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Question 14 Marks
एक नाई $-$ एक चमत्कारी मूर्गी मिलना $-$ रोज सोने का एक अंडा देना $-$ नाई का अमीर हो जाना $-$ शहर भर में चर्चा $-$ इज्जत बढ़ना – नाई को एक साथ सब सोना पाने की लालसा $-$ मूी को मार डालना $-$ लालच में सब सोने को खो देना $-$ सीख ।
Answer
लालच का फल : लालची नाई .
एक नगर में एक नाई रहता था । नाई स्वभाव का लालची था । उस नाई ने कुछ पैसे जुटाकर एक मुर्गी खरीदी । मुर्गी चमत्कारी थी । वह रोज नाई को एक सोने का अंडा देती थी।
नाई की किस्मत खुल गई । मुर्गी रोज उसे एक सोने का अंडा देने लगी थी । धीरे धीरे नाई अमीर बन गया । शहर के सभी लोग अब नाई की इज्जत करने लगे थे । नाई का जीवन खुशीयों से भर गया था ।
एक दिन अचानक नाई के मन में लालच जाग उठी । उसने सोचा की जो मुर्गी मुझे रोज एक सोने का अंडा देती है, उस मुर्गी के पेट में बहुत से सोने के अंडे होंगे । नाई ने सभी अंडे एक साथ प्राप्त कर जल्दी बहुत धनवान बनने की बात सोची । इसी विचार में पड़कर नाई ने दूसरे दिन उस मुर्गी को मार डाला । नाई ने मुर्गी को मारकर जब उस मुर्गी के पेट में देखा तो उसे एक भी सोने का अंडा नहीं मिला ।
मुर्गी को मार ने के कारण नाई को रोज सोने के अंडे मिलना भी बंद हो गया । नाई अब बहुत पछताने लगा की मैंने यह क्या कर दिया । पर अब कोई लाभ नहीं होनेवाला था क्यूंकि सोने के अंडे देनेवाली मुर्गी अब मर गई थी।
सीख :- हमें जीवन में कभी लालच नही करनी चाहिए, क्यूंकि लालच का परिणाम बुरा ही होता है ।
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Question 24 Marks
एक बुढ़ा किसान तीन आलसी लड़के "अपने किसान का लड़को को बुलाना खेत में एक खजाना गड़ा हुआ है ।" किसान की मृत्यु लड़कों का सारा खेत खोद डालना खजाना न मिलना $-$ वर्षा बीज बोना अच्छी फसल $-$ लड़कों को साल खजाना मिलना $-$ सीख ।
Answer
• परिश्रम का महत्त्व •
रामपुर नामक एक गाँव था । धनीराम नामक एक बुढ़ा किसान उस गाँव में रहता था। उसके तीन बेटे थे, परंतु तीनों ही बहुत आलसी थे। धनीराम को हमेशा इस बात की चिंता लगी रहती थी कि मेरी मृत्यु के बाद मेरे बेटों का क्या होगा ?
धनीराम की तबियत अब धीरे धीरे बिगड़ने लगी थी । एक दिन धनीराम ने अपने तीनों बेटों को बुलाया और उन्हें कहा की "मैंने हमारे खेत में खजाना गाड़ के रखा है । मेरी मृत्यु के बाद तुम उसे निकालकर आपस में बाँट लेना ।"
धनीराम के तीनों लड़के आलसी थे, परंतु अब उन्हें खजाना पाने का लालच था । इसलिए तीनों लड़कों ने मिलकर पूरा खेत खोद डाला। लड़कों ने। पूरा खेत खोद डाला पर कहीं पर भी उन्हें खजाना | नहीं मिला । पहले तो वे बड़े निराश हुए बाद में। उन्होंने खेत में बीज बोने शुरु कर दीए । उस वर्ष बारिश भी अच्छी हुई । इस कारण उनके खेत में फसलें लहलहाने लगी और तब उन्हें पता चला की उनके पिताजी किस खजाने की बात कर रहे थे। अब हर साल तीनों भाई मिलकर खेती करते और फसल के रुप में हर साल खजाना प्राप्त करने लगे । सीख : हमें जीवन में सदा परिश्रम करते रहना चाहिए । परिश्रम मनुष्य का सच्चा मित्र है ।
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Question 34 Marks
एक लकड़हारा जंगल में नदी के किनारे पेड़ लकड़ी काटने की कुल्हाड़ी का पानी में गिरना उदास हो जाना देवदूत का आना$-$ सोने की कुल्हाड़ी निकालना यह मेरी नहीं" $-$ फिर चाँदी की कुल्हाड़ी "यह भी मेरी नहीं फिर लोहे की कुल्हाड़ी स्वीकार लकड़हारे की ईमानदारी पर देवदूत खुश$-$ सोने और चाँदी की कुल्हाड़ियाँ भी इनाम में दे देना सीख।
Answer
ईमानदारी का फल अथवा लकड़हारे की ईमानदारी
एक गाँव था। उस गाँव में एक लकड़हारा रहता था। वह बहुत गरीब था। वह रोज जंगल जाता और लकड़ी काट कर शाम को वह उसे बेच देता था। इसी तरह उसका निर्वाह होता था।
एक दिन लकड़हारा लकड़ी काटने के लिए जंगल में गया । उसने देखा की नदी के पास एक पेड़ है। वह उस पेड़ पर चढ़कर उसकी डाल काटने ही गया की उसके हाथ से कुल्हाड़ी नीचे नदी के पानी में गीर गई। लकड़हारा पेड़ पर से नीचे आया और कुल्हाड़ी को खोजने लगा पर उसे कुल्हाड़ी कहीं न मिली। कुल्हाड़ी न मिलने के कारण लकड़हारा उदास हो गया।
लकड़हारा आसमान की तरफ देखकर ईश्वर से प्रार्थना करने लगा की अब तुम ही मेरी सहायता करो। उसी समय वहा पर एक देवदूत आया और लकड़हारे से उसकी उदासी का कारण पूछा। लकड़हारे की उदासी का कारण जानकर उसने कहा की मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी खोजकर देता हूँ।" इतना कहकर उसने नदी में डुबकी लगाई और एक सोने को कुल्हाड़ी लेकर आया और कहा कि 'ये लो तुम्हारी कुल्हाड़ी उस समय लकड़हरे ने कहा, ये मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।" देवदूत ने फिर से नदी में डूबकी लगाई और वह एक चांदी की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया। उसने फिर से लकड़हारे को कुल्हाड़ी देनी चाही पर फिर से लकड़हारे ने मना कर दिया की यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।
देवदूत ने तीसरी बार नदी में डुबकी लगाई और इस बार वह एक लौहे की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया। उस कुल्हाड़ी को देखते ही लकड़हारा खुशी से बोला मेरो कुल्हाड़ी है।" देवदूत लकड़हारे की ईमानदारी से प्रसन्न हो गया और उसने लोहे की कुल्हाड़ी के साथ-साथ सोने और चांदी की कुल्हाड़ी भी लकड़हारे को इनाम में दे दी।
• सीख : हमें जीवन में सदा ईमानदारी के रास्ते पर चल चाहिए।
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Question 44 Marks
खरगोश और कछुआ$-$ दोनों में दौड़ की शर्त लगना रगोश का आगे होना जाना पेड़ के नीचे आराम करना जुए की धीमी गति $-$ खरगोश की हार $-$ सीख।
Answer
कछुआ और खरगोश अथवा खरगोश की मुर्खता
एक जंगल था। उस जंगल में एक खरगोश रहता था। उस अरगोश को अपनी तेज चाल का बहुत घमंड था। उसी जंगल एक कछुआ भी रहता था। कछुआ जब भी चलता तो रगोश उसकी धीमी चाल का मज़ाक उड़ाता था।
एक दिन खरगोश ने कछुए को नीचा दिखाने के लिए के साथ दौड़ की शर्त लगाई। खरगोश बहुत तेजी से ड़कर आगे निकल गया। कछुआ धीरे$-$धीरे आगे चल रहा खरगोश ने जब पिछे मुड़के देखा तो कछुआ कहीं दिखाई दे रहा था। उसने सोचा की कछुआ पिछे रह गया है तो मैं थोडी देर आराम कर लेता हूँ। ऐसा सोचकर वह एख पेड़ के नीच बैठ गया और उसे नीद आ गई।
कछुआ धीरे$-$धीरे अपने लक्ष्य की और आगे बढ़ने लगा उसने रास्ते में देखा की खरगोश सो गया है। वह वहा से आवाज़ किए बिना आगे निकल गया और शर्त जीत गया। खरगोश की चाल तेज होने के बावजूद वह हार गया।
सीख : हमें तब तक नहीं रुकना चाहिए जब तक हम अपनी मंजिल तक न पहुँच जाए।
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Question 54 Marks
एक कुत्ता $-$ मुँह में रोटी का टुकड़ा $-$ छोटे पुल पर से जाना – पानी में अपनी परछाई देखना – परछाई को दूसरा कुत्ता समझना $-$ रोटी का टुकड़ा छीन लेने के लिए भौंकना $-$ अपना टुकड़ा गँवाना $-$ सीख। 
Answer
कुत्ते की लालच (अथवा) लालच का परीणाम
एक कुत्ता था। एक दिन उसे बहुत भुख लगी थी। वह खाने की तलाश में था। उसे कही से एक रोटी का टुकड़ा मिल गया रोटी का टुकड़ा पाकर कुत्ता बहुत खुश हुआ।
कुत्ता रोटी का टुकड़ा लेकर एक छोटी नदी पर बनाये गए पुल पर से गुज़र रहा था । कुत्ते ने नदी के पानी में अपनी परछाई को देखा और यह समज बैठा की वह दूसरा कुत्ता है और उस कुत्ते के पास भी रोटी का टुकड़ा है। कुत्ते के मन में दूसरी रोटी का पाने का लालच जागा । कुत्ते ने अपनी परच्छाई की ओर देखकर भोंकना शुरु किया पर जैसे ही वह भौंका उसके मुँह में रखा रोटी का टुकडा नीचे नदी में गीर गया।
कुत्ते ने दूसरा रोटी का टुकड़ा पाने की लालच में आ कर अपना रोटी का टुकड़ा भी गवाँ दिया।
सीख : हमें किसी की वस्तु की लालच नहीं करनी चाहिए और हमारे पास जो हो उसीका संतोष मानना चाहिए।
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Question 64 Marks
एक बादशाह – वजीर की निवृति के बाद उस पद के लिए उम्मीदवार बुलवाना $-$ कठिन परीक्षा $-$ तीन उम्मीदवारों का बादशाह तक पहुँचना $-$ बादशाह का तीनों को एक ही सवाल $-$ "मेरी और तुम्हारी दाढ़ी में एक साथे आग लग जाए तो क्या करोंगे ?" पहला – मैं पहले अपनी दाढ़ी की आग बुझाउँगा। दूसरा$-$मैं पहले आपकी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा। तीसरा $-$ मैं एक हाथ से आपकी और दूसरे हाथ से अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा। $-$ बादशाह $-$पहला स्वार्थी, दूसरा नादान एवं तीसरा बुद्धिमान है, अतः तीसरे को वजीर पद के लिए नियुक्त करना।
Answer
बादशाह का सवाल और नये वजीर का चुनाव
बंगदेश में एक बादशाह था। उसका राज्य बहुत बड़ा था। उस बादशाह के वजीर की आयु बहुत हो गई थी। इसी लिए उसकी निवृति के बाद बादशाह को नए वजीर का चुनाव करना था।
वजीर का पद बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस कारण कई सारे उम्मीदार आए। उन सब की कड़ी परीक्षा ली गई। उस परीक्षा में से तीन उम्मीदवार सफल हुए । उन तीनो को बादशाह के पास भेजा गया।
बादशाह को उन्हीं तीनों उम्मीदार में से किसी एक को वजीर के पद के लिए नियुक्त करना था। इस लिए बादशाह ने तीनो उम्मीदारो से बारी-बारी एक सवाल पूछा कि, "यदि मेरी और तुम्हारी दाढ़ी मैं एक साथ आग लग जाए तो तुम क्या करोंगे?"
तीनो उम्मीदवार ने बारी-बारी से बादशाह के प्रश्न का उत्तर दिया। पहले उम्मीदार ने कहा कि "मैं पहले अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।" दूसरे ने कहा "मैं पहले आपकी दाढ़ी में लगी आग बुझाऊँगा। तीसरे ने बादशाह से कहा कि "मैं एक हाथ से आपकी और दूसरे हाथ से अपनी दाढ़ी में लगी आग बुझाऊँगा।
बादशाह ने तीनों के उत्तर सुनकर कहा कि "पहले उम्मीदवार के उत्तर से पता चलता है, की वह स्वार्थी है। दूसरे उम्मीदवार की बात से लगता है - वह नादान है और तीसरे उम्मीदवार को बुध्धिमता के कारण वजीर के पद के लिए चुनते है।
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Question 74 Marks
राजा का बीमार पड़ना $-$ वैद्य की असफलता $-$ किसी अनुभवी बूढ़े की सलाह $-$ किसी सुखी मनुष्य का कुर्ता पहनो $-$ राजा का कुर्ता खोजने जाना $-$ मेहनती किसान को देखना $-$ सुख का राज समझना।
Answer
महेनती किसान
विजयगढ़ के राजा विक्रमसिंहजी थे। उनके राज्य में चारो ओर शांति थी। राजा के पास किसी चीज की कमी नहीं थी। उनके महल में उनके आराम की सभी वस्तुएँ मौजूद थी। राजा का जीवन सुख, सुविधा और आराम मैं व्यतीत हो रहा था।
एक दिन अचानक राजा विक्रमसिंह बिमार पड़ गए। कई सारे वैद्य आए किन्तु वे राजा का इलाज करने में असफल रहे। राजा की बिमारी की खबर सारे राज्य में फैल गई। एक बूढ़े ने राजा से कहा कि, "आप किसी सुखी मनुष्य का कुर्ता पहेने तो आपकी बिमारी दूर हो जाएँगी" राजा ने बूढ़े की बात मान ली।
दूसरे दिन राजा अपने राज्य में सुखी मनुष्य को खोजने लगे। राजा सुखी मनुष्य को खोजते हुए खेत में पहुंच गए। राजा ने खेत में काम करते एक किसान को देखा । राजा ने किसान से पूछा , "क्या तुम सुखी हो ?" किसान ने राजा के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि, "ईश्वर की कृपा से मैं सुखी हूँ ।" राजा किसान का उत्तर सुनकर प्रसन्न हो गया और किसान से उसका कुर्ता माँगने का विचार उनके मन में आ गया पर जैसे ही राजा ने किसान की तरफ देखा तो किसान ने सिर्फ धोती ही पहनी थी और उसके सारे देह से पसीना बह रहा था।
राजा किसान के देह से बहते पसीने को देखकर समज गए कि कठिन परीश्रम ही सुख का राज़ है। राजाने भी उस दिन संकल्प किया कि "में आज से आराम छोड़कर कठोर परीश्रम करूँगा।" कुछ दिन के बाद राजा की बीमारी भी दूर हो गई।
सीख : श्रम ही अच्छे स्वास्थ्य की कूँजी है। हमे जीवन में कभी श्रम करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
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Question 84 Marks
एक नाई $-$ एक मुर्गी – रोज़ सोने का एक अंडा देना $-$ नाई का अमीर हो जाना $-$ शहर भर में चर्चा $-$ इज्जत बढ़ना – नाई को एक साथ सब सोना पाने की लालसा $-$ मुर्गी को मार डालना $-$ लालच में सब सोने को खो देना $-$ सीख ।
Answer
लालच का फल : लालची नाई .
एक नगर में एक नाई रहता था । नाई स्वभाव का लालची था । उस नाई ने कुछ पैसे जुटाकर एक मुर्गी खरीदी । मुर्गी चमत्कारी थी । वह रोज़ नाई को एक सोने का अंडा देती थी। नाई की किस्मत खुल गई । मुर्गी रोज उसे एक सोने का अंडा देने लगी थी । धीरे धीरे नाई अमीर बन गया । शहर के सभी लोग अब नाई की इज्जत करने लगे थे । नाई का जीवन खुशियों से भर गया था ।
एक दिन अचानक नाई के मन में लालच जाग उठी । उसने सोचा की जो मुर्गी मुझे रोज़ एक सोने का अंडा देती है, उस मुर्गी के पेट में बहुत से अंडे होगे । नाई ने सभी अंडे एक साथ प्राप्त कर जल्दी बहुत धनवान बनने की बात सोची । इसी विचार में पड़कर नाई ने दूसरे दिन उस मुर्गी को मार डाला । नाई ने मुर्गी को मारकर जब उस मुर्गी के पेट में देखा तो उसे एक भी सोने का अंडा नहीं मिला । मुर्गी को मारने के कारण नाई को रोज़ सोने के अंडे मिलना भी बंद हो गए । नाई अब बहुत पछताने लगा कि मैंने यह क्या कर दिया । पर अब कोई लाभ नहीं होनेवाला था क्योंकि सोने के अंडे देनेवाली मुर्गी अब मर गई थी। सीख :- हमें जीवन में कभी लालच नहीं करनी चाहिए क्योंकि लालच का परिणाम बुरा ही होता है।
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Question 94 Marks
एक बुढ़ा किसान – तीन आलसी लड़के $-$ किसान का लड़को को बुलाना $-$ "अपने खेत में एक खज़ाना गड़ा हुआ है ।" $-$ किसान की मृत्यु $-$ लड़कों का सारा खेत खोद डालना $-$ खज़ाना न मिलना – वर्षा $-$ बीज बोना $-$ अच्छी फसल $-$ लड़कों को हर साल खज़ाना मिलना – सीख ।
Answer
• परिश्रम का महत्त्व •
रामपुर नामक एक गाँव था । धनीराम नामक एक बुढ़ा किसान उस गाँव में रहता था । उसके तीन बेटे थे, परंतु तीनों ही बहुत आलसी थे । धनीराम को हमेशा इस बात की चिंता लगी रहती थी कि मेरी मृत्यु के बाद मेरे बेटों का क्या होगा ?
धनीराम की तबियत अब धीरे धीरे बिगडने लगी थी । एक दिन धनीराम ने अपने तीनों बेटों को बुलाया और उन्हें कहा कि "मैंने हमारे खेत में खज़ाना गाड़ के रखा है। मेरी मृत्यु के बाद तुम उसे निकालकर आपस में बाँट लेना ।"
धनीराम के तीनों लड़के आलसी थे, परंतु अब उन्हें खज़ाना पाने का लालच था । इसलिए तीनों लड़कों ने मिलकर पूरा खेत खोद डाला । लड़कों ने पूरा खेत खोद डाला पर कही पर भी उन्हें खज़ाना नहीं मिला । पहले तो वे बड़े निराश हुए बाद में उन्होंने खेत में बीज बोने शुरु कर दिए । उस वर्ष बारिश भी अच्छी हुई । इस कारण उनके खेत में फ़सलें लहलहाने लगी और तब उन्हें पता चला कि उनके पिताजी किस खजाने की बात कर रहे थे । अब हर साल तीनों भाई मिलकर खेती करते और फसल के रुप में हर साल खज़ाना प्राप्त करने लगे ।
सीख : हमें जीवन में सदा परिश्रम करते रहना चाहिए । परिश्रम मनुष्य का सच्चा मित्र है।
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Question 104 Marks
नाले के किनारे एक वृक्ष $-$ नाले में बहती हुई चींटी नाले में गिराना $-$ वृक्ष पर एक कबूतर पर कबूतर का देखना $-$ पत्ता तोड़कर गिरा पत्ते के सहारे चींटी का किनारे पर आना $-$ एक दिन एक शिकारी का आना ताकना $-$ का चौंकना कबूतर की ओर निशाना चींटी क़ा देखना$-$ शिकारी को काटना $-$ शिकारी पेड निशाना चूकना कबूतर का उड़ जाना – सिख।
Answer
भलाई का बदला
गंगापुर रेलवे स्टेशन के पास एक छोटा$-$सा नाला बहता था। उस नाले के किनारे पर बरगद का एक वृक्ष था। उस पर एक कबूतर रहता था।
एक दिन दोपहर को कबूतर बरगद के वृक्ष की एक डाली पर बैठा था। इतने में उसने नाले के पानी में एक चींटी को बहते हुए देखा। वह किनारे पर पहुँचने के लिए छटपटा रही थी। कबूतर को इस चींटी पर दया आई। उसने तुरन्त एक पत्ता तोड़कर नाले में चींटी के पास गिरा दिया। चींटी झटपट पत्ते पर चढ़ गई और उसके सहारे किनारे पर आ गई। उसने मन$-$ही$-$मन कबूतर का एहसान माना।
कुछ दिनों के बाद एक शिकारी उस बरगद के पास आया। पेड़ पर बैठे कबूतर को देखकर उसने निशाना लगाया। कबूतर को तो इस बात का ख्याल तक न था। इतने में उस चींटी ने शिकारी को देख लिया। शिकारी तीर चलानेवाला ही था कि चींटी ने उसके पैर में काटा। शिकारी चौंक पड़ा। उसके धनुष से तीर तो छूट गया, पर निशाना चूक गया। तीर के कारण हुई पत्तों की खडखडाट सुनकर कबूतर उड़ गया। उसकी जान बच गई। इस प्रकार चींटी ने कबूतर की जान बचाकर उपकार का बदला चुका दिया।
बोध : भलाई करनेवाले का सदा भला ही होता है।
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Question 114 Marks
एक सज्जन $-$ इकलौता पुत्र $-$ पुत्र बुरी संगति में $-$ पिता का पुत्र को समझाना पुत्र पर कोई असर न होना नड़ बाज़ार से आम मँगवाना पुत्र को अच्छे आम के बीच सड़ा आम रखने को कहना दो$-$तीन दिनों के बाद टोकरी खोलना $-$ $-$ सब आम सड़े हुए पुत्र को सीख मिलना $-$ पुत्र को दिखाना लचयाने$-$सुधर जाना – सिख।
Answer
चतुर सज्जन
विजयनगर में एक सुखी सज्जन रहते थे। सज्जन को एक ही में बेटा था और वह गुणवान तथा चरित्रवान था। किन्तु कुछ दिनों से उसे बुरे मित्रों की संगति हो गई। धीरे-धीरे वह पढ़ाई में बेध्यान होने लगा। फलतः वार्षिक परीक्षा में वह नापास हुआ।
सज्जन अपने बेटे को बार-बार समझाते। पर बुरी संगति के कारण उसे कोई असर नहीं होता था। पिता को अपने बेटे की चिंता होने लगी। एक दिन उन्होंने अपने बेटे को कुछ पैसे दिए और बाज़ार से आम की टोकरी ले आने को कहा। बेटा बाज़ार गया और आम की टोकरी खरीद लाया ।
सज्जन ने एक सड़ा हुआ आम भी टोकरी के अच्छे आमों के बीच रखने को कहा। तीन-चार दिन के बाद पिता ने पुत्र को टोकरी खोलक देखने को कहा। बेटे ने देखा तो टोकरी के सभी आम सड़ गए थे पिता ने बेटे से पूछा कि ऐसा क्यों हुआ ?
पिता के प्रश्न को बेटा अच्छी तरह समझ गया। उसे मालूम गया कि मैं बुरी संगति के कारण ही परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुआ। दिन से उसने बुरे मित्रों की मित्रता छोड़ दी ।
सीख: हमें सदा कुसंग से दूर रहना चाहिए और अच्छे से मित्रता करनी चाहिए।
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Question 124 Marks
चार चोरों का धन चुराना समान बँटवारे के लिए $-$ दो चोरों का मिठाई खरीदने इधर दोनों जंगल में जाना जाना $-$ भूख लगना • नियत बिगड़ना $-$ मिठाई में जहर मिलाना के मन में पाप समाना $-$ मिठाई लानेवालों को मार डालने की योजना बनाना $-$ हाथ$-$मुँह धोने के लिए कुएँ पर जाना दोन को ढकेल देना $-$ मिठाई खाकर बाकी दो का भी मर जाना सीख ।
Answer
जैसा करोगे, वैसा पाओगे
अंधेरी रात में चार चोर चोरी करने निकले। उन्होंने एक अमीर के घर से बहुत धन चुराया। चोरी करने के बाद बँटवारे के लिए नौर जंगल में पहुँचे। चोरों को भूख लगी।
उनमें से दो चोर नजदीक के गाँव में मिठाई खरीदने गए। रास्ते में दोनों ने अपने दोनों साथियों को मारकर चोरी का सारा माल हडप लेने का सोचा। उन्होंनें मिठाई में जहर मिला दिया। उधर जंगल में भी दोनों मित्रों ने भी मिठाई लेने के लिए गए हुए दोनों मित्रों को मार डालने की तरकीब सोची।
जब वे मिठाई लेकर आए तो उन्होंने हाथ-मुँह धोने के बहाने उन दोनों मित्रों को कुएँ पर ले जाकर कुएँ में ढकेल दिया । अब जंगलवाले दोनों मित्र हाथ-मुँह धोकर मिठाई खाने लगे। मिठाई खाते ही थोड़े समय में दोनों के शरीर में जहर फैल गया। दोनों तड़प-तड़पकर मर गए।
सीख: हम जैसा करेंगे वैसा ही फल पाएँगे। बुरे काम करनेवालों को बुरा फल मिलता है।
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Question 134 Marks
एक बहेलिया जंगल में जाल बिछाना $-$ जाल के ऊपर अनाज के दाने बिखेरना दाने देखकर कबूतरों का जाल में फँसना $-$ पछतावा $-$ एक बूढ़े कबूतर की तरकीब $-$ एक साथ कबूतरों का जाल के साथ उड़ना $-$ बहेलिए का पछताना $-$ मित्र चूहे के बिल के पास जाल के साथ जाना चूहे द्वारा $-$ जाल काटना $-$ मुक्ति $-$ बोध ।
Answer
एकता की ताक़त
एक बहेलिया अपना जाल लेकर शिकार करने के लिए जंगल में गया। वहाँ उसने अपना जाल बिछा दिया। जाल के ऊपर उसने थोड़े अनाज के दाने बिखेर दिए। फिर वह थोड़ी दूर एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया। थोड़ी देर में वहाँ से कबूतरों का एक बड़ा झुंड गुजरा। कबूतरों ने जाल पर बिखेरे हुए अनाज के दाने देखे। दाने चुगने की लालच में वे सब नीचे उतर आए। जैसे ही उन्होंने दाना चुगना शुरू किया कि वे सभी जाल में फँस गए सभी कबूतर घबरा गए और पछताने लगे।
कबूतरों के झुंड़ में एक बूढ़ा कबूतर था। उसने सभी कबूतरों को जाल सहित, एक साथ उड़ने के लिए कहा। तुरंत सब कबूतर एकसाथ जाल के साथ उड़े। यह दृश्य देखकर बहेलिया चकित हो गया। अपने हाथ में आया शिकार चले जाने से वह निराश हो गया।
सभी कबूतर उड़ते$-$उड़ते जाल के साथ अपने मित्र चूहे के बिल के पास पहुँचे। चूहे ने अपने पैने दाँतों से जाल को काट दिया और सभी कबूतरों को जाल से मुक्त कर दिया। कबूतरों ने चूहे का आभार माना और खुशी$-$खुशी आसमान की ओर उड़ गए।
बोध: मुसीबत के समय हमें एकता और बुद्धि से काम लेना चाहिए।
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Question 144 Marks
राजा का बीमार पड़ना वैद्य की असफलता – किसी अनुभवी बूढ़े की सलाह किसी सुखी मनुष्य का कुर्ता पहनो $-$ राजा का कुर्ता खोजने जाना $-$ मेहनती किसान को देखना सीख । $-$ सुख का राज समझ में आना – सिख।
Answer
सुख का रहस्य
एक नगर था। उस नगर का राजा बहुत अमीर था। वह रानियों के साथ आनंद से रहता था। अच्छा खाना खाता था। अच्छे कपड़े पहनता था। एश$-$आराम करता था ।
एक दिन राजा बीमार पड़ा। राजा की बीमारी दूर करने के लिए वैद्य बुलाए गए। वैद्यो ने राजा की बीमारी दूर करने के कई उपाय किए। लेकिन राजा की बीमारी दूर नहीं हुई। वैद्य भी निराश हो गए।
अंत में राजा ने बीमारी दूर करने के लिए एक अनुभवी बूढ़े व्यक्ति की सलाह ली। बूढ़ा बहुत होशियार था। उसको मालूम था कि राजा कुछ भी काम नहीं करते, इसलिए बीमार पड़े हैं। उसने राजा से कहा कि किसी सुखी मनुष्य की तलाश कर उसका कुर्ता पहनो तो आपकी बीमारी दूर हो जाएगी। राजा सुखी मनुष्य की खोज में निकले।
राजा ने एक किसान त्रने को देखा। वह उन्हें सुखी मालूम हुआ। किसान खेत में मजदूरी कि करता था। उसका कुर्ता पसीने से तर था। वह मजदूरी करता था, की इसलिए बीमार नहीं पड़ता था। राजा को सारी बात समझ में आ गई कि बीमारी का कारण एश$-$आराम हैं। राजा मेहनत करने लगे।
सीख : हमें सुखी रहने के लिए मेहनत करनी चाहिए।
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Question 154 Marks
एक कुत्ता मुँह में रोटी का टुकड़ा छोटे पुल पर से जाना पानी में अपनी परछाई देखना$-$ परछाई को दूसरा कुत्ता समझना रोटी का टुकडा छीन लेने के लिए भौंकना $–$ अपना टुकडा भी गँवाना निराश होना सीख ।
Answer
मूर्ख कुत्ता
एक गाँव था। गाँव के पास नदी बहती थी। नदी पर एक छोटा$-$सा पुल था। गाँव में एक कुत्ता रहता था। एक दिन कुत्ते को रोटी मिली। कुत्ता मुँह में रोटी लेकर नदी के पुल से जा रहा था कुत्ते को पानी में दूसरा कुत्ता दिखाई दिया। पानी वाले कुत्ते के मुँह में भी रोटी था। कुत्ते को यह नहीं मालूम था कि यह उसकी ही परछाई थी।
कुत्ता दूसरी रोटी लेने के लिए परछाई की ओर भौंकने लगा तो भौंकने से उसके मुँह की रोटी नदी में गिर गई। कुत्ते को दूसरी रोटी की लालच में अपनी रोटी भी गँवानी पड़ी। रोटी गँवाने से कुत्ते को निराश होना पड़ा।
सीख: हमें बिना सोचे$-$समझे कोई काम नहीं करना चाहिए।
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Question 164 Marks
सज्जन व्यक्ति का गुणवान पुत्र बुरी संगति पिता $-$ को दुःख – उपदेश देना कुछ असर न होना बाज़ार से अच्छे $---$ आम खरीदना – पुत्र को बुलाना उन आमों में एक सड़ा आम $-$ रखने के लिए कहना दो$-$तीन दिन के बाद आम की टोकरी खोलना प्रभाव पड़ना सभी आम सड़े हुए • इस घटना का पुत्र पर गहरा $-$ सीख ।
Answer
संगति का फल
धर्मनगर में एक सज्जन रहते थे। उनका पुत्र बड़ा गुणवान था, परंतु वह कुछ दिनों से बुरी संगति में फँस गया था। वह पढ़ाई की ओर लापरवाह हो गया था। यह देखकर पिता को भारी दुःख हुआ। उन्होंने पुत्र को कई बार समझाया, लेकिन पिता का उपदेश व्यर्थ गया।
पुत्र को सही रास्ते पर लाने के लिए पिता ने एक तरकीब सोची। वे बाज़ार से कुछ आम ले आए। इसमें एक आम सड़ा हुआ था। पिताजी ने पुत्र को सभी आम दिखाकर एक टोकरी में रखने को कहा।
दो$-$तीन दिन के बाद पिता ने पुत्र से आम की टोकरी खोलने के लिए कहा। पुत्र ने देखा तो सारे आम सड़े हुए थे। पुत्र ने पिता से पूछा कि ऐसा क्यों हुआ। पिता ने पुत्र को समझाया कि एक सड़े हुए आम के कारण सभी आम सड़ गए हैं। पिता की बात पुत्र की समझ में आ गई। उसी दिन से उसने बुरे मित्रों का साथ छोड़ दिया।
सीख: बुरी संगति का फल बुरा होता है। हमें हमेशा इससे बचना चाहिए।
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Question 174 Marks
गड़रिये का लड़का जंगल में भेड़$-$बकरियाँ चराने $-$ जाना पेड़ पर चढ़कर चिल्लाना $-$ 'बचाओ, बचाओ, शेर आया' गाँववालों का आना पूछना शेर कहाँ है उत्तर $-$ तो मज़ाक कर रहा था एक दिन सचमुच शेर का आना लड़के का चिल्लाना $-$ जाना $-$ सीख ।
Answer
झूठ का फल
जंगल के पास एक छोटा$-$सा गाँव था। गाँव में एक गड़रिये टुक का लड़का रहता था। वह रोज अपनी भेड़$-$बकरियाँ चराने जंगल में जाता था। जंगल के पास ही किसानों के खेत थे।
गड़रिये का लड़का बहुत शरारती था। वह एक दिन पेड़ पर चढ़कर चिल्लाने लगा, “बचाओ, बचाओ। शेर आया, शेर आया।" छो लड़के की पुकार सुनकर आसपास के किसान मदद के लिए आ पहुँचे। उन्होंने लड़के से पूछा, "शेर कहाँ है ?" लड़का हँसने लगा और बोला, “मैं तो मजाक कर रहा था।" किसान लड़के पर गुस्से को होकर चले गए।
एक दिन लड़का भेड़$-$बकरियाँ चरा रहा था। उस दिन सचमुच जंगल में से शेर आता दिखाई दिया। लड़का पेड़ पर चढ़कर चिल्लाने लगा, "बचाओ, बचाओ। शेर आया, शेर आया।" किसानों ने उसे त मज़ाक समझा और मदद के लिए कोई नहीं गया। शेर गड़रिये की रे भेंड़$-$बकरियाँ पर टूट पड़ा और उन्हें फाड़कर खा गया।
सीख: हमें कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। झूठ बोलने से हमारा खुद का ही नुकसान होता है।
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Question 184 Marks
एक चोर $-$ राजमहल में चोरी करने जाना $-$ कपड़े और रोटियाँ चुराना थोड़े $-$ राजा का वेश बदलकर आना $-$ खजाने की ओर ले जाना $-$ "चलो हम यहाँ चोरी करें" $-$ उत्तर $-$ "मुझे जरूरत थी, वह ले लिया" $-$ राजा का खुश होना चोर को पुरस्कार देना ।
Answer
सद्गुण का पुरस्कार
एक नगर में एक चोर रहता था। चोर चोरी करने में बहुत होशियार था, लेकिन लोभ उसे बिलकुल न था। एक रात वह राजमहल में चोरी करने गया। वह पहरेदार और सिपाहियों की नज़र चुराकर राजमहल में घुस गया। उसने राजमहल से केवल थोड़े कपड़े और कुछ रोटियाँ ही चुराई।
उसी रात राजा चोर का वेश बनाकर चोर के पास पहुँचे। राजा ने चोर से कहा, "देखो, मैं भी तुम्हारी तरह राजमहल में चोरी करने आया हूँ। चलो, हम राजा के खजाने में चोरी करें।" राजा ने चोर को खजाना बताते हुए कहा, "हम यहाँ से कीमती गहने, सिक्के, मुहरें चुरा लें।"
राजा की बात सुनकर चोर बोला, “भाई, मुझे खजाने की इन चीज़ों की कोई जरूरत नहीं है। मुझे जिन चीज़ों की जरूरत थी, वे मैंने ले ली।" चोर की बात सुनकर राजा खुश गया। उन्होंने चोर का पता पूछ लिया। दूसरे दिन राजा ने चोर को दरबार में बुलाया। राजा ने सभी दरबारियों को रात की बात कह सुनाई।
सारे दरबारी अचम्भे में पड़ गए। राजा ने चोर का सम्मान किया और उसकी ईमानदारी पर खुश होकर उसे अपना प्रधान बनाया।
सीख : सचमुच, संतोष और ईमानदारी अच्छे गुण हैं। उनसे जरूर अच्छा फल मिलता है।
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Question 194 Marks
एक मंदबुद्धि विद्यार्थी माता$-$पिता, शिक्षक उससे निराश परीक्षा में अनुत्तीर्ण $-$ दुःखी होकर आत्महत्या के लिए जंगल की ओर जाना $-$ मार्ग में कुआँ वहाँ पत्थरों पर गहरे निशान देखना$-$ बोध होना $-$$-$ अभ्यास में मन लगाकर जुट जाना बड़ा विद्वान बनना $-$ सीख ।
Answer
सफलता की कुंजी
वरदराज नामक एक मंदबुद्धि बालक था। उसे कुछ भी याद नहीं रहता था। वह एक साल की पढ़ाई में तीन$-$तीन साल लगाता रहा। इससे उसके माता$-$पिता और शिक्षक निराश हो गए। वह इस बार भी परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुआ ।
दुःखी होकर वह आत्महत्या करने के लिए जंगल की ओर चल पड़ा। रास्ते में एक कुआँ आया। कुआँ देखकर वह पानी पीने के लिए कुएँ पर गया। स्त्रियों ने उसे पानी पिलाया। पानी पीने के बाद वरदराज कुएँ के आसपास लगे पत्थर देखने लगा। उसने पत्थरों पर गहरे निशान देखे ।
उसने स्त्रियों से पूछा, "ये पत्थर क्यों इतने घीस गए हैं ?" स्त्रियों ने बताया कि, "देखो भाई। इस जगह पर पानी खींचने की रस्सी को बार$-$बार रगड से ये पत्थर पीस गए हैं और उन पर निशान पड़ गए हैं।" स्त्रियों की बात सुनकर वरदराज को बोध हुआ कि बार$-$बार प्रयत्न करने से जरूर सफलता मिलती है।
वरदराज घर लौट आया। उसने मन लगाकर पढ़ाई प्रारंभ की। वह पाठशाला में भी मन लगाकर पढ़ने लगा। अब वह रात$-$दिन ध्यान लगाकर पढ़ता था। ध्यान लगाकर पढ़ने से उसकी पढ़ाई सरल हो गई। कल का बुद्ध वरदराज अब बुद्धिमान बन गया। बाद में यही वरदराज प्रसिद्ध विद्वान बना ।
सीख: मन लगाकर कठोर परिश्रम करने से कोई भी काम हम आसानी से कर सकते हैं।
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Question 204 Marks
एक गाँव में नाई नाई के घर एक मुर्गी रोज एक सोने का अंडा देना नाई का अमीर हो जाना सब अंडे एक साथ पाने की लालसा $-$ मुर्गी को मार डालना $-$ कुछ न मिलना पछतावा $-$ सीख
Answer
लालच का फल
एक छोटा$-$सा गाँव था। गाँव में एक गरीब नाई रहता था। वह लोगों के बाल काटकर अपने परिवार का गुजारा करता था। एक दिन वह बाजार से एक मुर्गी खरीदकर ले आया। वह रोज सबेरे सोने का एक अंडा देती थी। नाई की किस्मत खुल गई। वह थोड़े ही दिनों में अमीर बन गया। अब तो गाँव में नाई की इज्जत बढ़ गई।
एक दिन नाई ने सोचा, "यह मुर्गी रोज एक सोने का अंडा देती है। इसके पेट में जरूर सोने के बहुत अंडे होंगे। यदि मैं मुर्गी के शरीर को चीरकर सारे अंडे एकसाथ निकाल लूँ, तो मैं एक ही दिन में मालामाल बन जाऊँ।" ऐसा सोचकर नाई ने तेज चाकू से मुर्गी का शरीर चीर डाला मुर्गी जोर से चीखकर मर गई।
नाई को मुर्गी के पेट से एक सोने का अंडा नहीं मिला। नाई अब अपनी भूल पर पछताने लगा।
सीख: लालच बुरी बला है। लालची का सर्वनाश होता है। हमें कभी लालच नहीं करनी चाहिए।
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कहानी - हिंदी STD 7 Questions - Vidyadip