संगठन में पर्यवेक्षण का महत्त्व पर्यवेक्षण किसी भी संगठन में नियन्त्रण का एक प्रमुख आधार व माध्यम माना जाता है। इसे निर्देशन में मुख्य तत्त्व के रूप में सम्मिलित किया जाता है। पर्यवेक्षण का उद्देश्य संगठन में समन्वय स्थापित करना तथा यह देखना होता है कि संगठन में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा वही किया जा रहा है जो उसे दिया गया है। संगठन में पदसोपान, प्रत्यायोजन, संचार तथा नियंत्रण आदि सभी पर्यवेक्षण के बिना अधूरे ही हैं। पर्यवेक्षण का महत्त्व तब और बढ़ जाता है जबकि उत्तरदायित्व किसी एक का हो और कार्य किसी दूसरे के द्वारा कराया जा रहा हो। सही ढंग से पर्यवेक्षण व्यवस्था नहीं होने पर संगठन का क्रमशः ह्रास होने लगता है। संगठन अपने उद्देश्यों को ठीक से प्राप्त नहीं कर सकता है।
संक्षेप में, पर्यवेक्षण के महत्त्व को पर्यवेक्षक द्वारा निभायी गई विभिन्न भूमिकाओं द्वारा अग्र प्रकार से समझाया जा सकता है-
1. कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शक, मित्र तथा दार्शनिक के रूप में कार्य करना-पर्यवेक्षक प्रतिदिन कर्मचारियों के सम्पर्क में रहता है तथा उनसे मित्रतापूर्ण सम्बन्ध बनाये रखता है। एक अच्छा पर्यवेक्षक कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शक, मित्र तथा एक दार्शनिक के रूप में कार्य करता है।
2. प्रबन्धक तथा कर्मचारियों के मध्य एक कड़ी के रूप में कार्य करना-पर्यवेक्षक प्रबन्धक तथा कर्मचारियों के मध्य एक कड़ी के रूप में कार्य करता है। वह एक तरफ कर्मचारियों को प्रबन्ध के विचारों से अवगत कराता है, दूसरी तरफ कर्मचारियों की समस्याओं को प्रबन्ध के सामने रखता है। पर्यवेक्षण द्वारा निभायी गई यह भूमिका प्रबन्धकों तथा कर्मचारियों के बीच किसी भी गलतफहमी को नहीं आने देती तथा उनके मध्य किसी प्रकार के द्वन्द्व से भी बचाव करती है।
3. सामूहिक एकता बनाये रखना-पर्यवेक्षक अपने अधीनस्थ श्रमिकों में जो उसके नियंत्रण में हैं उनमें सामूहिक एकता को बनाये रखने में एक मुख्य भूमिका निभाता है। पर्यवेक्षण आन्तरिक मतभेदों को निपटाता है तथा श्रमिकों में तालमेल बिठाकर रखता है।
4. कर्मचारियों के कार्य का निष्यादन सुनिश्चित करना-पर्यवेक्षक का महत्त्व इस रूप में भी है कि वह निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्य का निष्पादन सुनिश्चित करता है। वह कार्य पूरा करने का उत्तरदायित्व अपने ऊपर लेता है तथा अपने श्रमिकों को प्रभावपूर्ण तरीके से अभिप्रेरित करता है।
5. कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना-पर्यवेक्षक कार्य-स्थल पर ही कर्मचारियों तथा श्रमिकों आदि को प्रशिक्षित करता है। एक कुशल एवं योग्य पर्यवेक्षक ही कार्य-कुशल श्रमिकों को तैयार करता है।
6. कर्मचारियों में उच्च मनोवृत्ति का विकास करना-पर्यवेक्षक नेतृत्व संगठन के कर्मचारियों एवं श्रमिकों को प्रभावित करने में एक मुख्य भूमिका निभाता है। एक पर्यवेक्षक अपने नेतृत्व के गुणों के कारण अपने कर्मचारियों तथा श्रमिकों के मध्य उच्च मनोवृत्ति का विकास कर सकता है।
7. कर्मचारियों की कार्यकुशलता के विकास के लिए सुझाव देना व तरीके बतलाना-एक अच्छा पर्यवेक्षक कार्य निष्पादन का विश्लेषण करता है तथा अपनी सलाह अथवा प्रतिपुष्टि (फीड बैक) श्रमिकों को देता है। वह कार्यकुशलता के विकास के लिए उन्हें सुझाव तथा तरीके बताता है।