Question
दशहरा का मेला 

Answer

प्रस्तावना-हिन्दुओं के प्रसिद्ध एवं प्रमुख त्योहारों में दशहरा अथवा विजयादशमी का विशेष महत्त्व है। आश्विन मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से दशमी तक दशहरा का त्योहार होता है। यह अन्याय पर न्याय की जीत का त्योहार है। मनाने का कारण-दशहरा मनाने के कई कारण हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान् राम ने लंका के राजा रावण को मारकर सीताजी को मुक्त कराया था। यह शरद् ऋतु के आगमन का तथा किसानों की फसल पकने की खुशी का सूचक त्योहार भी है।
मनाने का ढंग-हमारे देश में कई स्थानों पर दशहरे के मेले लगते हैं। कोटा का दशहरा मेला भी काफी लोकप्रिय है। दशहरा से पहले जगह-जगह रामलीलाएँ होती हैं। विजयादशमी के दिन राजपूत लोग तथा सैनिक अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते हैं। साथ में शमी वृक्ष की भी पूजा की जाती है। भगवान् राम की सवारी निकलती है, उस जुलूस में कई झाँकियाँ और बैण्ड-बाजे रहते हैं।

मेले का दृश्य-हमारे कस्बे में भी दशहरे का मेला लगता है। इस दिन गाँव के बाहर रामलीला मैदान में दोपहर से ही भीड़ जमा हो जाती है। मैदान के बाहर कई दुकानें भी लग जाती हैं जिनमें खिलौने, सजावटी सामान, मिठाइयाँ तथा अन्य उपयोगी सामग्री रहती है। संध्या के समय पहले तो रावण-वध का दृश्य दिखाया जाता है।

इसके साथ ही रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के बड़े-बड़े पुतले जलाये जाते हैं, रंग-बिरंगी आतिशबाजी की जाती है और अन्त में भगवान् राम की जय-जयकार की जाती है। इस मेले में कस्बे के सभी लोग सहर्ष भाग लेते हैं। उपसंहार-दशहरा अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है। इससे हमें बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा मिलती है।

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