चीन के महान दार्शनिक संत ताओ बू बीन के पास चुगसिन नामक एक व्यक्ति पहुँचा, उसने उनसे धर्म की शिक्षा देने की प्रार्थना की, संत ताओ बू ने उस व्यक्ति को कुछ समय तक अपने पास रखा और उसे दीन-दुखियों की सेवा में लगा दिया, कुछ समय बाद चुगसिन ने संतजी से निवेदन किया, "महाराज इतने दिन हो गए, आपने मुझे धर्म की शिक्षा नहीं दी, संत ने कहा, "तेरा तो जीवन ही धर्ममय हो गया है, फिर में धर्म के विषय में तुझे क्या बताता? तू अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठापूर्वक करता है, तुझसे बड़ा धार्मिक कौन होगा?" चुगसिन समझ गया, आप भी समझ गए होंगे कि कर्तव्य का पालन ही जीवन में सर्वोपरि है, चाहें तो हम उसे मानव का परम धर्म कह सकते हैं।
हमारे युवा पाठकों में प्रायः प्रत्येक किसी-न-किसी परीक्षा के लिए तैयारी का संकल्प करते है। क्या आप में प्रत्येक को विश्वास है कि वह पूरी निष्ठा के साथ परीक्षा या प्रतियोगिता के संदर्भ में अपने कर्तव्य का पालन कर रहा रही है? परीक्षा की तैयारी के अतिरिक्त आपके लिए अन्य कोई कार्यक्रम महत्त्व नहीं रखता है, कुछ ऐसे छात्र-छात्राएं देखने में आते हैं जो घर से पढ़ने के लिए कॉलेज आते हैं परन्तु वे कक्षाओं में न जाकर मटरगश्ती करते हैं, अथवा कैण्टीन में बैठकर दोस्तों के साथ बातें करते हैं। तब क्या वे अपने कर्तव्य की अवहेलना, एवं माता-पिता के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं? हम चाहते हैं कि हमारे युवा पाठक शांत चित्त से विचार करके देखें कि वे उक्त श्रेणी के अनुत्तरदायी वर्ग के अन्तर्गत तो नहीं आते हैं, परीक्षा एवं प्रतियोगिता में असफल होने के मूल में प्रायः हमारे युवावर्ग द्वारा पूरी तरह से अपने कर्तव्य का पालन न करना होता है, वे यदि अपने कर्तव्य का पालन पूरी निष्ठा के साथ करें, तो हम पूरी दृढ़ता के साथ कह सकते हैं कि उनकी सफलता की संभावनाएँ कई गुना बढ़ जाएँगी।
कर्तव्य-पालन के संदर्भ में यह नहीं सोचना चाहिए कि यदि सफलता नहीं मिलती है, तो क्या होगा? कर्तव्य-पालन को लक्ष्य करके हमारे मन-मस्तिष्क में एक ही विचार रहना चाहिए कि मैं इसका सम्यक निर्वाह एवं पालन किस प्रकार कर सकता हूँ?
1. ताओ ने चुगासिन को सबसे बड़ा धार्मिक क्यों कहा?
(क) क्योंकि चुगसिन पहले से ही धार्मिक था।
(ख) क्योंकि चुगसिन कर्तव्यों का पालन निष्ठापूर्वक करता था।
(ग) क्योंकि चुगसिन आश्रम का सारा काम करता था।
(घ) क्योंकि चुगसिन ताओ की सेवा करता था।
2. कर्तव्य पालन पूरी निष्ठा के साथ करने से सफलता अवश्य प्राप्त होती है, केसे?
(क) क्योंकि मन मस्तिष्क में एक ही ध्येय रहता है।
(ख) क्योंकि हम अधिक प्रयास करते हैं।
(ग) क्योंकि मन में हार का भय रहता है।
(घ) क्योंकि मन हमें शक्ति देता रहता है।
3. मानव का परम धर्म किसे कहा गया है?
(क) दीन-दुखियों की सेवा करना
(ख) गुरु की सेवा करना
(ग) माता पिता का आदर करना
(घ) निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्य का पालन करना
4. कर्तव्य के प्रति निष्ठा व्यक्ति के चरित्र को निरुत्तर कर देती है। उदाहरण द्वारा उत्तर की पुष्टि कीजिए।
5. क्यों कहा गया हे कि कुछ विद्यार्थी माता-पिता के साथ छल करते हैं?