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लेखन – कहानी

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Question 14 Marks
चार चोरों का मिलकर धन चुराना $-$ बँटवारा करने के लिए जंगल में जाना  $-$ भूख लगना  $-$ दो चोरों का मिठाई खरीदने के लिए नगर में जाना $-$  नीयत बिगड़ना $-$ मिठाई में जहर मिलाना $-$  इधर जंगल में दोनों चोरों के मन में भी पाप $-$ मिठाई लानेवालों को मार डालने की युक्ति $-$ हाथ$-$मुँह धुलाने के लिए दोनों को कुएँ पर ले जाना $-$ कुएँ में ढकेल देना $-$ मिठाई खाकर बाकी के दो चोरों का भी मर जाना  $-$ सीख।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 24 Marks
सज्जन पिता का गुणवान पुत्र$-$ बुरी संगति में फंसना पिता को दुःख $–$ उपदेशों का असर नहीं पिता का बाजार से अच्छे आम खरीदना साथ $–$ में एक सड़ा हुआ आम भी लाना पुत्र को बुलाना उन आमों के साथ सहा $–$ आम रखने के लिए कहना दूसरे दिन आम खाने के लिए कहना कई आम सड़े हुए पुत्र पर असर सीख।
Answer
कुसंगति का फल
देवनगर में गोपालदास नाम के एक सज्जन रहते थे। उनका पुत्र अमित बहुत गुणवान था। पढ़ाई, खेल-कूद और अन्य प्रवृत्तियों में वह हमेशा आगे रहता था। दुर्भाग्य से अमित बुरी संगति में फंस गया। पढ़ाई-लिखाई के प्रति भी वह लापरवाह हो गया। पुत्र की यह दुर्दशा देखकर माता-पिता बहुत चिंतित हुए। उन्होंने कई बार अमित को समझाने की कोशिश की, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ। एक दिन गोपालदास बाजार से टोकरी भर आम ले आए। साथ में वे एक सड़ा आम भी लाए। उन्होंने बेटे को बुलाकर कहा, “बेटा, लो, यह सड़ा हुआ आम भी इन आमों के बीच में रख दो। कल हम ये आम खाएंगे।“ पिता के कहने पर लड़के ने अन्य आमों के बीच वह सड़ा आम भी रख दिया। दूसरे दिन पिताजी ने अमित से कहा, “बेटा, आमोंवाली यह टोकरी ले आओ।“ पुत्र ने आमों की टोकरी खोलकर देखा तो उसमें और भी कई आम सड़ गए थे। ने कहा, “पिताजी, इसमें तो बहुत-से आम सड़ गए हैं। गोपालदास ने कहा, “हां बेटा! देखो, एक सड़े आम की संगति से दूसरे आम भी सड़ गए। तू खराब लड़कों की संगति में रहता है क्या तेरा जीवन भी इन आमों की तरह बरबाद नहीं हो जाएगा ?” पिताजी की बात सुनकर अमित की आँखें खुल गईं। उसी दिन से उसने बुरे साथियों का संग छोड़ दिया।
सीख : बुरी संगति का परिणाम बुरा होता है। बुरे साथियों से दूर रहने में
ही हमारी भलाई है।
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Question 34 Marks
पढ़ाई में कमजोर लड़का एक ही कक्षा में दो बार अनुत्तीर्ण होना $–$ जंगल में आत्महत्या करने जाना एक बंदर का बच्चा पेड़ पर चढ़ने $–$ की कोशिश बार$-$बार गिरना अंत में सफलता बंदर के बच्चे से लड़के $–$ को प्रेरणा मिलना घर लौटना पड़ाई में जुट जाना उत्तीर्ण होना सीख
Answer
सफलता की कुंजी
दिनेश आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था। वह पढ़ाई के प्रति लापरवाह था। वह इस कक्षा में एक बार फेल हो चुका था। अब फिर से वार्षिक परीक्षा आ पहुँची थी, परंतु दिनेश मन लगाकर परिश्रम नहीं करता था। इसलिए वह परीक्षा में फिर अनुत्तीर्ण हो गया। बार-बार असफल होने से वह बहुत निराश हो गया। वह आत्महत्या करने के इरादे से जंगल में जा पहुंचा। वह एक बड़े पेड़ की डाल में रस्सी बांधकर रस्सी का फंदा अपने गले में डालना चाहता था। अचानक उसकी नजर बंदर के एक छोटे से बच्चे पर पड़ी। बंदर का वह बच्चा एक पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था। परंतु बार-बार वह नीचे गिर जाता था। कई बार असफल होने के बाद अंत में वह पेड़ पर चढ़ने में सफल हो गया।बंदर के बच्चे की इस सफलता से दिनेश की आँखें खुल गई। उसमें उत्साह का संचार हुआ। आत्महत्या का विचार छोड़कर वह घर लौट आया। वह पढ़ाई में जी-जान से जुट गया। उसकी मेहनत सफल हुई। वह वार्षिक परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हुआ।
सीख $:$ परिश्रम करने पर सफलता अवश्य मिलती है। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।
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Question 44 Marks
एक सुहावना वन $-$ इन्द्र का आगमन $-$ वहाँ के प्राकृतिक सौदंय को देखकर इन्द्र का खुश होना $-$ वहाँ एक आछएचर्य $-$ एक सूखे वृक्ष पर एक दुःखी तोता $-$ प्रश्न, "हरे$-$भरे वृक्षों को छोड़कर इस वृक्ष पर कयो ?" $-$ उत्तर यह वृक्ष पहले हरा$-$भरा और फल$-$फूलों से संपन्‍न था " $-$ अब बुरे दिनों में में इसका साथ कैसे छोडूं ?" $-$ इन्द्र का वरदान $-$ सीख ।
Answer
उपकार का बदला
एक बड़ा सुहावना वन था। उस वन में हरे-भरे वक्ष थे, कोमल लताएँ थी ओर सुंदर फूल थे । वन में कई सारे प्राणी ओर पक्षी रहते थे। एक दिन उस वन में इन्द्र सैर करने के लिए आए । वन के प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर इन्द्र बहुत खुश हो गए। इन्द्र ने घूमते$-$घूमते एक वृक्ष देखा । उस वृक्ष पर एक तोता बैठा था। वह तोता उदास था। इन्द्र ने उस तोते से पूछा कि "इस वन के सभी पेड हरे-भरे हैं और तुम इस सूखे पेड़ पर क्‍यों बेठे हो और तुम्हारी उदासी का कारण कया है ?
तोते ने इन्द्र को उत्तर दिया कि, " पहले यह वक्ष भी हरा$-$भरा था। इस पर भी फल लगते थे। इस वक्ष ने मुझे आश्रय दिया था । अब तब यह सूख गया हे तो में उसके उपकार को भूलकर दूसरें वृक्ष पर नहीं जा सकता। तोते की बात सुनकर इन्द्र बहुत प्रसन्‍न हुए । उन्होंने वरदान के रूप में उस व॒क्ष को फिस से हरा$-$भरा कर दिया। वृक्ष को हरा$-$भरा देखकर तोता बहुत खुश हो गया।
सीख $:$ हमें सदा दूसरों के उपकार का ऋण चुकाने का प्रयत्न करना चाहिए।
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Question 54 Marks
एक वन में दो तोतों का जन्म $-$ एक दिन दोनों का बिछड़ जाना $-$ पर डाकुओं के नजदीक रहना $-$ ऋषि $-$ मुनियों के आश्रम में रहनेवाले तोते की भाषा मधुर $-$ डाकुओं के पड़ोस में रहनेवाले तोते की भाषा कठोर होना $-$ दोनों एक ही मा के बच्चे होते हुए भी भिन्न $-$ सीख । संगीत का प्रभाव
Answer
एकवन में तोते का एक जोड़ा रहता था। एक दिन तोती ने दो बच्चों को जन्म दिया। वे धीरे $-$ धीरे बड़े होने लगे । उन दोनोंने उड़ना सीख लिया। एक दिन दोनों तोते उड़ते $-$ उड़ते बिछुड गए। एक तोता उड़ते $-$ उड़ते एक ऋषि के आश्रम में जा पहुँचा। आश्रम में वह एक पेड़ पर रहने लगा। वह तोता पेड के मीठे फल खाता और ऋषि $-$ मुनियों ओर उनके शिष्यों के मुख से वेद के श्लोक सुनता । ऋषियों के साथ रहकर उस तोते ने भी मधुर और विनम्र वाणी बोलना सीख लिया। दुसरी ओर तोते का जो भाई बिछड़ गया था, वह उड़कर एक पहाड़ी पर पहुँच गया | पहाड़ी पर एक पेड़ था। वह तोता भी उस पेड़ पर रहने लगा | उसी पहाड़ी पर डाकूओं का अड्डा था। वे डाकू बात $-$ बात पर आपस में लड़ते और एक दुसरे को गाली देते थे । तोता उन्ही को देखकर उनके जैसी बोली बोलन लगा। दोनों तोते एक ही मा की संतान थे, परंतु फिर भी उनकी वाणी में बहुत अंतर था।
सीख $:$ बच्चों पर आसपास के माहोल का गहरा प्रभाव पडता है।
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Question 64 Marks
एक ब्राह्मण स्त्री $-$ नेवला पालना $-$ पानी भरने को बाहर जाना $-$ लौटने पर नेवले का मुँह खुन से भरा देखना $-$ बच्चे की हत्या की शंका $-$ नेवले पर घड़ा पटकना $-$ बच्चे को जिन्दा पाना $-$ पास ही मरा हुआ साँप पाना $-$ पछतावा $-$ सीख ।
Answer
कसी एक गाँव में एक तालाब के किनारे एक ब्राह्मण परिवार रहता था । परिवार में तीन सदस्य ही थे ब्राह्मण, ब्राह्णणा और उनका एक बच्चा । ब्राह्मण ने एक नेवला भी पाल रखा था । नेवला स्वाभिक्त था। एक दिन जब ब्राह्मणी पानी भरने के लिए तालाब गई तब नेवला बच्चे का ध्यान रख रहा था । तभी अचानक कही से एक साप आ गया । साप बच्चे की ओर बढ़ रहा था । साप बच्चे तक पहोंचे तब तक नेवला साप के पास पहोंच गया ओर नेवले ने साप को मार डाला । नेवला साप को मार के घर के बहार आ गया । ब्राह्णणी थोड़े समय बाद पानी भरकर वापस आई तो उसने देखा की नेवले का मुँह खून से सना हुआ है । ब्राह्मणी को ऐसी शंका हुई की नेवले ने उसके बच्चे को मार डाला । इसलिए ब्राह्मणी ने पानी से भरा घड़ा नेवले पर पटक दीया । नेवले की वही पर मृत्यु हो गई । ब्राह्णणी ने जब घर के अंदर जाकर देखा तब उसका बच्चा जिंदा था ओर उसके पास में ही एक मरा हुआ साप पड़ा था । ब्राह्मणी सारी बात समझ गई की नेवले ने बच्चे को बचाने के लिए साप को मार डाला । ब्राह्मणी को बाद में अपने किए पर बहुत दुःख हुआ ।
सीख $:$ हमें कभी कोई कार्य बिना कुछ सोच$-$विचार किए नही करना चाहिए ।
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Question 74 Marks
बुद्धि बड़ी या बल?
सिंह का जुल्म $-$ रोज एक प्राणी का भोजन $-$ सियार की बारी $-$ सिंह को कुएँ पर ले जाना $-$ अपनी आ परछाई को दूसरा सिंह समझना $-$ सिंह का कुएं में कूदना $-$ सियार का बचना $-$ सीख।
Answer
किसी जंगल में एक सिंह रहता था । वह हर रोज अनेक प्राणियों का शिकार करता था। सब प्राणी उससे डरते रहते थे। एक दिन उन्होंने आपस में बैठक की। उन्होंने सिंह से कहा कि वे रोज उसके पास एक जावनर भेज देंगे। सिंह राजी हो गया। एक दिन सिंह के पास जाने की सियार की बारी आई। वह बड़ा चालाक था। वह सिंह के पास गया और नमस्कार करके बोला, "वनराज, आप खुशी से मुझे खाइए। आपके हाथों मरने का मुझे दुःख नहीं है, परंतु एक बात आपको बताना चाहता हूँ। महाराज, इस जंगल में एक दूसरा सिंह भी आ गया है।" इतना कहकर वह सिंह को एक कुएँ पर ले गया | उसने सिंह को कुएँ के पानी में उसकी परछाई दिखाई। सिंह को लगा कि वह सचमुच, दूसरा सिंह है। गुस्से में आकर वह कुएँ में कुद पड़ा। सिंह मर गया और सियार बच गया। सचमुच, बुद्धि बल से बड़ी होती है।
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Question 84 Marks
कुत्ते की मूर्खता
एक कुत्ता $-$ मुँह में रोटी का टुकड़ा $-$ छोटे पुल पर से जाना $-$ पानी में अपनी परछाई देखना $-$ छोटे पुल परछाई को दूसरा कुत्ता समझना $-$ रोटी का टुकड़ा छीन लेने के लिए भौंकना $-$ अपना टुकड़ा गँवाना सीख।
Answer
किसी गाँव में एक कुत्ता रहता था। एक दिन उसे कहीं से रोटी का एक टुकड़ा मिला। वह मुँह में रोटी का टुकड़ा दबाकर एक छोटे$-$से पुल पर से जा रहा था। पुल के नीचे पानी था। कुत्ते ने पानी में अपनी परछाई देखी। परछाई देखकर उसे लगा कि पुल के नीचे दूसरा कुत्ता खड़ा है और उसके मुँह में भी रोटी का | टुकड़ा है। रोटी का टुकड़ा देखकर उसके मुँह में पानी भर आया। उस कुत्ते से रोटी छीनने के लिए उसने अपना मुँह खोला। मुँह खुलते ही रोटी का टुकड़ा नीचे पानी में गिर गया | लालच में आकर मूर्ख कुत्ते ने अपनी रोटी भी गँवा दी। सच है, लालच बुरी बला हैं।
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Question 94 Marks
खट्टे अंगूर
एक लोमड़ी $-$ भूख लगना$-$भोजन की खोज $-$ दूर दूर भटकना $-$एक बाग में जाना $-$ अंगूर के गुच्छे $-$ खुश $-$ उछलकूद करना $-$ निष्फलता$-$ 'अंगूर खट्टे हैं'।
Answer
एक जंगल था। जंगल में कई जानवर रहते थे। उस जंगल में एक लोमड़ी भी रहती थी। एक दिन लोमड़ी को बहुत भूख लगी। उसे कुछ खाने को न मिला। खाने की खोज में वह दूर दूर निकल गई । रास्ते में एक बगीचा आया। बगीचे में अंगूरों के गुच्छे थे। पके$-$पके अंगूर देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी आया। अंगूर पाने के लिए लोमड़ी उछलने लगी। लेकिन अंगूरों के गुच्छे बहुत ऊँचाई पर थे। ऊँचाई के कारण लोमड़ी अंगूरों के गुच्छे तक न पहुँच पाई। अंगूर पाने के लिए उसने कई बार प्रयत्न किया। लेकिन वह असफल रही। वह थककर चूर हो गई। अनेक प्रयत्न करने पर भी उसे अंगूर का एक दाना भी न मिला। वह मन ही मन बोली कि ये अंगूर तो बहुत खट्टे हैं। ऐसे खट्टे अंगूर मैं खाना नहीं चाहती।
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Question 104 Marks
अंधा और लँगड़ा
दो भिखारी $-$ एक अंधा $-$ दूसरा लंगडा $-$ दोनों असमर्थ $-$ दोनों का मिलना $-$ लंगड़े का अंधे के कंधे पर बैठना $-$ दोनों को लाभ $-$ बोध।
Answer
एक गाँव था। उसमें दो भिखारी रहते थे। एक अंधा था और दूसरा लँगड़ा था। दोनों चलने$-$फिरने में असमर्थ थे। अंधा देख नहीं सकता था, लँगड़ा चल नहीं सकता था। दोनों कुछ भी काम नहीं कर सकते थे। इसलिए वे भूखों मरते थे। एक बार संयोग से दोनों आपस में मिल गए। दोनों ने अपनी$-$अपनी आपबीती सुनाई। दोनों ने सोचा कि यदि हम मिलकर रहे तो हमारा काम बन सकता है। अंधे ने लँगड़े को अपने कंधे पर बिठाया। लँगडा रास्ता बताता जाता था। उसके कहे अनुसार अंधा आगे चलता था। इस प्रकार वे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने$-$आने लगे। दोनों का काम चल पड़ा। वे एक$-$दूसरे को पाकर सुखी हुए। सच है, मेल में बड़ी शक्ति होती हैं ।
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Question 114 Marks
एकता की शक्ति
एक बूढ़ा किसान $-$ चार बेटे$-$ आपस में वैरभाव $-$ बूढ़ा मृत्युशय्या पर – चिंता $-$ बेटों को बुलाना $-$ लकड़ियों का प्रकार गट्ठर तोड़ने के लिए कहना, सभी असफल $-$ लकड़ियाँ अलग $-$ अलग करके तोड़ने को कहना, सभी सफल $-$ सीख।
Answer
एक गाँव में सुजान नाम का एक बूढ़ा किसान रहता था। उसके चार बेटे थे। उनमें आपस में एकता नहीं थी। वे छोटी छोटी बात पर लड़ाई $-$ झगड़ा करते रहते थे। सुजान उन्हें बहुत समझाता, पर उन पर कोई असर नहीं होता था। एक बार बूढ़ा सुजान बीमार पड़ा। धीरे$-$ धीरे उसकी बीमारी में एक बढ़ती गई। अपनी मृत्यु का समय आ पहुँचा है, यह जानकर उसे अपने बेटों के बारे में बड़ी चिंता हुई। संयोग से उसे एक तरकीब सूझी। उसने सभी बेटों को बुलाया। फिर उसने पतली पतली लकड़ियों का एक गट्ठर मँगवाया। उसने अपने बेटों से कहा, "इस गट्ठर की लकड़ियों को एकसाथ तोड़ो।" सभी ने कोशिश की, पर गट्ठर किसी से नहीं टूट सका । इसके बाद बूढ़े किसान ने गट्ठर को खोलकर सभी बेटों एक एक लकड़ी दी और उसे तोड़ने के लिए कहा, इस बार सभी ने आसानी से एक$-$एक लकड़ी को तोड़ डाला। तब बूढ़े सुजान ने बेटों से पूछा, "बताओ, पहले इस गट्ठर को तुम क्यों नहीं तोड़ सके ?" बेटों ने कहा, "वह संगठित था, बँधा हुआ था।" बूढ़े पिता ने कहा, "मेरे प्यारे बच्चों, यदि तुम चारों भाई भी इस गट्ठर की तरह संगठित रहोगे, तो कोई तुम्हारा बाल भी बाँका नहीं कर सकेगा। किन्तु यदि लड़ते$-$झगड़ते रहोगे तो अलग$-$अलग लकड़ी की तरह टूटकर नष्ट हो जाओगे " सभी भाइयों ने उसी समय मिल$-$जुलकर प्रेम से रहने की प्रतिज्ञा की।
सीख $:$ सचमुच, एकता में बड़ी शक्ति है।
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Question 124 Marks
एक था शेर। उसे अपनी ताकत पर बड़ा घमंड था। जंगल के प्राणियों ने उसको सबक सिखाने की बात सोची। छोटी चींटी बोली, “'मैं शेर का घमंड उतार दूँगी।.......... !!(अब आप इस कहानी को आगे बढ़ाइए और बताइए कि चींटी ने शेर का घमंड कैसे उतारा होगा?
Answer
एक था शेर। उसे अपनी ताकत पर बड़ा घमंड था। जंगल के प्राणियों उसे सबक सिखाने की बात सोची। छोटी चींटी बोली, ''मैं शेर का घमंड उतार दूँगी।चींटी अपने बिल में गई और वहाँ से बहुत-सी चींटियों को ले आई। शेर जहाँ सो रहा था, वहाँ जाकर सभी चींटियाँ शेर के शरीर पर चढ़ गई। वे उसके पेट, पीठ और टाँगों में बुरी तरह काटने लगीं। शेर उन्हें अपने पंजों से मारने की कोशिश करता था, तब वे उसके बालों में छिप जाती थीं। थोड़े ही समय में शेर आकुल- व्याकुल हो गया, उस चींटी ने उससे कहा, “वनराज, इन चींटियों से परेशान होना आपको शोभा नहीं देता। आपको तो अपनी ताकत पर बहुत घमंड है न?'' शेर ने कहा, “'चींटी बहन, मैंने तुमसे हार मान ली। अब मैं कभी अपनी ताकत पर घमंड नहीं करूँगा। मैं शेर हूँ तो तुमने सवाशेर बनकर दिखा दिया।जंगल के प्राणियों ने खुश होकर चींटी का विजय-जुलूस निकाला |
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Question 134 Marks
एक निर्दयी राजा $-$ गुलाम को दंड$-$ गुलाम का जंगल में भाग जाना $-$ सिंह से भेंट $-$ सिंह के पैर से काँटा निकालना $-$ मित्रता $-$ गुलाम की. गिरफ्तारी $-$ मौत की सजा $-$ उसे भूखे सिंह के सामने छोड़ना $-$ सिंह का स्नेहपूर्ण व्यवहार $-$ दोनों की रिहाई $-$ सीख
Answer
कृतज्ञता अथवा सिंह और गुलामग्रीस देश का एक राजा बहुत निर्दयी था। उसके यहाँ अनेक गुलाम थे। वह उनसे सख्त मजदूरी करवाता था।एक बार एक गुलाम ने चोरी से एक फल खा लिया। गुलाम अभी लड़का ही था, फिर भी राजा ने उसे कठोर दंड देने का निश्चय किया। दंड के भय से वह गुलाम जंगल में भाग गया। वहाँ एक झाड़ी में छिपकर बैठ गया।झाड़ी में बेठे गुलाम लड़के ने एक सिंह के कराहने की आवाज सुनी। लड़का झाड़ी से निकलकर सिंह के पास आया। उसे लगा कि सिंह के पेर में कुछ तकलीफ है। उसने सिंह के पैर का दायाँ पंजा उठाकर देखा। उसमें एक बड़ा काँटा घुस गया था। लड़के ने धीरे से वह काँटा निकाल दिया। सिह की पीड़ा दूर हो गई। इसके बाद दोनों में मित्रता हो गई।गुलाम लड़के को पकड़ने के लिए राजा के सिपाही चारों ओर घूम रहे थे। उन्होंने लड़के को जंगल में देख लिया। वे उसे गिरफ्तार कर राजा के सामने ले गए। राजा ने लड़के को मौत की सजा सुनाते हुए कहा, “इसे भूखे सिंह के सामनेडाल दिया जाए।' जंगल से सिंह को पकड़कर लाया गया। उसे कई दिनों तक भूखा रखा गया। फिर एक दिन लड़के को उसके पिंजड़े में बंद कर दिया। भूखा सिंह उस लड़के को खाने के लिए झपटा, परंतु एकदम रुक गया। वह उस लड़के के पैर चाटने लगा। वास्तव में यह वही सिंह था, जिसके पेर से उस लड़के ने काँटा निकाला था।लड़के के प्रति सिंह के स्नेहपूर्ण व्यवहार ने सबको चकित कर दिया। राजा भी इससे बहुत प्रभावित हुआ। उसने कहा, “जब जंगल का राजा इस लड़के के प्रति दयालु है, तो मुझे भी इस पर दया करनी चाहिए।'” ऐसा सोचकर उसने लड़के को क्षमा कर दिया। उसने सिंह और लड़के को गुलामी के बंधन से मुक्त कर दिया।
सीख $:$ सचमुच, खूंखार पशु भी अपने साथ किए गए उपकार को नहीं भूलते।
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Question 144 Marks
एक ब्राह्मण स्त्री $-$ नेवला पालना$-$पानी भरने को बाहर जाना $-$ लोटने पर नेबले का खून से लथपथ मुँह देखना $-$ बच्चे की हत्या की शंका $-$ नेवले पर घड़ा पटकना $-$ बच्चे को जिंदा पाना$-$पास ही एक मरा हुआ साँप पाना $-$ पछतावा सीख ।
Answer
नासमझी और जल्दबाजी का नतीजा अथवा अविचार का परिणामकिसी गाँव के बाहर स्वच्छ पानी का एक नाला बहता था। नाले से थोड़ी दूरी पर ही एक घर था। उसमें एक छोटा$-$सा ब्राह्मण$-$परिवार रहता था $-$ ब्राह्मण, ब्राह्मणी और एक बच्चा। ब्राह्मणी ने एक नेवला पाल रखा था। नेवला जितना हट्टा$-$कट्टा था, उतना ही स्वामिभकत भी था।एक दिन ब्राह्मणी नाले से पानी भरने के लिए बाहर गई। घर में उसका छोटा बच्चा अकेला था। वह पालने में सो रहा था। ब्राह्मणी ने नेवले को समझाया था कि वह बच्चे का ध्यान रखे। उसी समय एक साँप घर में घुस आया। वह पालने भ॑ सोए हुए बच्चे की ओर जाने लगा। नेवला साँप को देखते ही तेजी से दौड़ा और साँप पर टूट पड़ा। साँप को मारकर वह घर से बाहर आया।उसी समय ब्राह्मणी पानी भरकर लोटी। उसने दूर से नेवले का खून से लथपथ मुंह देखा। उसने सोचा कि उसकी गेरहाजिरी में नेवले ने उसके बच्चे को मार डाला है। वह एकदम आपे से बाहर हो गई। उसने पानी से भरा घड़ा नेवले पर पटका। नेवला वहीं ढेर हो गया।ब्राह्णणी जब घर के भीतर पहुँची तो उसने देखा कि उसका बच्चा सो रहा था। उसके पालने के पास मरा हुआ सॉप पड़ा था। यह देखकर ब्राह्म सारी बात समझ गई। अपने बालक को बचानेवाले नेवले को मार डालने का उसे बड़ा दुःख हुआ।
सीख $:$ बिना सोचे$-$समझे कोई काम करने से पछताना पड़ता है।
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Question 154 Marks
मौसम में ठंडक बढ़ने लगी थी। माँ सोचने लगी कि इस साल ढेर सारे स्वेटर बनाकर बेचने हैं, जिससे अंकित की दसवीं कक्षा की फीस और पढ़ाई का खर्च निकाला जा सके। अंकित के पापा नहीं थे। एक बड़ी बहन थी। अंकित अपने घर में समृद्धि लाने के लिए प्रतिदिन सोचता रहता है।
Answer
गर्मी की छुट्टियाँ थीं। अंकित अपने मामा के घर मुंबई आया हुआ था। उन दिनों टीवी पर “कौन बनेगा करोडपति?' कार्यक्रम चल रहा था। मामा के प्रोत्साहन और सहायता से अंकित ने 'के. बी. सी” के संचालकों से संपर्क किया। भाग्य ने उसका साथ दिया और एक दिन उसे कार्यक्रम की 'होट सीट' पर बैठने का मौका मिल गया! अंकित के सामने बैठे थे बोलीवूड के महानायक अमिताभ बच्चन! उन्होंने दर्शकों को अंकित का परिचय दिया। फिर शुरू हुई प्रश्ममालिका। अंकित खुश था और घबरा भी रहा था! लेकिन वह स्वस्थ रहा।     
अंकित ने उनके प्रश्नों के सही उत्तर दिए। भाग्य ने उसका साथ दिया। वह पच्चीस लाख रुपये तक पहुँच गया। अगले प्रश्न का उत्तर उसे न सूझा। उसकी चारों लाइफ लाइनें खत्म हो चुकी थीं। अंकित ने गेम से 'क्वीट' करने का निश्चय किया। अमिताभ बच्चन के हाथों पच्चीस लाख का चेक पाकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।     
अब अंकित की माँ को ढेर सारे स्वेटर बनाने ओर अंकित की पढ़ाई का खर्च निकालने की चिता नहीं करनी पड़ेगी।
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Question 164 Marks
एक नगर में दो स्त्रियाँ$-$एक ही बालक के लिए दावेदार$-$ आपस में तकरार $-$मामला न्यायाधीश के समक्ष $-$ दोनों की बातें सुनना $-$ न्याय करना $-$ बालक के दो टुकड़े करके बाँट लो $-$ एक स्त्री मौन$-$ दूसरी का रोकर कहना$-$ बच्चे को न काटो $-$ उसे ही दे दो$-$ न्यायाधीश का फैसला $-$ रोती हुई स्त्री को बालक सौंपना।
Answer
सच्ची माँ अथवा न्यायाधीश का फैसला किसी नगर में दो स्त्रियाँ पास$-$पड़ोस में रहती थी। उममें एक स्त्री बड़ी चालाक और झगड़ालू थी। उसके कोई संतान नहीं थी। दूसरी स्त्री बड़ी सरल और मिलनसार थी। उसके एक बेटा था। एक बार संतानवाली स्त्री अपने बच्चे को घर में अकेला छोड़कर बाहर गई हुई थी। मौका पाकर नि:संतान स्त्री बच्चे को पालने से उठाकर ले गई। फिर वह फौरन, बाहर चली गई। बच्चे के गुम हो जाने पर बच्चे की माँ बहुत दुःखी हुई। उसने किसी तरह अपनी चोर पड़ोसिन का पता लगाया और उसके पास जाकर अपना बच्चा माँगा। तब उसने कहा, “यह मेरा बेटा है। मैं न दूँगी, जो चाहे सो कर ले।” दोनों में खूब झगड़ा हुआ। तब लोगों ने उन्हें न्यायालय में जाकर झगड़े का निपटारा करने की सलाह दी। आखिर दोनों स्त्रियाँ न्यायाधीश के पास पहुँचीं। बच्चे पर दोनों का एक$-$सा दावा देखकर न्यायाधीश ने अपने कर्मचारी को आदेश दिया, “इस बच्चे के दो बराबर टुकड़े करो और एक$-$एक दोनों स्त्रियों को दे दो। न्यायाधीश का फैसला सुनकर निःसंतान स्त्री तो चुप रही, पर बच्चे की माँ रोकर कहने लगी, “हुजूर आप बच्चे को मारिए मत। चाहे तो उसे ही सोंप दीजिए। इस तरह मेरा बेटा जीवित तो रहेगा।'' चतुर न्यायाधीश फौरन समझ गया कि दोनों में सच्ची माँ कौन है। उसने सच्ची माता को उसका बच्चा सौंप देने और नि:संतान स्त्री को हिरासत में लेने का हुक्म दिया।
सीख $:$ आखिर सत्य की ही विजय होती है।
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लेखन – कहानी - Hindi STD 8 Questions - Vidyadip