कवि ने $………$ गुण पर करारा व्यंग्य किया है। $($मुख में राम बगल में छुरी, राम-नाम जपना पराया माल अपना$)$
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ढोंगी साधु भक्तों को उपदेश देते हुए कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति आपसे किसी विषय पर तर्क करे तो$……..$
$(अ)$ उसके पैर पकड़ लीजिए।
$(ब)$ उससे क्षमा माँग लीजिए।
$(क)$ उससे डरकर भयभीत न हों।
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सच्चा साधु दिखाई देने के लिए मुंडन करा लीजिए$…..$
$(अ)$ जिससे आपका ज्ञान बढ़ता रहे।
$(ब)$ जिससे आपका सिर सिप की तरह चमकता रहे।
$(क)$ जिससे आपके सिर का भार उतरता रहे।
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ढोंगी साधू के मतानुसार आप अपने हाथ में हमेशा माला लेकर गोमुखी में उसे फिराते रहिए, ताकि$……..$
$(अ)$ लोगों को यह लगें कि आप ज्ञानी है।
$(ब)$ लोगों को यह लगे कि आप विश्व गुरु है।
$(क)$ लोगों को यह लगे कि आप ईश्वर के नाम का जाप करते रहते हैं।
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किये जा निष्काम सेवा
सब फलेच्छा छोड़कर
याद फल की जब सताए,
खा पपीता तोड़कर
स्वर्ग का झगड़ा गया
भय भी नरक का छोड़ दे
पाप-घट भर जाए तो
काशी पहुँच कर फोड़ दे।
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जीव क्या है ब्रह्म क्या?
तू कौन है, मैं कौन हूँ?
स्लेट पर लिख दो महोदय
आजकल मैं मौन हूँ,
धर्मसंकट शीघ्र ही
इस युक्ति से कट जाएँगे।
सामने से तार्किक विद्वान
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नगर से बाहर बगीचे में
बना लें झोंपड़ी
दीप जैसी देह चमके
सीप जैसी खोपड़ी
तर्क करने के लिये
आ जाए कोई सामने
खुल न जाए पोल इस
भय से लगें मत काँपने।
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आइये प्रिय भक्तगण!
उपदेश कुछ सुन लीजिये
पढ़ चुके हैं बहुत पोथी
आज कुछ गुन लीजिये।
हाथ में हो गोमुखी
माला सदा हिलती रहे
नम्र ऊपर से बनें
भीतर छुरी चलती रहे।
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हाथ में हो गोमुखी, माला सदा हिलती रहे, नम्र ऊपर से बने, भीतर छुरी चलती रहे।
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