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पूरक पाठ्यपुस्तक प्रश्नो (4M)

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Question 14 Marks
'साना-साना हाथ जोडि' पाठ में प्रदूषण के कारण हिमपात में कमी पर चिंता व्यक्त की गई हे। प्रदूषण के ओर कोन-कोन से दुष्परिणाम सामने आए हें? हमें इसकी रोकथाम के लिए क्या करना चाहिए?
Answer
लेखिका लाचुग नामक स्थान पर हिमपात का आनंद लेने की आशा से पहुंची थीं, किन्तु वहाँ बर्फ को कहीं पता न था। उन्हें एक सिकि कमी युवक ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने से स्रोफॉल (बर्फ गिरना) में कमी आ गई है। अब बर्फ आपको कटाओ में ही मिलेगी। बढ़ते प्रदूषण के फलस्वरूप अनेक संकट ओर दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। तापमान में वृद्धि होने से पर्वतों पर हिमपात कम होता जा रहा है और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, इससे नदियों में जल की मात्रा कम होती जा रही हे। जल, वायु, भूमि सभी प्रदूषण के ज़हर से प्रभावित हो रहे हें। पेड़ काटने से कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन का संतुलन बिगड़ गया हे। न पीने को शुद्ध जल है, न साँस लेने को शुद्ध वायु । लोग अनेक बीमारियों से ग्रस्त और त्रस्त हो रहे हैं। केंसर, टी. बी.,मधुमेह, मानसिक तनाव ओर रक्तचाप में वृद्धि आदि से पीड़ित लोगों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। मीसम चक्र बदल रहा है जिसके परिणाम स्वरूप फसलों की पैदावार में कमी आ रही हे। प्राकृतिक आपदाओं ने जोर पकड़ रखा है जिसके कारण मनुष्य को धन जन की हानी का सामना करना पढ़ रहा है। वाहनों के बेतहाशा बढ़ते जाने से वायुमण्डल तो विषाक्त हो ही रहा है, लोग मानसिक गड़बड़ी नींद न आना और बहरेपन के शिकार भी हो रहे हैं। वृक्षों की कटाई को रोकना चाहिए। साथ ही अधिकाधिक वृक्षारोपण करना चाहिए तथा प्राकृतिक स्थलों पर गंदगी नहीं फैलानी चाहिए। कम से कम वाहनों का प्रयोग करना चाहिए जिससे प्रदूषण कम बढ़ेगा। नदियां आदि में गंदे नाले अपशिष्ट पदार्थों को बहाना बंद करवाएं। प्लास्टिक का भी कम से कम प्रयोग करके हम अपनी प्रकृति को सुरक्षित रख सकते हैं। जागरूकता पैदा कर लोगों को पर्वतीय स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रेरित करना चाहिए तथा नवयुवकों के द्वारा जनजागरण के कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।
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Question 24 Marks
मैं क्यों लिखता हूँ? पाठ के लेखक ने अपने लिखने का क्या कारण बताया है?
Answer
लेखक 'अजेय' जी ने 'में क्यों लिखता हूँ? के उत्तर में कहा है कि वह अपने मन की विवशता को पहचानते हैं। अतः वह लिखकर उससे मुक्ति पाना चाहते हैं। वह इसलिए भी लिखना चाहते हैं, ताकि स्वयं को जान और पहचान सकें। उनके मन में जो विचारों की छटपटाहट व बेचेनी होती है।
उससे मुक्ति पाने के लिए वे लिखना चाहते हैं। वे यह भी जानते हैं कि कई बार व्यक्ति प्रसिद्धि पाने, धन अर्जन करने व संपादक की विवशता या दवाब के कारण भी लिखता है। पर वे स्वयं की पहचान करके व अपने विचारों को तटस्थ रखकर सबके समक्ष प्रस्तुत करने व आत्मसंतुष्टि के लिए लिखते हैं।
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Question 34 Marks
ऐसा क्यों होता है कि विपत्ति के समय बच्चा पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है? सोदाहरण समझाइए।
Answer
बच्चे को हृदयस्पर्शी स्लेह की पहचान होती है। बच्चे को विपदा के समय अत्यधिक ममता और स्रेह की आवश्यकता थी। भोलानाथ का अपने पिता से अपार स्नेह था। वह अपने समस्त कार्य पिता के साथ करता है कितु साँप को देखकर भयभीत होकर पिता के बुलाने के बावजूद भी वह माँ की गोद में ही शरण लेता हे। उस समय उसे जो शांति व प्रेम की छाया अपनी माँ की गोद में जाकर मिली वह शायद उसे पिता से प्राप्त नहीं हो पाती। ऐसे में माँ उसे विश्वसनीय और आत्मीय लगती हे और माँ के आँचल में बच्चा स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है।
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