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युग और मैं question types

74 questions across 10 question groups — pick any mix to generate a Hindi paper with step-by-step answer keys.

74
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Sample Questions

युग और मैं questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

जाने कब तक घाव भरेंगे इस घायल मानवता के?
जाने कब तक सच्चे होंगे सपने सब की समता के?
सब दुनिया पर व्यथा पड़ी है, मेरी ही क्या बड़ी व्यथा!
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मानव को ईश्वर बनना था, निखिल सृष्टि वश में लानी,
काम अधूरा छोड़कर रहा आत्मघात मानव ज्ञानी।
सब झूठे हो गये, निशाने, तुम मुझसे छूटे तो क्या !
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उजड़ रहीं अनगिनत बस्तियाँ, मन, मेरी ही बस्ती क्या !
धब्बों से मिट रहे देश जब, तो मेरी ही हस्ती क्या!
बरस रहे अंगार गगन से, धरती लपटें उगल रही,
निगल रही जब मौत सभी को, अपनी ही क्या जाय कही?
दुनियाँ भर की दुःख कथा है, मेरी ही क्या करुणा कथा !
जाने कब तक घाव भरेंगे इस घायल मानवता के ?
जाने कब तक सच्चे होंगे सपने सब की समता के ?
सब दुनिया पर व्यथा पड़ी है, मेरी ही क्या बड़ी व्यथा !
खौल रहे हैं सात समुन्दर, डूबी जाती है दुनिया
ज्ञान थाह लेता था जिस से, गर्क हो रही वह दुनिया !
डूब रही हो सब दुनिया, जब, मुझे डूबता गम तो क्या
1. धब्बों की तरह क्या मिट रहा है?
2. धरती-अंबर की क्या स्थिति है?
3. इस काव्य में कवि का कौन-सा भाव प्रकट हुआ है?
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