Question types

MODEL PAPER 4 question types

46 questions across 16 question groups — pick any mix to generate a Hindi - B paper with step-by-step answer keys.

46
Questions
16
Question groups
5
Question types
01

पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।(5M) ( स्पर्श भाग 2 - काव्य – खंड )

1 Q
02

पध्य पाठ प्रश्नो (2M) ( स्पर्श भाग 2 - काव्य – खंड )

4 Q
03

गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।(5M) ( स्पर्श भाग 2 - गद्य – खंड )

1 Q
04

गध्य पाठ प्रश्नो (2M) ( स्पर्श भाग 2 - गद्य – खंड )

4 Q
05

'पदबंध पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ)(1M)

5 Q
06

निर्देशानुसार रचना के आधार पर वाक्य भेद (MCQ)(1M)

5 Q
07

समास पर आधारित प्रश्नों के उत्तर (MCQ)(1M)

5 Q
08

मुहावरे पर आधारित प्रश्नों के उत्तर (MCQ)(1M)

5 Q
09

संकेत-बिंदुओं के आधार पर शब्दों में अनुच्छेद (5M))

3 Q
10

पत्र लेखन(5M)

2 Q
11

सूचना (4M)

2 Q
12

विज्ञापन (3M)

2 Q
13

ई- मेल (5M)

1 Q
14

लघुकथा (5M)

1 Q
15

गध्यांश पर आधारित (7M)

2 Q
16

पूरक पाठ्यपुस्तक प्रश्नो (3M)

3 Q
Sample Questions

MODEL PAPER 4 questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

अनंत अंतरिक्ष में अनंत देव हैं खड़े,
समक्ष ही स्वबाहु जो बढ़ा रहे बड़े-बड़े।
परस्परावलंब से उठो तथा बढ़ो सभी,
अभी अमर्त्य-अंक में अपंक हो चढ़ो सभी।
रहो न यों कि एक से न काम और का सरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

(i) अतंरिक्ष में कोन खड़े हैं?
क) सूर्य
ख) तारे
ग) नक्षत्र
घ) देवता
(ii) अतंरिक्ष में खड़े देव अपनी बाहु क्यों बढ़ा रहे हैं?
क) स्वस्थता के लिए
ख) मदद के लिए
ग) मार्गदर्शन के लिए
घ) समृद्धि के लिए
(iii) कवि मनुष्य को किस प्रकार रहने की सलाह देता है?
क) सहयोग की भावना से
ख) ईर्ष्या की भावना से
ग) हिंसा की भावना से
घ) असहयोग की भावना से
(iv) परस्परावलंब का आशय है-
क)एक-दूसरे से घृणा करना
ख) एक-दूसरे का सहयोग लेना या देना
ग) एक-दूसरे से छल-कपट करना
घ) एक-दूसरे से शत्रुता करना
(v) आकाश में देवता क्यों खड़े हें ?
क) अन्याय करने के लिए
ख) सब को देखने के लिए
ग) न्याय करने के लिए
घ) परोपकारी लोगों की प्रशंसा करने के लिए

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ज़िन्दा रहने के मोसम बहुत हैं मगर जान देने की रुत रोज़ आती नहीं। पंक्ति के माध्यम से कवि देशवासियों को क्या संदेश देना चाहते हैं? स्पष्ट कीजिए।
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कह दिया- 'समय की पाबंदी’ पर एक निबंध लिखो, जो चार पत्रों से कम न हो। अब आप कापी सामने खोले, कलम हाथ में लिये, उसके नाम को रोइए। कोन नहीं जानता कि समय की पाबंदी बहुत अच्छी बात है। इससे आदमी के जीवन में संयम आ जाता है, दूसरों का उस पर स्रेह होने लगता है ओर उसके कारोबार में उन्नति होती है, लेकिन इस जरा-सी बात पर चार पन्ने कैसे लिखें? जो बात एक वाक्य में कही जा सके, उसे चार पन्ने में लिखने की जरूरत? में तो इसे हिमाकत समझता हूँ। यह तो समय की किफायत नहीं, बल्कि उसका दुरूपयोग हे कि व्यर्य में किसी बात को हूँस दिया। हम चाहते हैं, आदमी को जो कुछ कहना हो, चटपट कह दे ओर अपनी राह ले। मगर नहीं, आपको चार पत्ने रंगने पड़ंगे, चाहे जेसे लिखिए। ओर पन्ने, भी पूरे फुलस्केप आकार के। यह छात्रों पर अत्याचार नहीं तो ओर क्या हे? अनर्थ तो यह है कि कहा जाता है, संक्षेप में लिखो। समय की पाबंदी पर संक्षेप में एक निबंध लिखो, जो चार पन्नों से कम न हो। ठीक। संक्षेप में चार पन्ने हुए, नहीं शायद सो-दो सो पन्ने लिखवाते। तेज भी दोड़िये ओर धीरे-धीरे भी। है उल्टी बात या नहीं? बालक भी इतनी-सी बात समझ सकता है, लेकिन इन अध्यापकों को इतनी तमीज भी नहीं। उस पर दावा है कि हम अध्यापक है।

(i) जो बात एक वाक्य में कही जा सके, उसे चार पन्नों में लिखने की जरूरत? इस कथन के माध्यम से किस तरफ इशारा किया जा रहा है।
क) अध्यापकों की सनक
ख) छोटे भाई पर आरोप
ग) समय की पाबंदी
घ) शिक्षा व्यवस्था की कमी
(ii) छात्रों पर अत्याचार क्या है?
क) उन पर जबरदस्ती कोई काम थोपना
ख) समय की बर्बदी कराना
ग) उन्हें निबंध लिखने को कहना
घ) उन्हें कक्षा में फेल कर देना
(iii) समय की पाबंदी से क्या नहीं होता है?
क) उल्टी बात करना
ख) जीवन में संयम आना
ग) कारोबार में उन्नति होना
घ) आपके प्रति लोगों में स्रेह
(iv) समय का दुरुपयोग क्या है?
क)छात्रों पर अत्याचार
ख) परीक्षा लेना
ग) समय का सही उपयोग करना
घ) बेवजह परेशान करना
(v) अध्यापक होने का दावा गलत क्यों है?
क) कक्षा में नहीं पढ़ाने से
ख) अपने को श्रेष्ठ कहने से
ग) तमीज नहीं होने से
घ) बच्चों से भी कम अक्ल होने से
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प्रकृति से लगाव विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए।
संकेत-बिंदु
- आवश्यकता
- प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए जरूरी
- तालमेल जरूरी
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स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत अभियान का आपके आस-पड़ोस में क्या प्रभाव दिखाई देता हे? उसकी अच्छाइयों और सीमाओं की चर्चा करते हुए किसी समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।
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आपकी परीक्षाएँ निकट हैं। आपके मोहल्ले के धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर बजता रहता है जिससे तेयारी में बाधा पहुँच रही है। इस ओर ध्यान दिलाते हुए देनिक समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।
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विद्यालय में साहित्यिक क्लब के सचिव के रूप में प्राचीर पत्रिका के लिए लेख, कविता, निबंध आदि विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत करने हेतु सूचना पट्ट के लिए एक सूचना लिखिए।
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आपकी सोसायटी में आगामी माह के अंतिम सप्ताह में नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। सोसायटी सचिव की ओर से इस जानकारी को लोगों तक पहुँचाने के लिए लगभग 80 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए। आपकी सोसायटी में आगामी माह के अंतिम सप्ताह में नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। सोसायटी सचिव की ओर से इस जानकारी को लोगों तक पहुँचाने के लिए लगभग 80 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए।
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सार्वजनिक रूप से आयोजित दावतों में अन्न की बरबादी के प्रति जागरूकता फेलाने के लिए अन्नदान-महादान विषय पर लगभग 40 शब्दों में एक आकर्षक विज्ञापन तेयार कीजिए।
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आप रूपाली /मयंक हैं। ई-मेल द्वारा बेंक प्रबंधक को अपनी पास-बुक खोने की सूचना लगभग 80 शब्दो में दीजिए।
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सत्संग से हमारा अभिप्राय उत्तम प्रकृति के व्यक्तियों की संगति से है। मानव मन में श्रेष्ठ एवं गर्हित भावनाएँ मिश्रित रूप से विद्यमान रहती हैं। कुछ व्यक्ति सहज सुतभ सदुगुणों की उपेक्षा करके कुमार्ग का अनुगमन करते हैं। उनकी संगति प्रत्येक के लिए भयंकर सिद्ध होती हे। वे न केवल अपना ही विनाश करते हैं, अपितु अपने साथ रहने तथा वार्तालाप करने वालों के जीवन और चरित्र को भी पतन अथवा विनाश के गर्त की ओर उन्मुख करते हैं। अतः ऐसे व्यक्तियों की संगति से सदेव बचना चाहिए। विश्व में प्रायः ऐसे मनुष्य ही अधिक हैं जो उत्कृष्ट ओर निकृष्ट दोनों प्रकार की मनोवृत्तियों से युक्त होते हैं। उनका साथ यदि किसी के लिए लाभप्रद नहीं होता तो हानिकारक भी नहीं होता। इसके अतिरिक्त तृतीय प्रकार के मनुष्य वे हैं जो गर्हित भावनाओं का दमन करके केवल उत्कृष्ट गुणों का विकास करते हैं। ऐसे व्यक्ति निक्ष्य ही महान प्रतिभा-सम्पन्न होते हैं। उनकी संगति प्रत्येक व्यक्ति में उत्कृष्ट गुणों का संचार करती है। उन्हीं की संगति को सस्संग के नाम से पुकारा जाता है।

1. सत्संग से लेखक का क्या अभिप्राय है?
(क) सहज सुलभ व्यक्तियों की संगति को
(ख) उत्तम प्रकृति के व्यक्तियों की संगति को
(ग) भावनाओं का दमन करने वाले की संगति को
(घ) उत्कृष्ट ओर निकृष्ट दोनों प्रकार के व्यक्तियों की संगति को
2. 'सत्संग' शब्द का संधि-विच्छेद करिए।
(क) सत् + संग
(ख) सद + संग
(ग) सच + संग
(घ) सत्य + संग
3. इस गद्यांश के अनुसार दो प्रकार की मनोवृत्तियाँ कोन सी हैं?
(क) लाभदायक और हानिकारक
(ख) उत्तम और निम्नतम
(ग) उत्कृष्ट और निकृष्ट
(घ) अच्छी ओर बुरी
4. कुमार्ग का अनुगमन करने वालों की संगति भयंकर क्यों सिद्ध होती है?
5. 'महान प्रतिभा सम्पन्न' व्यक्ति किसे कह सकते हैं?
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गीता के इस उपदेश की लोग प्रायः चर्चा करते हैं कि कर्म करें, फल की इच्छा न करें। यह कहना तो सरल है पर पालन करना उतना सरल नहीं। कर्म के मार्ग पर आनन्दपूर्वक चलता हुआ उत्साही मनुष्य यदि अन्तिम फल तक न भी पहुँचे, तो भी उसकी दशा कर्म न करने वाले की अपेक्षा अधिकतर अवस्थाओं में अच्छी रहेगी, क्योंकि एक तो कर्म करते हुए उसका जो जीवन बीता वह संतोष या आनन्द में बीता, उसके उपरांत फल के प्राप्त न होने पर भी उसे यह पछतावा न रहा कि मेंने प्रयत्न नहीं किया। फल पहले से कोई बना-बनाया पदार्थ नहीं होता। अनुकूल प्रयन्न-कर्म के अनुसार, उसके एक-एक अंग की योजना होती है। किसी मनुष्य के घर का कोई प्राणी बीमार है। वह वैद्यों के यहाँ से जब तक ओषधि ला-लाकर रोगी को देता जाता है तब तक उसके चित्त में जो संतोष रहता है, प्रत्येक नए उपचार के साथ जो आनन्द का उन्मेष होता रहता है-यह उसे कदापि न प्राप्त होता , यदि वह रोता हुआ बैठा रहता। प्रयन्न की अवस्था में उसके जीवन का जितना अंश संतोष, आशा और उत्साह में बीता, अप्रयत्न की दशा में उतना ही अंश केवल शोक ओर दु:ख में कटता। इसके अतिरिक्त रोगी के न अच्छे होने की दशा में भी वह आत्म-ग्लानि के उस कठोर दु:ख से बचा रहेगा जो उसे जीवन भर यह सोच-सोच कर होता कि मैंने पूरा प्रयत्न नहीं किया। कर्म में आनन्द अनुभव करने वालों का नाम ही कर्मण्य है। धर्म ओर उदारता के उच्च कर्मों के विधान में ही एक ऐसा दिव्य आनन्द भरा रहता है कि कर्ता को वे कर्म ही फलस्वरूप लगते हैं। अत्याचार का दमन और शमन करते हुए कर्म करने से चित्त में जो तुष्टि होती है। वही लोकोपकारी कर्मवीर का सच्चा सुख है।

1. गद्यांश में गीता के किस उपदेश की ओर संकेत किया गया है?
(क) फल पहले से कोई बना-बनाया पदार्थ नहीं होता
(ख) कहना तो सरल है पर पालन करना उतना सरल नहीं
(ग) फल के बारे में सोचें
(घ) कर्म करें फल की चिंता नहीं करें
2. "कर्मण्य' किसे कहा गया है?
(क) फल के चिंतन में आनन्द का अनुभव करने वालों को
(ख) काम करने में आनन्द का अनुभव करने वालों को
(ग) काम न करने वालों को
(घ) अधिक सोचने वालों को
3. _________ कर्म करते हुये चित्त में संतोष का अनुभव ही कर्मवीर का सुख माना गया हे।
(क) अत्याचार का दमन और शमन करने की भावना से
(ख) आत्म-ग्लानि की भावना से
(ग) संतोष या आनन्द की भावना से
(घ) उपचार की भावना से
4. कर्म करने वाले को फल न मिलने पर भी पछतावा क्यों नहीं होता?
5. घर के बीमार सदस्य का उदाहरण क्यों दिया गया है?
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आप एक समृद्ध परिवार से हैं लेकिन आपका मित्र बहुत ग़रीब है। उससे दोस्ती निभाते समय आप कोन-सी सावधानियाँ बरतेंगे और क्यों? टोपी शुक्ला पाठ के संदर्भ में लिखिए।
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सपनों के से दिन पाठ में पीटी सर की किन चारित्रिक विशेषताओं का उत्लेख किया गया है? वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में स्वीकृत मान्यताओं ओर पाठ में वर्णित युक्तियों के सम्बन्ध में अपने विचार जीवन मूल्यों की दूष्टि से व्यक्त कीजिए।
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