दोपहर बाद मैंने अपने दल के दूसरे सदस्यों की मदद करने और अपने एक थरमस को जूस से और दूसरे को गरम चाय से भरने के लिए नीचे जाने का निश्चय किया। मैंने बर्फीली हवा में ही तंबू से बाहर कदम रखा। जैसे ही मैं कैंप क्षेत्र से बाहर आ रही थी मेरी मुलाकात मीनू से हुई। की और जय अभी कुछ पीछे थे। मुझे जय जेनेवा स्पर की चोटी के ठीक नीचे मिला। उसने कृतज्ञतापूर्वक चाय वगैरह पी, लेकिन मुझे और आगे जाने से रोकने की कोशिश की। मगर मुझे की से भी मिलना था। थोड़ा-सा और आगे नीचे उतरने पर मैंने की को देखा। वह मुझे देखकर हक्का-बक्का रह गया।
"तुमने इतनी बड़ी जोखिम क्यों ली बचेंद्री?"
मैंने उसे दृढ़तापूर्वक कहा, "मैं भी औरों की तरह एक पर्वतारोही हूँ, इसीलिए इस दल में आई हूँ। शारीरिक रूप से मैं ठीक हूँ। इसलिए मुझे अपने दल के सदस्यों की मदद क्यों नहीं करनी चाहिए।" की हँसा और उसने पेय पदार्थ से प्यास बुझाई, लेकिन उसने मुझे अपना किट ले जाने नहीं दिया।
(i) दल से दूसरे सदस्यों की सहायता हेतु लेखिका ने क्या करने का निश्चय किया?
क) सभी विकल्प सही है
ख) वापस नीचे जाने का
ग) ऑक्सीजन लेकर जाने का
घ)रस्सी को मजबूती से बाँधने का
(ii) लेखिका बर्फीली हवा में ही तंबू से बाहर क्यों निकली?
क)उसे वहाँ गर्मी लग रही थी
ख) उसे पीछे रह गए अपने साथियों की मदद करनी थी
ग) वह अपने साथियों को ढूँढना नहीं चाहती थी
घ) उसके साथी उससे आगे चले गए थे
(iii) जय ने लेखिका को और आगे जाने से रोकने का प्रयास क्यों किया?
क) क्योंकि आगे जाने में खतरा था
ख) इनमें से कोई नहीं
ग) क्योंकि आगे जाने मे जय का परशानी हो रही थी
घ) क्योंकि जय को लेखिका स कुछ बात करनी थी
(iv) की लेखिका को देखकर हक्का-बक्का क्यों रह गया था?
क) क्योंकि वह दुर्गम मार्ग पर साथियों की सहायता के लिए पुनः वापस आई थी
ख) क्योंकि वह काफी डरी हुई थी
ग) क्योंकि वह चाय बनाकर लाई थी
घ) क्योंकि वह अकेले दुर्गम मार्ग पर नहीं जाना चाहती थी
(v) इसलिए मुझे अपने दल के सदस्यों की मदद क्यों नहीं करनी चाहिए कथन से लेखिका के किस स्वभाव का पता चलता है?
क) साहसी होने का
ख) साहसी और परोपकारी होने का
ग) इनमें से कोई नहीं
घ) परोपकार की भावना होने का
