Question
अनुशासन का महत्त्व 

Answer

अनुशासन का अर्थ-अनुशासन शब्द 'अनु' व 'शासन' इन दोनों शब्दों के मेल से बना है। 'अनु' का अर्थ है पीछे या अनुकरण तथा 'शासन' का अर्थ है-व्यवस्था, नियंत्रण अथवा संयम। इस प्रकार अनुशासन का शाब्दिक अर्थ हुआ नियंत्रण एवं संयमपूर्वक रहना।

अनुशासन सफलता की कुंजी-अनुशासन जीवन के विकास और सफलता की कुंजी है। इसलिए अनुशासन सभी के लिए जरूरी है। चाहे वह नागरिक हो, नेता हो, नौकरी पेशा हो, या विद्यार्थी हो । अनुशासन से देश चलता है, विकास और उन्नति होती है। प्रकृति में अनुशासन-प्रकृति भी एक अनुशासन से बंधी है। समय पर सूर्य उदित व अस्त होता है। एक-क्रम में ऋतुएँ आती-जाती हैं। ज्वार-भाटा के बीच भी सागर मर्यादित रहता है। एक निश्चित गति से पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है।

यदि एक क्षण के लिए भी यह व्यवस्था शिथिल हो जाए तो सृष्टि में महाप्रलय का दृश्य उपस्थित हो जाए। समाज और राष्ट्र में अनुशासन-प्रकृति की यह बात व्यक्ति, समाज और राष्ट्र पर भी लागू होती है। अनुशासनहीन व्यक्ति न तो अपना भला कर सकता है न समाज अथवा राष्ट्र का। समाज के नियमों को मानना सामाजिक अनुशासन है। यदि उनका पालन न किया जाए तो सर्वत्र अराजकता फैल सकती है। युद्ध-क्षेत्र में तो अनुशासन का महत्त्व सबसे बढ़कर है।

उपसंहार-अनुशासन एक ऐसी प्रवृत्ति या संस्कार है जिसको अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सकता है। इससे अनेक गुणों का विकास होता है। अनुशासन से ही राष्ट्र की प्रगति होती है। इसलिए अनुशासन एक ओर बंधन है तो दूसरी ओर मुक्ति भी।

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