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पूरक पाठ्यपुस्तक प्रश्नो (3M)

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Question 13 Marks
समाज में समरसता बनाए रखने के लिए टोपी ओर इफ़फ़न जैसे पात्रों का होना आवश्यक है। तर्क देकर पुष्टि कीजिए।
Answer
समाज में समरसता बनाए रखने के लिए टोपी ओर इफ़फ़न जेसे पात्रों का होना आवश्यक है। इसके लिए निम्न तर्क दिए जा सकते हैं-
पहला- इफ़्फ़न ओर टोपी जिगरी दोस्त है। दोनों आज़ाद प्रवृत्ति के हैं। अलग-अलग धर्म के होने पर भी दोनों में आत्मीयता है। दोनों एक-दूसरे के थर्मों का सम्मान करते हैं। सुख-दुख में सहभागी होते हैं तथा एक-दूसरे के मनोभावों को समझते हैं।
द्रसरा- दोनों धार्मिक सद्धावना के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। दोनों का विचार है कि प्रेम न जाने जात-पाँत, प्रेम न जाने खिचड़ी-भात। दोनों अपने प्रेम के आड़े धर्म ओर जात-पाँत को नहीं आने देते हैं। मित्रता सामाजिक सोहार्द्र में सहायक होती हे।
तीसरा- तर्क यह दिया जा सकता है कि दोनों अपने प्रेम में रहन-सहन, हैसियत व रीति-रिवाज को नहीं आने देते थे। टोपी संपन्न परिवार से था तथा इप़फ़न सामान्य परिवार से, पर इससे दोनों की मित्रता में कोई कमी नहीं थी।
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Question 23 Marks
आजकल बच्चों में अनुशासन और जीवन-मूल्यों के विकास के लिए शिक्षा व्यवस्था में कोन सी युक्तियाँ अपनाई जा रही हैं? सपनों के-से दिन पाठ के संदर्भ में अपने विचार लिखिए।
Answer
विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई युक्तियाँ इस प्रकार से हैं-पीटी साहब बिल्ला मार-मारकर बच्चों की चमड़ी तक उधेड़ देते थे। तीसरी-चोथी कक्षाओं के बच्चों से थोड़ासा भी अनुशासन भंग हो जाता, तो उन्हें कठोर सज़ा मिलती थी ताकि वे विद्यार्थी के जीवन में अनुशासन की नींव दृढ़ बना सकें। इसके साथ-साथ विद्यार्थियों को प्रोस्साहित तथा उत्साहित करने के लिए उन्हें 'शाबाशी' भी दी जाती थी। लेकिन वर्तमान में स्वीकृत मान्यताएँ इसके विपरीत हैं। शिक्षकों को आज विद्यार्थियों को पीटने का अधिकार नहीं हे इसलिए विद्यार्थी निडर होकर अनुशासनहीनता की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि आज पहले की भाँति विद्यार्थी शिक्षकों से डरते नहीं हैं। इसके लिए विद्यालय और माता-पिता दोनों जिम्मेवार हैं। बच्चों में अनुशासन का विकास करने के लिए उन्हें शारीरिक व मानासिक यातना देना उचित नहीं। उन्हें प्रेमपूर्वक नेतिक मूल्य सिखाए जाने चाहिए, जिनसे उनमें स्वानुशासन का विकास हो सके।
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Question 33 Marks
परिवार की स्वार्थपरता तथा हरिहर काका की उपेक्षा एवं उचित देखरेख न किए जाने के वर्णन को पढ़कर आपके मन पर क्या और कैसा प्रभाव पड़ता हे? अपने घर में आप ऐसी स्थिति को कैसे सँभालते?
Answer
हरिहर काका की उपेक्षा एवं उचित देखरेख न किए जाने तथा परिवार की स्वार्थपरता के वर्णन को पढ़कर हमारा मन व्यथित हो गया। इससे लगता है कि समाज में रिश्तों की अब अहमियत समाप्त होती जा रही है। परिवार ओर रिश्ते दोनों ही अपनी भूमिका छोड़ रहे हैं। उनमें स्वार्थ लोलुपता आती जा रही है। पारिवारिक सम्बन्धों से भाई-चारा समाप्त होकर स्वार्थ लिप्सा हिंसावृत्ति का रूप ले रही है जिससे सामाजिक रिश्तों में दूरियाँ आ रही हैं। हम अपने घर में ऐसी स्थिति को संभालने के लिए पहले से ही धेर्य रखते हुए कानूनी तोर पर वसीयत बनवाते। जिसमें स्पष्ट रूप से यह लिखवा देते कि खेतों से आने वाली आय का एक हिस्सा उसको मिलेगा जो उनकी सेवा करेगा। इतना ही नहीं अतिशय उद्वेग को नियंत्रित रखते हुए कोई भी निर्णय लेने में सावधानी रखते।
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पूरक पाठ्यपुस्तक प्रश्नो (3M) - Hindi - B STD 10 Questions - Vidyadip