Question
तुम्हारी दया से ही मैं $................$ में संलग्न हो सका।

Answer

स्वप्रयत्न

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सुनीता को‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ और प्रकृति प्रेम जैसे गुण सहज प्राप्त हुए हैं।(उ‌द्योगों, तेजस्विता, लेखिका, प्रेरणादायक, पर्यावरण, निर्भीकता)
खान, पान, सम्मान, राग $................$ मनहि न भावै।
सुनहरे रंग की $................$ की गाँठ के समान उसका कोमल लघु शरीर था।
एक दिन रात्रि में‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ने वृक्ष के नीचे से सारा धन चुरा लिया।(पापबुद्धि, धन, निर्धनता, दोषारोपण, कपर, बुद्धिमत्ता, खोखले, देवता)
ब्रिटिश सरकार ने उनकी योग्यता से प्रभावित होकर‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾विश्वविद्यालय में प्रोफेसर का पद दिया।(कुलपति, शिक्षक दिवस, धाराप्रवाह, अध्यापक, वेल्लौर, कोलकाता, ऑक्सफोर्ड)
चारों ओर बिजली के‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾नाच रहे थे।(पथ्य, लट्टू, संपूर्णता, शरबत, हावड़ा, वाचालता)
पर मेरी दृष्टि $................$ को खोजने लगी।
मैं तो इस ____________ को छोड़कर नहीं जाऊँगा।(दीवार, नगरी, शुभ, मशक, इंतजाम)
कई वर्षों तक वे तपस्या और $................$ की साधना में लगे रहे।
कही सो $................$ होति किन भाई।