कह दिया- 'समय की पाबंदी’ पर एक निबंध लिखो, जो चार पत्रों से कम न हो। अब आप कापी सामने खोले, कलम हाथ में लिये, उसके नाम को रोइए। कोन नहीं जानता कि समय की पाबंदी बहुत अच्छी बात है। इससे आदमी के जीवन में संयम आ जाता है, दूसरों का उस पर स्रेह होने लगता है ओर उसके कारोबार में उन्नति होती है, लेकिन इस जरा-सी बात पर चार पन्ने कैसे लिखें? जो बात एक वाक्य में कही जा सके, उसे चार पन्ने में लिखने की जरूरत? में तो इसे हिमाकत समझता हूँ। यह तो समय की किफायत नहीं, बल्कि उसका दुरूपयोग हे कि व्यर्य में किसी बात को हूँस दिया। हम चाहते हैं, आदमी को जो कुछ कहना हो, चटपट कह दे ओर अपनी राह ले। मगर नहीं, आपको चार पत्ने रंगने पड़ंगे, चाहे जेसे लिखिए। ओर पन्ने, भी पूरे फुलस्केप आकार के। यह छात्रों पर अत्याचार नहीं तो ओर क्या हे? अनर्थ तो यह है कि कहा जाता है, संक्षेप में लिखो। समय की पाबंदी पर संक्षेप में एक निबंध लिखो, जो चार पन्नों से कम न हो। ठीक। संक्षेप में चार पन्ने हुए, नहीं शायद सो-दो सो पन्ने लिखवाते। तेज भी दोड़िये ओर धीरे-धीरे भी। है उल्टी बात या नहीं? बालक भी इतनी-सी बात समझ सकता है, लेकिन इन अध्यापकों को इतनी तमीज भी नहीं। उस पर दावा है कि हम अध्यापक है।
(i) जो बात एक वाक्य में कही जा सके, उसे चार पन्नों में लिखने की जरूरत? इस कथन के माध्यम से किस तरफ इशारा किया जा रहा है।
क) अध्यापकों की सनक
ख) छोटे भाई पर आरोप
ग) समय की पाबंदी
घ) शिक्षा व्यवस्था की कमी
(ii) छात्रों पर अत्याचार क्या है?
क) उन पर जबरदस्ती कोई काम थोपना
ख) समय की बर्बदी कराना
ग) उन्हें निबंध लिखने को कहना
घ) उन्हें कक्षा में फेल कर देना
(iii) समय की पाबंदी से क्या नहीं होता है?
क) उल्टी बात करना
ख) जीवन में संयम आना
ग) कारोबार में उन्नति होना
घ) आपके प्रति लोगों में स्रेह
(iv) समय का दुरुपयोग क्या है?
क)छात्रों पर अत्याचार
ख) परीक्षा लेना
ग) समय का सही उपयोग करना
घ) बेवजह परेशान करना
(v) अध्यापक होने का दावा गलत क्यों है?
क) कक्षा में नहीं पढ़ाने से
ख) अपने को श्रेष्ठ कहने से
ग) तमीज नहीं होने से
घ) बच्चों से भी कम अक्ल होने से